किरेन रिजिजू की विपक्ष से अपील: महिला आरक्षण बिल पर राष्ट्रीय हित में सहयोग दें
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 18 जून 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में विपक्षी दलों से संसद में पेश होने वाले बिलों — विशेषकर महिला आरक्षण बिल — का समर्थन करने की अपील की। यह बयान शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत द्वारा भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर 'गंदी राजनीति' के लगाए गए आरोपों के जवाब में आया।
संजय राउत के आरोपों पर रिजिजू की प्रतिक्रिया
रिजिजू ने राउत के आरोपों पर सीधी प्रतिक्रिया देने से परहेज़ किया। उन्होंने कहा, 'संजय राउत किसे गाली दे रहे हैं और किसे नहीं, इस पर अगर रिएक्ट किया जाए तो मुझे लगता है कि यह ठीक नहीं रहेगा।' शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के भविष्य और राजनीतिक निर्णयों पर उन्होंने कहा कि हर सांसद अपने क्षेत्र और व्यक्तिगत विकास के बारे में सोचता है, और इस विषय पर वे कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
महिला आरक्षण बिल और दो-तिहाई बहुमत की बाधा
रिजिजू ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण बिल को पारित करने के लिए संसद के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता है, जो संवैधानिक प्रावधानों के तहत अनिवार्य है। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व में यह बिल इसी कारण पारित नहीं हो सका था। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि देश की महिलाओं को न्याय मिलना चाहिए।
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना
रिजिजू ने कहा कि सरकार ने विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ बैठकें की थीं, जिनमें समाजवादी पार्टी भी शामिल थी। उनके अनुसार, 'शायद समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के दबाव में आकर बिल का समर्थन नहीं करने का फैसला किया।' यह बयान विपक्षी एकजुटता में दरार की ओर इशारा करता है। गौरतलब है कि महिला आरक्षण का मुद्दा दशकों से भारतीय संसद में अटका हुआ है।
राष्ट्रीय हित में सहयोग की अपील
मंत्री ने कहा कि संसद में सभी दलों के सांसद एकत्रित होकर देश के विकास और हितों के लिए फैसले लेते हैं। उन्होंने जोड़ा, 'मैं हमेशा से ही विपक्षी दलों से यह अपील करते हुए आया हूं कि वो संसद में पेश होने वाले बिलों का समर्थन करें।' रिजिजू ने विश्वास जताया कि आने वाले दिनों में सभी राजनीतिक दल इस बिल के पक्ष में खड़े होंगे।
परिसीमन बिल पर भी दिया जवाब
रिजिजू ने परिसीमन बिल पर भी संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी और महिला आरक्षण के संदर्भ में इसे जोड़ते हुए संवैधानिक प्रक्रियाओं का हवाला दिया। आगामी संसदीय सत्र में इन विधेयकों पर सरकार की रणनीति स्पष्ट होने की उम्मीद है।