शिवसेना (यूबीटी) की रेवंत रेड्डी को नसीहत: उत्तर-दक्षिण विभाजन की राजनीति से बचें
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) ने सोमवार, 8 जून को तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को कड़ी नसीहत दी कि वे उत्तरी और दक्षिणी राज्यों के बीच खाई चौड़ी करने वाले बयानों से परहेज़ करें। पार्टी ने स्पष्ट किया कि भारत का हर राज्य राष्ट्र का अभिन्न अंग है और क्षेत्रीय मतभेदों को हवा देने के बजाय राष्ट्रीय एकता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
विवाद की जड़: रेड्डी का 'द्वितीय श्रेणी नागरिक' वाला बयान
यह प्रतिक्रिया तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के उन बयानों के बाद आई, जो उन्होंने बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत के दौरान दिए थे। रेड्डी ने शनिवार को आरोप लगाया था, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति उत्तर भारत से हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि आप (भाजपा) में हमारा प्रतिनिधित्व करने की ताकत नहीं है।" इसी बातचीत में उन्होंने यह भी दावा किया कि दक्षिण भारत के नागरिक "द्वितीय श्रेणी के नागरिक" बनकर नहीं रहना चाहते।
शिवसेना (यूबीटी) की प्रतिक्रिया
इंडिया ब्लॉक में कांग्रेस की सहयोगी शिवसेना (यूबीटी) ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता रेड्डी से आग्रह किया कि वे क्षेत्रीय विभाजन को बढ़ावा देने वाले बयानों से बाज़ आएँ और राष्ट्रीय एकता के महत्व को रेखांकित करें। गौरतलब है कि यह नसीहत उसी गठबंधन के भीतर से आई है जिसमें रेड्डी की कांग्रेस पार्टी भी शामिल है, जो इस असहमति को और अधिक उल्लेखनीय बनाती है।
प्रवक्ता आनंद दुबे का बयान
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा, "यह सही नहीं है। देश को राज्यों के आधार पर विभाजित न करें। यह देश एक खूबसूरत गुलदस्ते की तरह है। एक फूल एक रंग का है, दूसरा फूल दूसरे रंग का, कुछ की सुगंध अलग है। लेकिन सभी फूल हैं। यह सब एक गुलदस्ता है।"
दुबे ने यह भी ज़ोर देकर कहा कि भौगोलिक स्थिति, भाषा या सांस्कृतिक पहचान से परे, हर राज्य समान सम्मान और मान्यता का हकदार है। उन्होंने कहा, "सभी राज्यों का सम्मान किया जाना चाहिए। वर्तमान मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को यह समझना चाहिए कि जब हम पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में जाते हैं, तो हम उत्तर और दक्षिण नहीं देखते। मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में ये चीजें बदलेंगी।"
व्यापक संदर्भ: उत्तर-दक्षिण विमर्श की पुरानी जड़ें
यह ऐसे समय में आया है जब कर-वितरण, भाषा नीति और जनगणना आधारित परिसीमन को लेकर उत्तर-दक्षिण तनाव पहले से ही राष्ट्रीय विमर्श में केंद्रीय स्थान बना चुका है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान क्षेत्रीय अस्मिता की वैध चिंताओं को उठाते हैं, जबकि समर्थकों का तर्क है कि इनसे राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुँचता है। भारत की शक्ति उसकी विविधता और क्षेत्रीय मतभेदों के बावजूद एकजुट रहने की क्षमता में निहित मानी जाती है।
आगे की राह
शिवसेना (यूबीटी) की इस नसीहत के बाद देखना होगा कि इंडिया ब्लॉक के भीतर यह असहमति किस दिशा में जाती है। रेवंत रेड्डी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।