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बैशाख अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग का खास महत्व, जानें राहुकाल

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बैशाख अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग का खास महत्व, जानें राहुकाल

सारांश

बैशाख अमावस्या का पर्व 17 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन श्राद्ध और कालसर्प दोष निवारण के लिए विशेष पूजा का महत्व है। जानिए सर्वार्थ सिद्धि योग और राहुकाल के बारे में।

मुख्य बातें

बैशाख अमावस्या पर श्राद्ध और तर्पण का महत्व।
सर्वार्थ सिद्धि योग का फलदायी प्रभाव।
राहुकाल और अन्य शुभ मुहूर्त की जानकारी।
कालसर्प दोष निवारण के लिए विशेष पूजा।
अमावस्या पर पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने की विधि।

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमावस्या के दिन पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति के लिए श्राद्ध कर्म करने का विशेष महत्व होता है। इसके साथ ही कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए पूजा करना भी इस दिन अत्यंत लाभकारी साबित होता है। शुक्रवार, 17 अप्रैल को बैशाख अमावस्या का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग प्रभावी रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या को अमावस या अमावसी भी कहा जाता है। यह मान्यता है कि इस दिन पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद सदा बना रहता है। कालसर्प दोष से परेशान लोग इस दिन विशेष अनुष्ठान करके अपने दोष का निवारण कर सकते हैं। बैशाख अमावस्या पर श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य करने से पितृ दोष शांत होता है।

बैशाख अमावस्या पर सूर्योदय सुबह 5 बजकर 54 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 48 मिनट पर होगा। अमावस्या तिथि शुक्रवार की दोपहर 5 बजकर 21 मिनट तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा आरंभ होगी। हालांकि, उदयातिथि (सूर्य उदय के समय जो तिथि हो) के अनुसार, पूरे दिन अमावस्या तिथि मान्य होगी। नक्षत्र रेवती दोपहर 12 बजकर 2 मिनट तक रहेगा, उसके बाद अश्विनी नक्षत्र लगेगा। योग वैधृति सुबह 7 बजकर 22 मिनट तक रहेगा और करण चतुष्पाद सुबह 6 बजकर 49 मिनट तक रहेगा।

दृक पंचांग के अनुसार, शुक्रवार को पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग प्रभावी रहेगा। अमृत सिद्धि योग सुबह 5 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। अमृत काल सुबह 9 बजकर 50 मिनट से 11 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 55 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। वहीं, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 22 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 47 मिनट से 7 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 25 मिनट से 5 बजकर 9 मिनट तक रहेगा।

अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल सुबह 10 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। यमगंड दोपहर 3 बजकर 34 मिनट से 5 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। वहीं, गुलिक काल सुबह 7 बजकर 31 मिनट से 9 बजकर 7 मिनट तक और दुर्मुहूर्त सुबह 8 बजकर 29 मिनट से 9 बजकर 20 मिनट तक और दोपहर 12 बजकर 47 मिनट से 1 बजकर 38 मिनट तक रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसे एक महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इस दिन की धार्मिक मान्यता और योग के प्रभाव को समझना आवश्यक है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बैशाख अमावस्या का क्या महत्व है?
बैशाख अमावस्या पर पितरों के लिए श्राद्ध और कालसर्प दोष निवारण की विशेष पूजा का महत्व है।
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का क्या अर्थ है?
सर्वार्थ सिद्धि योग किसी भी शुभ कार्य के लिए अत्यंत फलदायी होता है।
अमावस्या पर क्या करना चाहिए?
अमावस्या पर श्राद्ध कर्म, तर्पण और दान-पुण्य करना चाहिए।
बैशाख अमावस्या पर कौन-से नक्षत्र प्रभावी हैं?
इस दिन रेवती और अश्विनी नक्षत्र प्रभावी रहेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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