शिवसेना (यूबीटी) के आनंद दुबे ने रेवंत रेड्डी को दी नसीहत — भारत गुलदस्ता है, राज्यों के आधार पर बँटवारा स्वीकार्य नहीं
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 7 जून 2026 को नई दिल्ली में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत को राज्यों या क्षेत्रों के आधार पर विभाजित करने की कोई भी कोशिश अस्वीकार्य है। साथ ही उन्होंने इंडिया अलाइंस में बढ़ती दरारों को पाटने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) से पहल करने का आग्रह किया।
भारत की एकता पर दुबे का संदेश
दुबे ने कहा कि भारत विविधताओं से भरा एक मज़बूत और सुंदर देश है — ठीक उस गुलदस्ते की तरह जिसमें अलग-अलग रंगों और खुशबुओं वाले फूल मिलकर एक समग्र सौंदर्य बनाते हैं। उन्होंने कहा, 'सभी राज्यों की अपनी पहचान है, लेकिन वे मिलकर एकता और अखंडता का प्रतीक बनते हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब परिसीमन के मुद्दे पर उत्तर-दक्षिण राज्यों के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है।
परिसीमन पर विपक्ष की स्थिति
परिसीमन विधेयक के संदर्भ में दुबे ने स्वीकार किया कि केंद्र सरकार के पास लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में पर्याप्त संख्या बल है और वह किसी भी विधेयक को पारित कराने में सक्षम है। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष इस मुद्दे पर मौन नहीं रहेगा। दुबे के अनुसार, सरकार को परिसीमन का पूरा मसौदा सार्वजनिक करना चाहिए ताकि सभी राजनीतिक दल उसकी स्वतंत्र समीक्षा कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रस्ताव देशहित में और सकारात्मक होगा, तो विपक्ष उसके समर्थन पर विचार कर सकता है।
इंडिया अलाइंस में समन्वय की ज़रूरत
इंडिया अलाइंस की आंतरिक स्थिति पर दुबे ने कहा कि गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते कांग्रेस की ज़िम्मेदारी है कि वह सभी सहयोगी दलों को साथ लेकर चले। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), आम आदमी पार्टी (AAP) और अन्य दलों की नाराज़गी का उल्लेख करते हुए कांग्रेस से संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की। गौरतलब है कि इंडिया अलाइंस में हाल के महीनों में समन्वय को लेकर कई बार असहमति सामने आई है।
DMK और JMM की दूरी पर प्रतिक्रिया
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) द्वारा गठबंधन की बैठकों से दूरी बनाए रखने और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की भागीदारी को लेकर उठ रहे सवालों पर दुबे ने कहा कि किसी भी परिवार में मतभेद होना स्वाभाविक है। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में विभिन्न विचारों और असहमतियों के लिए स्थान होने की बात दोहराई। आलोचकों का कहना है कि गठबंधन के भीतर इस तरह की दरारें 2029 के आम चुनावों से पहले विपक्षी एकजुटता के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
आगे क्या
परिसीमन पर केंद्र सरकार की अगली औपचारिक घोषणा और इंडिया अलाइंस की अगली बैठक की तारीख़ अभी तय नहीं हुई है। दुबे के बयान से स्पष्ट है कि शिवसेना (यूबीटी) गठबंधन के भीतर और बाहर दोनों मोर्चों पर अपनी भूमिका सक्रिय रखना चाहती है।