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रेवंत रेड्डी के 'दूसरे दर्जे का नागरिक' बयान पर भाजपा का पलटवार, कांग्रेस पर लगाया 'भारत तोड़ो' का आरोप

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रेवंत रेड्डी के 'दूसरे दर्जे का नागरिक' बयान पर भाजपा का पलटवार, कांग्रेस पर लगाया 'भारत तोड़ो' का आरोप

सारांश

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का 'दूसरे दर्जे का नागरिक' बयान एक बड़े राजनीतिक तूफान में बदल गया है। BJP ने इसे संविधान और भारत विरोधी करार दिया, जबकि यह विवाद परिसीमन और दक्षिणी राज्यों के वित्तीय हिस्से की पुरानी बहस को फिर से हवा दे रहा है।

मुख्य बातें

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बेंगलुरु में 'द हिंदू हडल' कार्यक्रम में कहा कि दक्षिण भारतीयों को दिल्ली में 'दूसरे दर्जे का नागरिक' जैसा महसूस कराया जाता है।
BJP ने बयान को संविधान विरोधी और भारत विरोधी करार दिया; राहुल गांधी से कार्रवाई की माँग की।
शहजाद पूनावाला ने रेड्डी की तुलना 'आधुनिक दौर के जिन्ना' से की और कांग्रेस पर 'भारत तोड़ो' राजनीति का आरोप लगाया।
प्रदीप भंडारी ने एक्स पर लिखा कि कांग्रेस की 'फूट डालो और राज करो' नीति सफल नहीं होगी; निर्मला सीतारमण और सी.पी.
राधाकृष्णन का उदाहरण देकर दक्षिण प्रतिनिधित्व का दावा किया।
रेड्डी ने परिसीमन के ज़रिए राजनीतिक असंतुलन बढ़ाने का आरोप BJP पर लगाया था।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के 'दूसरे दर्जे का नागरिक' वाले बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 7 जून 2026 को कड़ा पलटवार किया और इसे संविधान विरोधी तथा भारत विरोधी करार दिया। पार्टी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर देश को क्षेत्रीय आधार पर बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया।

रेवंत रेड्डी ने क्या कहा था

दरअसल, मुख्यमंत्री रेड्डी ने शनिवार को बेंगलुरु में आयोजित 'द हिंदू हडल' कार्यक्रम में कहा था कि दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक ताकत कम होने के कारण उन्हें दिल्ली में दूसरे दर्जे के नागरिक जैसा महसूस कराया जाता है। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के लोग कर चुकाते हैं, लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व में असंतुलन स्वीकार नहीं करेंगे। रेड्डी ने यह भी आरोप लगाया कि BJP परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया के ज़रिए इस असंतुलन को और गहरा करने की कोशिश कर रही है।

भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने वीडियो बयान जारी कर कहा कि रेवंत रेड्डी 'आधुनिक दौर के जिन्ना' की तरह व्यवहार कर रहे हैं और भारत को बांटने वाली भाषा बोल रहे हैं। उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से सीधा सवाल किया कि वे इस बयान पर रेवंत रेड्डी के खिलाफ क्या कार्रवाई करेंगे।

पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस ने कभी 'भारत जोड़ो यात्रा' निकाली थी, लेकिन अब उसकी राजनीति 'भारत तोड़ो' जैसी हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस संविधान और भारत दोनों के विरुद्ध काम कर रही है। पूनावाला ने यह भी कहा कि रेवंत रेड्डी यह संदेश दे रहे हैं कि उत्तर भारत से आने वाले राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री उन्हें स्वीकार नहीं हैं — जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात (पश्चिम भारत) से हैं और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ओडिशा (पूर्वी भारत) से।

पुराने बयानों का हवाला

पूनावाला ने दावा किया कि कांग्रेस नेताओं की ओर से इस तरह की भाषा पहली बार नहीं बोली गई है। उन्होंने कर्नाटक के कांग्रेस नेता डी.के. सुरेश और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के नेताओं के पुराने बयानों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल क्षेत्रीय व जातीय आधार पर देश को बांटने की राजनीति करते हैं।

प्रदीप भंडारी का एक्स पर हमला

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि कांग्रेस की 'फूट डालो और राज करो' की राजनीति सफल नहीं होगी। भंडारी ने कहा कि राष्ट्रपति पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती हैं और उनके बारे में इस तरह की टिप्पणी पूरे देश का अपमान है।

भंडारी ने यह भी तर्क दिया कि केंद्र सरकार में दक्षिण भारत को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला है। उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के सभी क्षेत्रों को समान महत्व दिया जा रहा है।

आगे क्या होगा

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब परिसीमन और दक्षिणी राज्यों के वित्तीय हिस्से को लेकर केंद्र-राज्य तनाव पहले से चर्चा में है। गौरतलब है कि तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक की सरकारें लंबे समय से कर वितरण में असंतुलन का मुद्दा उठाती रही हैं। अब देखना होगा कि कांग्रेस आलाकमान इस बयान से किस तरह पल्ला झाड़ती है या उसका बचाव करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

'दूसरे दर्जे का नागरिक' जैसी भाषा भावनात्मक तो है, लेकिन नीतिगत समाधान की दिशा में कोई ठोस रास्ता नहीं सुझाती। असली सवाल यह है कि परिसीमन आयोग किस फॉर्मूले पर काम करेगा — और उस पर न तो रेड्डी और न ही BJP ने अब तक पारदर्शी रुख अपनाया है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रेवंत रेड्डी ने 'दूसरे दर्जे का नागरिक' वाला बयान कहाँ और क्यों दिया?
रेवंत रेड्डी ने यह बयान बेंगलुरु में 'द हिंदू हडल' कार्यक्रम के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक ताकत कम होने और परिसीमन के कारण प्रतिनिधित्व में असंतुलन बढ़ रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है।
BJP ने रेवंत रेड्डी के बयान को संविधान विरोधी क्यों बताया?
BJP के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला का तर्क था कि यह बयान उत्तर-दक्षिण के आधार पर देश को विभाजित करता है और राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पदों की स्वीकार्यता पर सवाल उठाता है। पार्टी के अनुसार, संविधान सभी नागरिकों को समान दर्जा देता है।
परिसीमन विवाद और दक्षिण भारत की चिंता क्या है?
परिसीमन में लोकसभा सीटों का पुनर्निर्धारण जनसंख्या के आधार पर होता है। दक्षिणी राज्यों की चिंता है कि जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहने के बावजूद उनकी सीटें कम हो सकती हैं, जिससे राजनीतिक प्रतिनिधित्व घटेगा।
BJP ने दक्षिण भारत को प्रतिनिधित्व देने के क्या उदाहरण दिए?
BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के सभी क्षेत्रों को केंद्र सरकार में उचित स्थान मिला है।
क्या कांग्रेस नेताओं ने पहले भी इस तरह के बयान दिए हैं?
BJP के अनुसार, कर्नाटक के कांग्रेस नेता डी.के. सुरेश और DMK नेताओं के पुराने बयानों में भी इसी तरह की क्षेत्रीय भाषा का इस्तेमाल हुआ है। हालाँकि, इन बयानों का संदर्भ और तात्पर्य अलग-अलग रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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