14 जुलाई 2026 पंचांग: भौमवती अमावस्या पर पितृ-हनुमान-शिव पूजा का विशेष संयोग, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:06–12:59
सारांश
मुख्य बातें
14 जुलाई 2026 (मंगलवार) को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि दोपहर 3:13 बजे तक प्रभावी रहेगी, जिसके बाद प्रतिपदा आरंभ हो जाएगी। मंगलवार को पड़ने के कारण यह भौमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग है — पंचांग के अनुसार इस विशेष दिन पितरों, हनुमान जी और भगवान शिव की पूजा-अर्चना से असाधारण फल की प्राप्ति होती है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र स्थिति
इस दिन सूर्योदय सुबह 5:53 बजे और सूर्यास्त शाम 7:11 बजे होगा। चन्द्रोदय सुबह 5:22 बजे तथा चन्द्रास्त शाम 7:29 बजे होगा। पंचांग के अनुसार सूर्य इस दिन पुनर्वसु नक्षत्र में गोचर करेंगे, जबकि चंद्रमा भी पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा और अगले दिन 12:09 बजे नक्षत्र परिवर्तन करेगा। राशि की दृष्टि से सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में स्थित रहेंगे।
शुभ मुहूर्त: अभिजित काल
मंगलवार को दिन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:06 बजे से 12:59 बजे तक रहेगा। परंपरागत मान्यता के अनुसार इस अवधि में राहुकाल या अन्य अशुभ कालों की परवाह किए बिना कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा, व्यापार या नई शुरुआत की जा सकती है।
योग और अशुभ काल
14 जुलाई को सुबह 11:56 बजे तक व्याघात योग रहेगा; इसके उपरांत अगले दिन सुबह 8:03 बजे तक हर्षण योग प्रभावी होगा। अशुभ कालों में राहुकाल दोपहर 3:54 बजे से शाम 5:38 बजे तक, गुलिक काल दोपहर 12:27 से 2:10 बजे तक, तथा यमगंड काल सुबह 9:13 से 10:53 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन कालों में नए कार्यों का आरंभ वर्जित माना गया है।
दिशाशूल और यात्रा सावधानी
14 जुलाई 2026 को उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु परंपरा के अनुसार इस दिन उत्तर दिशा में यात्रा से बचना उचित माना जाता है। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।
भौमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व
हिंदू काल-गणना पद्धति पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित होती है। जब अमावस्या मंगलवार को पड़ती है, तो उसे भौमवती अमावस्या कहते हैं — यह संयोग वर्ष में गिने-चुने बार ही बनता है। इस दिन पितृ-तर्पण, हनुमान जी की विशेष आराधना और शिव-अभिषेक का विशेष पुण्य फल बताया गया है।