मदन राठौड़ का गहलोत पर हमला: 'विधायक बिके तो कार्यकाल में कार्रवाई क्यों नहीं की?'
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने बुधवार, 24 जून 2026 को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर तीखा प्रहार करते हुए पूछा कि यदि विधायक और सांसद सचमुच 'बिक' गए थे, तो गहलोत ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। राठौड़ की यह प्रतिक्रिया गहलोत के उस बयान के जवाब में आई जिसमें उन्होंने कथित तौर पर जन-प्रतिनिधियों के लिए 'घोड़े, गधे, भैंस और बकरियां' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था।
विवाद की पृष्ठभूमि
गहलोत ने हाल ही में एक बयान में विधायकों और सांसदों के 'बिकने' का जिक्र किया था और जन-प्रतिनिधियों को लेकर विवादास्पद भाषा का प्रयोग किया था। इस बयान ने राजस्थान की राजनीति में नई बहस छेड़ दी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे कांग्रेस की आंतरिक राजनीति का प्रतिबिंब बताते हुए पलटवार किया।
राठौड़ के मुख्य आरोप
राठौड़ ने आरोप लगाया कि गहलोत ने अपने तीनों मुख्यमंत्री कार्यकालों में राजस्थान के विकास और जन-कल्याण को प्राथमिकता देने के बजाय अपने राजनीतिक नेतृत्व — विशेषकर गांधी परिवार — को खुश करने में अपनी ऊर्जा लगाई। उन्होंने यह भी कहा कि गहलोत ने अपने बेटे के राजनीतिक करियर को आगे बढ़ाने में भी समय खपाया, जबकि जन-मुद्दे, बुनियादी सुविधाएं और विकास कार्य पीछे छूटते रहे।
राठौड़ के अनुसार, गहलोत का गृह जिला आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है — जो इतने लंबे राजनीतिक कार्यकाल के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
गहलोत पर 'अवसरवादी राजनीति' का आरोप
राठौड़ ने कहा कि गहलोत आज भी ऐसी राजनीति कर रहे हैं जिसका मकसद गांधी परिवार के सामने अपनी अहमियत साबित करना और राजनीतिक फायदा उठाना है। उनके अनुसार, राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश में गहलोत अक्सर गैर-जिम्मेदाराना बयान देते रहते हैं।
आम जनता पर असर और BJP का दावा
राजस्थान भाजपा अध्यक्ष ने दावा किया कि राज्य की जनता विकास, सुशासन और जवाबदेही पर आधारित राजनीति का समर्थन करती है और कांग्रेस नेताओं की अवसरवादी राजनीति को भली-भांति समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि जनता भविष्य में भी BJP के विकास-उन्मुख शासन मॉडल के साथ खड़ी रहेगी।
क्या होगा आगे
राजस्थान में अगले विधानसभा चुनाव से पहले यह बयानबाजी दोनों दलों के बीच राजनीतिक तापमान बढ़ा रही है। गहलोत की ओर से अभी तक राठौड़ के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद कांग्रेस के भीतर नेतृत्व की खींचतान और BJP की काउंटर-नैरेटिव रणनीति दोनों को एक साथ उजागर करता है।