14 जून 2026 पंचांग: दर्श अमावस्या और पुरुषोत्तम मास के 29वें दिन के शुभ-अशुभ मुहूर्त
सारांश
मुख्य बातें
सनातन धर्म में पंचांग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — को दैनिक जीवन का आधार माना जाता है। 14 जून 2026 (रविवार) को पुरुषोत्तम मास का 29वाँ दिन है और इस दिन दर्श अमावस्या का संयोग भी बन रहा है, जो पितर-पूजन की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।
तिथि और नक्षत्र विवरण
इस दिन ज्येष्ठ मास, कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि रहेगी। चतुर्दशी दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक रहेगी, जिसके पश्चात अमावस्या तिथि आरंभ होगी। नक्षत्र की बात करें तो रोहिणी नक्षत्र रात 10 बजकर 14 मिनट तक रहेगा, उसके बाद मृगशिरा नक्षत्र प्रारंभ होगा।
योग धृति दोपहर 1 बजकर 15 मिनट तक और करण शकुनि दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक प्रभावी रहेगा। सूर्योदय प्रातः 5 बजकर 23 मिनट पर और सूर्यास्त सायं 7 बजकर 20 मिनट पर होगा।
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 4:02 से 4:43 बजे तक रहेगा — यह ध्यान, पूजन और मंत्र-जाप के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त प्रातः 11:54 से दोपहर 12:49 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2:41 से 3:37 बजे तक रहेगा।
गोधूलि मुहूर्त सायं 7:19 से 7:39 बजे तक और अमृत काल सायं 7:26 से रात 8:50 बजे तक रहेगा। ये मुहूर्त शुभ कार्यों, यात्रा और नए उपक्रमों के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।
अशुभ समय — राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल
राहुकाल सायं 5:35 से 7:20 बजे तक रहेगा। यमगंड दोपहर 12:21 से 2:06 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 3:51 से 5:35 बजे तक प्रभावी रहेगा।
दुर्मुहूर्त सायं 5:28 से 6:24 बजे तक और आडल योग प्रातः 5:23 से रात 10:14 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन कालखंडों में महत्वपूर्ण कार्य, अनुबंध या यात्रा आरंभ करने से बचना उचित रहता है।
दर्श अमावस्या का धार्मिक महत्व
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार दर्श अमावस्या पितर-तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य के लिए विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। इस दिन नए कार्य आरंभ करने की बजाय पितरों का स्मरण, जलतर्पण और ब्राह्मण-भोजन जैसे धार्मिक अनुष्ठान करना शास्त्रसम्मत बताया गया है। पुरुषोत्तम मास में पड़ने वाली यह अमावस्या आध्यात्मिक साधना की दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे वर्ज्य समय और बाण काल का भी ध्यान रखें तथा राहुकाल और दुर्मुहूर्त में कोई शुभ कार्य न करें। आने वाले दिनों में पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्तों की जाँच करते रहना लाभकारी रहेगा।