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तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने दक्षिणी राज्यों के एकजुट विरोध का आह्वान किया

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तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने दक्षिणी राज्यों के एकजुट विरोध का आह्वान किया

सारांश

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने अन्य दक्षिणी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आनुपातिक मॉडल के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि यह कदम दक्षिणी राज्यों के हितों को गंभीर नुकसान पहुंचाएगा।

मुख्य बातें

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने दक्षिणी राज्यों से एकजुटता की अपील की।
आनुपातिक मॉडल से राजनीतिक असंतुलन की आशंका है।
महिला आरक्षण और परिसीमन को भ्रमित किया जा रहा है।
दक्षिणी राज्यों के हितों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
प्रस्तावित मॉडल का सापेक्षिक प्रभाव गंभीर हो सकता है।

हैदराबाद, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मंगलवार को अन्य दक्षिणी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के मुख्यमंत्री से लोकसभा सीटों में 'आनुपातिक मॉडल' लागू करने के केंद्र के प्रयासों का एकजुट होकर विरोध करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह कदम दक्षिणी राज्यों के हितों के लिए अत्यधिक हानिकारक और प्रतिकूल होगा।

रेवंत रेड्डी ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी को अलग-अलग पत्र लिखकर आनुपातिक अनुपात पद्धति से लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्तावित कदम पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इसके दक्षिणी राज्यों और देश के संघीय संतुलन पर दूरगामी प्रभाव होंगे।

उन्होंने दक्षिणी राज्यों और सभी समान विचारधारा वाले राज्यों के बीच सामूहिक भागीदारी की बढ़ती आवश्यकता पर बल दिया, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर हमारी चिंताओं को प्रभावी ढंग से व्यक्त किया जा सके।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण, राष्ट्रीय परिसीमन और लोकसभा सीटों में वृद्धि तीन अलग-अलग मुद्दे हैं, जिन्हें जानबूझकर जनता के मन में भ्रम पैदा करने के लिए मिलाया जा रहा है।

कांग्रेस नेता ने लिखा कि जो लोग महिला आरक्षण विधेयक (सीटों में वृद्धि से जोड़े बिना) या परिसीमन का समर्थन कर रहे हैं, वे केवल राज्यों के भीतर विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं को बदलना चाहते हैं।

रेवंत रेड्डी ने कहा कि असली विवादित मुद्दा आनुपातिक आधार पर लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। हम आनुपातिक विधि से सीटों में वृद्धि का पूरी तरह से विरोध करेंगे और करना ही चाहिए। उन्होंने आनुपातिक मॉडल के अंतर्निहित गणित और राज्यों के बीच राजनीतिक शक्ति के अंतर में होने वाले परिवर्तन को भी समझाया।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को लिखे पत्र में कहा कि इस ढांचे के तहत, भले ही सभी राज्यों में सीटों की कुल संख्या में वृद्धि हो, लेकिन राज्यों के बीच सापेक्ष अंतर काफी बढ़ जाएगा। उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश में वर्तमान में 25 लोकसभा सीटें हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में 80 सीटें हैं, यानी 55 सीटों का अंतर है। उनके प्रस्तावित मॉडल के तहत, आंध्र प्रदेश में सीटों की संख्या 25 से बढ़कर लगभग 38 हो जाएगी, जबकि उत्तर प्रदेश में बढ़कर 120 सीटें हो जाएंगी। इससे राजनीतिक अंतर 55 सीटों से बढ़कर 82 सीटों तक पहुंच जाएगा, जिससे प्रतिनिधित्व में संरचनात्मक असंतुलन और भी बढ़ जाएगा।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि प्रस्तावित मॉडल के तहत, तमिलनाडु और पुडुचेरी में मिलाकर लोकसभा सीटों की संख्या 40 से बढ़कर लगभग 60 हो सकती है, जबकि उत्तर प्रदेश में बढ़कर लगभग 120 सीटें हो सकती हैं। इससे राजनीतिक अंतर 40 सीटों से बढ़कर 60 सीटों तक पहुंच जाएगा।

रेवंत रेड्डी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को लिखे पत्र में कहा कि उनके प्रस्तावित मॉडल के तहत, कर्नाटक की लोकसभा सीटें 28 से बढ़कर लगभग 42 हो जाएंगी, जबकि उत्तर प्रदेश की सीटें बढ़कर 120 हो जाएंगी। इससे राजनीतिक अंतर 52 सीटों से बढ़कर 78 सीटों तक पहुंच जाएगा।

उन्होंने इसी तरह समझाया कि कैसे प्रस्तावित मॉडल केरल और उत्तर प्रदेश के बीच राजनीतिक अंतर को 60 सीटों से बढ़ाकर 90 सीटों तक कर देगा।

पत्र में कहा गया है कि इसलिए आनुपातिक प्रणाली का प्रभावी अर्थ यह है कि संसद में आपके राज्य की आवाज और प्रभाव सापेक्ष रूप से कम हो जाएगा, जबकि राष्ट्र के प्रति उसका योगदान लगातार बढ़ता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि कैसे केंद्र के निर्णय राज्यों के बीच असंतुलन पैदा कर सकते हैं।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने किस मुद्दे पर विरोध का आह्वान किया?
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने लोकसभा सीटों में 'आनुपातिक मॉडल' लागू करने के खिलाफ विरोध का आह्वान किया।
इस विरोध का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण यह है कि यह कदम दक्षिणी राज्यों के हितों के लिए अत्यधिक हानिकारक माना जा रहा है।
रेवंत रेड्डी ने किस तरह के पत्र लिखे?
उन्होंने विभिन्न दक्षिणी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को अलग-अलग पत्र लिखकर अपनी चिंता व्यक्त की।
आनुपातिक मॉडल का प्रभाव क्या हो सकता है?
इससे राज्यों के बीच राजनीतिक शक्ति में असंतुलन बढ़ सकता है।
महिला आरक्षण का क्या संबंध है?
महिला आरक्षण, राष्ट्रीय परिसीमन, और लोकसभा सीटों में वृद्धि को जानबूझकर भ्रमित किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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