गहलोत को धैर्यपूर्वक 'संतोष शास्त्र' अपनाने की सलाह: भाजपा अध्यक्ष मदन राठौर
सारांश
Key Takeaways
- गहलोत को संतोष शास्त्र अपनाने की सलाह दी गई है।
- राजनीतिक कार्यकाल समाप्त होने का संकेत।
- महिला सशक्तिकरण पर भाजपा की प्रतिबद्धता।
जयपुर, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की हाल की टिप्पणियों पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदान राठौर ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि गहलोत को अब 'इंतजार शास्त्र' से आगे बढ़कर संतोष शास्त्र का मार्ग अपनाना चाहिए।
राठौर ने स्पष्ट किया कि गहलोत का राजनीतिक कार्यकाल अब समाप्त हो चुका है और नई पीढ़ी के लिए अवसर बनाने का समय है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल आशा पर निर्भर रहना बेकार है, क्योंकि इंतजार करते-करते व्यक्ति मुरझा जाता है।
गहलोत को वानप्रस्थ और संन्यास के पारंपरिक आदर्शों से प्रेरणा लेकर सक्रिय राजनीति से गरिमापूर्ण तरीके से पीछे हटने की सलाह दी गई। राठौर ने गहलोत के नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी को कमजोर करने में लगातार योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि जहां भी गहलोत को जिम्मेदारी सौंपी गई, वहां पार्टी की स्थिति में गिरावट आई है, जो उनके राजनीतिक प्रभाव में गिरावट को दर्शाता है।
दिल्ली की यात्राओं पर बात करते हुए राठौर ने कहा कि यह राज्य स्तरीय निर्णय लेने में स्वायत्तता की कमी को दिखाता है। वंशवादी राजनीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस में नेतृत्व हमेशा एक ही परिवार के हाथों में रहा है।
उन्होंने बताया कि लोकतंत्र में ऐसा पैटर्न उचित नहीं है और योग्यता एवं अनुभव को नेतृत्व के अवसरों का मार्गदर्शन करना चाहिए। पारिवारिक वंश के आधार पर तरक्की करना लोकतांत्रिक सिद्धांतों को कमजोर करता है।
महिला सशक्तिकरण पर राठौर ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और उन्होंने ऐसी प्रशिक्षित और सक्षम महिलाओं की मौजूदगी पर जोर दिया जो जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार हैं।
गोविन्द सिंह डोटासरा पर टिप्पणी करते हुए, राठौर ने आरोप लगाया कि डोटासरा ने पहले ही अपने परिवार के सदस्यों के लिए प्रशासनिक पद सुनिश्चित कर लिए हैं, जिससे व्यापक राजनीतिक भागीदारी के लिए बहुत कम गुंजाइश बची है।