31 जुलाई 2026
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गहलोत के 'भाजपा पर प्रतिबंध' वाले बयान पर आठवले का पलटवार: 'यह लोकतंत्र के खिलाफ है'

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गहलोत के 'भाजपा पर प्रतिबंध' वाले बयान पर आठवले का पलटवार: 'यह लोकतंत्र के खिलाफ है'

सारांश

गहलोत के 'इंदिरा गांधी होतीं तो BJP पर प्रतिबंध लगातीं' वाले बयान पर आठवले ने तीखा पलटवार किया — इसे लोकतंत्र विरोधी बताया। साथ ही TMC बागी सांसदों के NDA में आने का स्वागत किया और महिला आरक्षण में देरी के लिए कांग्रेस-सपा-TMC को जिम्मेदार ठहराया।

मुख्य बातें

केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने 15 जून 2026 को मुंबई में अशोक गहलोत के BJP-प्रतिबंध वाले बयान को 'हास्यास्पद' और 'लोकतंत्र के खिलाफ' बताया।
गहलोत ने कहा था कि इंदिरा गांधी आज होतीं तो BJP पर प्रतिबंध लगा देतीं; आठवले ने इसे संविधान की भावना के विरुद्ध करार दिया।
आठवले ने TMC के बागी सांसदों के NDA में शामिल होने का स्वागत किया, लेकिन कहा कि RPI में आते तो बेहतर होता।
महिला आरक्षण विधेयक में देरी के लिए कांग्रेस , समाजवादी पार्टी और TMC को जिम्मेदार ठहराया।
आठवले ने कांग्रेस पर 'बाँटो और राज करो' की मानसिकता का आरोप लगाया।

केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने 15 जून 2026 को मुंबई में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें गहलोत ने कहा था कि यदि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आज जीवित होतीं तो वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर प्रतिबंध लगा देतीं। आठवले ने इस बयान को 'हास्यास्पद' और 'लोकतांत्रिक मूल्यों के सर्वथा विरुद्ध' करार दिया।

आठवले की तीखी प्रतिक्रिया

आठवले ने कहा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में गहलोत को इस प्रकार की टिप्पणी करने से बचना चाहिए। उनके अनुसार, किसी लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल पर प्रतिबंध लगाने की कल्पना करना भारतीय संविधान की भावना के विपरीत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि BJP लोकतंत्र में पूर्ण आस्था रखने वाली पार्टी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी वर्गों को साथ लेकर देश के विकास के लिए काम कर रहे हैं।

धार्मिक ध्रुवीकरण के आरोपों पर जवाब

गहलोत ने हाल ही में आरोप लगाया था कि BJP धर्म के मुद्दे को आधार बनाकर देश में धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे रही है, जिससे राष्ट्र कमज़ोर हो रहा है। इस पर पलटवार करते हुए आठवले ने कहा कि भारत विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों का देश है, जहाँ सभी समुदाय अपनी परंपराओं के अनुसार जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की राजनीति में 'बाँटो और राज करो' की मानसिकता हमेशा से रही है, जबकि BJP सभी धर्मों और वर्गों को साथ लेकर चलने में विश्वास करती है।

टीएमसी बागी सांसदों पर आठवले की राय

पश्चिम बंगाल की सियासत और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों के नई राजनीतिक राह चुनने के मुद्दे पर भी आठवले ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि इन बागी सांसदों ने त्रिपुरा की एक राजनीतिक पार्टी के साथ जाने का फैसला किया है और वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ आए हैं, जिसका वह स्वागत करते हैं। आठवले ने यह भी कहा कि उन्हें अधिक प्रसन्नता होती यदि ये नेता रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) में शामिल होते, क्योंकि उनकी पार्टी मणिपुर और नागालैंड जैसे राज्यों में मान्यता प्राप्त है। उन्होंने कहा कि यदि ये नेता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों से जुड़ी पार्टी में आते तो यह और बेहतर होता।

महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष को घेरा

महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर भी आठवले ने विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। उनके अनुसार, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और TMC जैसे दलों के कारण यह विधेयक लंबे समय तक अटका रहा। उन्होंने संकेत दिया कि अब इसके पारित होने की राह आसान हो सकती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब महिला आरक्षण को लेकर संसद में नई बहस छिड़ने के आसार हैं।

आगे क्या

गहलोत के बयान और आठवले की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर BJP-कांग्रेस के बीच वैचारिक टकराव को सतह पर ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस प्रकार के बयान आगामी चुनावी मौसम में दोनों पार्टियों के बीच तेज़ होती वाकयुद्ध की आहट हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस कांग्रेसी रणनीति का हिस्सा लगता है जो BJP को संवैधानिक खतरे के रूप में पेश करना चाहती है — एक ऐसा नैरेटिव जो विपक्ष के लिए चुनावी रूप से उपयोगी है। आठवले का पलटवार सधा हुआ है, लेकिन 'बाँटो और राज करो' का आरोप तब और विश्वसनीय होता जब BJP की अपनी राज्य-स्तरीय राजनीति में धार्मिक ध्रुवीकरण के सवालों का ठोस जवाब दिया जाता। महिला आरक्षण पर विपक्ष को घेरना आठवले के लिए सुरक्षित ज़मीन है, लेकिन यह भी उल्लेखनीय है कि विधेयक दशकों से लटका रहा — तब भी जब सत्ता के गलियारे अलग थे।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अशोक गहलोत ने BJP के बारे में क्या बयान दिया था?
गहलोत ने कहा था कि यदि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आज जीवित होतीं, तो वे BJP पर प्रतिबंध लगा देतीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि BJP धर्म के मुद्दे को आधार बनाकर देश में धार्मिक ध्रुवीकरण कर रही है।
रामदास आठवले ने गहलोत के बयान पर क्या कहा?
आठवले ने गहलोत के बयान को हास्यास्पद और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री को इस तरह की टिप्पणी से बचना चाहिए और BJP लोकतंत्र में पूर्ण विश्वास रखती है।
TMC के बागी सांसदों ने कौन सा फैसला किया है?
TMC के बागी सांसदों ने त्रिपुरा की एक राजनीतिक पार्टी के साथ जाने और NDA में शामिल होने का फैसला किया है। आठवले ने इसका स्वागत किया, हालाँकि उन्होंने कहा कि वे चाहते थे कि ये नेता RPI में आते।
महिला आरक्षण विधेयक में देरी के लिए आठवले ने किसे जिम्मेदार ठहराया?
आठवले ने समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और TMC को महिला आरक्षण विधेयक के लंबे समय तक अटके रहने के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अब इसके पारित होने की राह आसान हो सकती है।
रामदास आठवले कौन हैं और उनकी पार्टी कहाँ-कहाँ मान्यता प्राप्त है?
रामदास आठवले केंद्रीय राज्यमंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के नेता हैं। उनकी पार्टी मणिपुर और नागालैंड जैसे राज्यों में मान्यता प्राप्त है और वे NDA के घटक दल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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