गहलोत के 'भाजपा पर प्रतिबंध' वाले बयान पर आठवले का पलटवार: 'यह लोकतंत्र के खिलाफ है'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने 15 जून 2026 को मुंबई में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें गहलोत ने कहा था कि यदि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आज जीवित होतीं तो वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर प्रतिबंध लगा देतीं। आठवले ने इस बयान को 'हास्यास्पद' और 'लोकतांत्रिक मूल्यों के सर्वथा विरुद्ध' करार दिया।
आठवले की तीखी प्रतिक्रिया
आठवले ने कहा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में गहलोत को इस प्रकार की टिप्पणी करने से बचना चाहिए। उनके अनुसार, किसी लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल पर प्रतिबंध लगाने की कल्पना करना भारतीय संविधान की भावना के विपरीत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि BJP लोकतंत्र में पूर्ण आस्था रखने वाली पार्टी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी वर्गों को साथ लेकर देश के विकास के लिए काम कर रहे हैं।
धार्मिक ध्रुवीकरण के आरोपों पर जवाब
गहलोत ने हाल ही में आरोप लगाया था कि BJP धर्म के मुद्दे को आधार बनाकर देश में धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे रही है, जिससे राष्ट्र कमज़ोर हो रहा है। इस पर पलटवार करते हुए आठवले ने कहा कि भारत विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों का देश है, जहाँ सभी समुदाय अपनी परंपराओं के अनुसार जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की राजनीति में 'बाँटो और राज करो' की मानसिकता हमेशा से रही है, जबकि BJP सभी धर्मों और वर्गों को साथ लेकर चलने में विश्वास करती है।
टीएमसी बागी सांसदों पर आठवले की राय
पश्चिम बंगाल की सियासत और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों के नई राजनीतिक राह चुनने के मुद्दे पर भी आठवले ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि इन बागी सांसदों ने त्रिपुरा की एक राजनीतिक पार्टी के साथ जाने का फैसला किया है और वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ आए हैं, जिसका वह स्वागत करते हैं। आठवले ने यह भी कहा कि उन्हें अधिक प्रसन्नता होती यदि ये नेता रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) में शामिल होते, क्योंकि उनकी पार्टी मणिपुर और नागालैंड जैसे राज्यों में मान्यता प्राप्त है। उन्होंने कहा कि यदि ये नेता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों से जुड़ी पार्टी में आते तो यह और बेहतर होता।
महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष को घेरा
महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर भी आठवले ने विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। उनके अनुसार, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और TMC जैसे दलों के कारण यह विधेयक लंबे समय तक अटका रहा। उन्होंने संकेत दिया कि अब इसके पारित होने की राह आसान हो सकती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब महिला आरक्षण को लेकर संसद में नई बहस छिड़ने के आसार हैं।
आगे क्या
गहलोत के बयान और आठवले की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर BJP-कांग्रेस के बीच वैचारिक टकराव को सतह पर ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस प्रकार के बयान आगामी चुनावी मौसम में दोनों पार्टियों के बीच तेज़ होती वाकयुद्ध की आहट हैं।