23 जुलाई 2026
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शिवसेना (यूबीटी) के आनंद दुबे ने रेवंत रेड्डी को दी नसीहत — भारत गुलदस्ता है, राज्यों के आधार पर बँटवारा स्वीकार्य नहीं

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शिवसेना (यूबीटी) के आनंद दुबे ने रेवंत रेड्डी को दी नसीहत — भारत गुलदस्ता है, राज्यों के आधार पर बँटवारा स्वीकार्य नहीं

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) के आनंद दुबे ने रेवंत रेड्डी के बयानों पर कहा कि भारत एक गुलदस्ता है — राज्यों के आधार पर बँटवारा स्वीकार्य नहीं। परिसीमन पर पारदर्शिता की माँग करते हुए उन्होंने कांग्रेस से इंडिया अलाइंस में बिखराव रोकने की अपील की।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने 7 जून 2026 को रेवंत रेड्डी के बयानों पर कहा कि भारत को राज्यों के आधार पर बाँटना उचित नहीं।
दुबे ने भारत को 'खूबसूरत गुलदस्ता' बताया — विविधता में एकता का प्रतीक।
परिसीमन पर माँग: सरकार पूरा मसौदा सार्वजनिक करे; विपक्ष चुप नहीं रहेगा।
कांग्रेस से आग्रह — TMC , AAP , CPI(M) की नाराज़गी दूर कर इंडिया अलाइंस में समन्वय बढ़ाए।
DMK की दूरी और JMM की भागीदारी पर बोले — गठबंधन में मतभेद स्वाभाविक, लोकतंत्र में असहमति की जगह होनी चाहिए।

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 7 जून 2026 को नई दिल्ली में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत को राज्यों या क्षेत्रों के आधार पर विभाजित करने की कोई भी कोशिश अस्वीकार्य है। साथ ही उन्होंने इंडिया अलाइंस में बढ़ती दरारों को पाटने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) से पहल करने का आग्रह किया।

भारत की एकता पर दुबे का संदेश

दुबे ने कहा कि भारत विविधताओं से भरा एक मज़बूत और सुंदर देश है — ठीक उस गुलदस्ते की तरह जिसमें अलग-अलग रंगों और खुशबुओं वाले फूल मिलकर एक समग्र सौंदर्य बनाते हैं। उन्होंने कहा, 'सभी राज्यों की अपनी पहचान है, लेकिन वे मिलकर एकता और अखंडता का प्रतीक बनते हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब परिसीमन के मुद्दे पर उत्तर-दक्षिण राज्यों के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है।

परिसीमन पर विपक्ष की स्थिति

परिसीमन विधेयक के संदर्भ में दुबे ने स्वीकार किया कि केंद्र सरकार के पास लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में पर्याप्त संख्या बल है और वह किसी भी विधेयक को पारित कराने में सक्षम है। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष इस मुद्दे पर मौन नहीं रहेगा। दुबे के अनुसार, सरकार को परिसीमन का पूरा मसौदा सार्वजनिक करना चाहिए ताकि सभी राजनीतिक दल उसकी स्वतंत्र समीक्षा कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रस्ताव देशहित में और सकारात्मक होगा, तो विपक्ष उसके समर्थन पर विचार कर सकता है।

इंडिया अलाइंस में समन्वय की ज़रूरत

इंडिया अलाइंस की आंतरिक स्थिति पर दुबे ने कहा कि गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते कांग्रेस की ज़िम्मेदारी है कि वह सभी सहयोगी दलों को साथ लेकर चले। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), आम आदमी पार्टी (AAP) और अन्य दलों की नाराज़गी का उल्लेख करते हुए कांग्रेस से संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की। गौरतलब है कि इंडिया अलाइंस में हाल के महीनों में समन्वय को लेकर कई बार असहमति सामने आई है।

DMK और JMM की दूरी पर प्रतिक्रिया

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) द्वारा गठबंधन की बैठकों से दूरी बनाए रखने और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की भागीदारी को लेकर उठ रहे सवालों पर दुबे ने कहा कि किसी भी परिवार में मतभेद होना स्वाभाविक है। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में विभिन्न विचारों और असहमतियों के लिए स्थान होने की बात दोहराई। आलोचकों का कहना है कि गठबंधन के भीतर इस तरह की दरारें 2029 के आम चुनावों से पहले विपक्षी एकजुटता के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।

आगे क्या

परिसीमन पर केंद्र सरकार की अगली औपचारिक घोषणा और इंडिया अलाइंस की अगली बैठक की तारीख़ अभी तय नहीं हुई है। दुबे के बयान से स्पष्ट है कि शिवसेना (यूबीटी) गठबंधन के भीतर और बाहर दोनों मोर्चों पर अपनी भूमिका सक्रिय रखना चाहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इंडिया अलाइंस के भीतर DMK, TMC और AAP की नाराज़गी केवल संवाद की कमी से है या संरचनात्मक असहमति से — और इस पर दुबे का जवाब अस्पष्ट रहा। परिसीमन पर विपक्ष की 'पारदर्शिता की माँग' तब तक रणनीतिक रूप से कमज़ोर रहेगी जब तक गठबंधन के दल एक साझा स्थिति पर सहमत नहीं होते। कांग्रेस को 'पहल करने की सलाह' देना शिवसेना (यूबीटी) की अपनी सीमित संसदीय ताकत को भी उजागर करता है — वह दबाव नहीं बना सकती, केवल अपील कर सकती है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आनंद दुबे ने रेवंत रेड्डी को क्या नसीहत दी?
दुबे ने कहा कि भारत को राज्यों या क्षेत्रों के आधार पर विभाजित करने की सोच उचित नहीं है। उन्होंने भारत को एक खूबसूरत गुलदस्ते की उपमा दी जिसमें सभी राज्य अपनी पहचान बनाए रखते हुए एकता का प्रतीक बनते हैं।
परिसीमन विधेयक पर शिवसेना (यूबीटी) का क्या रुख है?
शिवसेना (यूबीटी) ने माँग की है कि सरकार परिसीमन का पूरा मसौदा सार्वजनिक करे ताकि सभी दल उसकी समीक्षा कर सकें। दुबे ने कहा कि यदि प्रस्ताव देशहित में होगा तो विपक्ष समर्थन पर विचार कर सकता है, लेकिन बिना पारदर्शिता के विपक्ष चुप नहीं रहेगा।
इंडिया अलाइंस में एकता की समस्या क्यों है?
TMC, CPI(M), AAP और DMK जैसे दलों की नाराज़गी और बैठकों से दूरी गठबंधन के भीतर समन्वय की कमी को दर्शाती है। दुबे ने कांग्रेस से इन दलों से संवाद बढ़ाने और पहल करने की अपील की है।
DMK और JMM की इंडिया अलाइंस से दूरी पर दुबे ने क्या कहा?
दुबे ने कहा कि किसी भी परिवार में मतभेद होना स्वाभाविक है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमतियों के लिए स्थान होना चाहिए। उन्होंने गठबंधन को एक परिवार बताते हुए इसे सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा कहा।
क्या इंडिया अलाइंस 2029 के चुनावों से पहले एकजुट हो पाएगा?
यह अभी अनिश्चित है। आलोचकों का कहना है कि DMK की दूरी और कई दलों की नाराज़गी गठबंधन की चुनावी एकजुटता के लिए चुनौती है। दुबे ने कांग्रेस से सक्रिय पहल की अपील की है, लेकिन ठोस रोडमैप का अभाव बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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