13 जुलाई 2026
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14 जुलाई 2026 पंचांग: भौमवती अमावस्या पर पितृ-हनुमान-शिव पूजा का विशेष संयोग, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:06–12:59

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14 जुलाई 2026 पंचांग: भौमवती अमावस्या पर पितृ-हनुमान-शिव पूजा का विशेष संयोग, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:06–12:59

सारांश

14 जुलाई 2026 को मंगलवार और अमावस्या का दुर्लभ मेल — भौमवती अमावस्या। पितृ-तर्पण, हनुमान और शिव पूजा के लिए विशेष दिन। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:06 से 12:59 बजे तक; राहुकाल दोपहर 3:54 से 5:38 बजे तक।

मुख्य बातें

14 जुलाई 2026 को भौमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग — अमावस्या तिथि दोपहर 3:13 बजे तक।
इस दिन पितरों , हनुमान जी और भगवान शिव की पूजा से विशेष फल की मान्यता।
अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:06 से 12:59 बजे तक — दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ काल।
राहुकाल दोपहर 3:54–5:38 , गुलिक काल 12:27–2:10 , यमगंड काल सुबह 9:13–10:53 बजे — नए कार्यों से परहेज।
उत्तर दिशा में दिशाशूल ; इस दिशा में यात्रा से बचने की सलाह।
सूर्य मिथुन व चंद्रमा कर्क राशि में; दोनों पुनर्वसु नक्षत्र में गोचर।

14 जुलाई 2026 (मंगलवार) को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि दोपहर 3:13 बजे तक प्रभावी रहेगी, जिसके बाद प्रतिपदा आरंभ हो जाएगी। मंगलवार को पड़ने के कारण यह भौमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग है — पंचांग के अनुसार इस विशेष दिन पितरों, हनुमान जी और भगवान शिव की पूजा-अर्चना से असाधारण फल की प्राप्ति होती है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र स्थिति

इस दिन सूर्योदय सुबह 5:53 बजे और सूर्यास्त शाम 7:11 बजे होगा। चन्द्रोदय सुबह 5:22 बजे तथा चन्द्रास्त शाम 7:29 बजे होगा। पंचांग के अनुसार सूर्य इस दिन पुनर्वसु नक्षत्र में गोचर करेंगे, जबकि चंद्रमा भी पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा और अगले दिन 12:09 बजे नक्षत्र परिवर्तन करेगा। राशि की दृष्टि से सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में स्थित रहेंगे।

शुभ मुहूर्त: अभिजित काल

मंगलवार को दिन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:06 बजे से 12:59 बजे तक रहेगा। परंपरागत मान्यता के अनुसार इस अवधि में राहुकाल या अन्य अशुभ कालों की परवाह किए बिना कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा, व्यापार या नई शुरुआत की जा सकती है।

योग और अशुभ काल

14 जुलाई को सुबह 11:56 बजे तक व्याघात योग रहेगा; इसके उपरांत अगले दिन सुबह 8:03 बजे तक हर्षण योग प्रभावी होगा। अशुभ कालों में राहुकाल दोपहर 3:54 बजे से शाम 5:38 बजे तक, गुलिक काल दोपहर 12:27 से 2:10 बजे तक, तथा यमगंड काल सुबह 9:13 से 10:53 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन कालों में नए कार्यों का आरंभ वर्जित माना गया है।

दिशाशूल और यात्रा सावधानी

14 जुलाई 2026 को उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु परंपरा के अनुसार इस दिन उत्तर दिशा में यात्रा से बचना उचित माना जाता है। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।

भौमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व

हिंदू काल-गणना पद्धति पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित होती है। जब अमावस्या मंगलवार को पड़ती है, तो उसे भौमवती अमावस्या कहते हैं — यह संयोग वर्ष में गिने-चुने बार ही बनता है। इस दिन पितृ-तर्पण, हनुमान जी की विशेष आराधना और शिव-अभिषेक का विशेष पुण्य फल बताया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस बार यह आषाढ़ माह में पड़ रहा है — जो पितृ-कर्म और शिव-आराधना दोनों के लिए परंपरागत रूप से महत्वपूर्ण माह है। पंचांग-आधारित दिनचर्या आज भी करोड़ों भारतीय परिवारों के निर्णयों को प्रभावित करती है, और इस तरह की सटीक समय-सारणी उनकी व्यावहारिक ज़रूरत पूरी करती है। उल्लेखनीय है कि अभिजित मुहूर्त और राहुकाल एक-दूसरे के निकट हैं — अतः श्रद्धालुओं को समय का विशेष ध्यान रखना होगा।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भौमवती अमावस्या 2026 कब है और इसका क्या महत्व है?
भौमवती अमावस्या 14 जुलाई 2026 (मंगलवार) को है; अमावस्या तिथि दोपहर 3:13 बजे तक रहेगी। मंगलवार को अमावस्या पड़ने से यह दुर्लभ संयोग बनता है, जिसमें पितृ-तर्पण, हनुमान जी और भगवान शिव की पूजा का विशेष फल माना जाता है।
14 जुलाई 2026 को अभिजित मुहूर्त कितने बजे है?
14 जुलाई 2026 को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:06 बजे से 12:59 बजे तक रहेगा। यह दिन का सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है, जिसमें राहुकाल की चिंता किए बिना महत्वपूर्ण कार्य आरंभ किए जा सकते हैं।
14 जुलाई 2026 को राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल कब है?
राहुकाल दोपहर 3:54 से शाम 5:38 बजे, गुलिक काल दोपहर 12:27 से 2:10 बजे और यमगंड काल सुबह 9:13 से 10:53 बजे तक रहेगा। इन तीनों कालों में नए कार्यों का आरंभ पारंपरिक रूप से अशुभ माना गया है।
14 जुलाई 2026 को दिशाशूल किस दिशा में है?
14 जुलाई 2026 को उत्तर दिशा में दिशाशूल है। ज्योतिष परंपरा के अनुसार इस दिन उत्तर दिशा में यात्रा से बचना चाहिए; यदि यात्रा अनिवार्य हो तो विशेष उपाय अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।
14 जुलाई 2026 को सूर्य और चंद्रमा किस राशि और नक्षत्र में हैं?
14 जुलाई 2026 को सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में स्थित रहेंगे। नक्षत्र की दृष्टि से सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में गोचर करेंगे और चंद्रमा अगले दिन दोपहर 12:09 बजे नक्षत्र परिवर्तन करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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