महिला आरक्षण बिल: राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन की जरूरत, किरन रिजिजू
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नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने महिला आरक्षण बिल को लेकर स्पष्ट कहा कि यह मुद्दा राजनीति के दायरे में नहीं आना चाहिए, बल्कि इसे महिलाओं के सशक्तीकरण के एक ऐतिहासिक कदम के रूप में देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि अगर इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा गया, तो यह महिलाओं के प्रति अन्याय होगा।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे पार्टी राजनीति से ऊपर उठकर इस बिल का समर्थन करें। यह बिल नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से जाना जाता है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में अधिक प्रतिनिधित्व देना है। रिजिजू ने कहा कि यह ऐसा मुद्दा है जिस पर सभी पार्टियों ने पहले भी समर्थन किया है और अब इसके कार्यान्वयन की दिशा में आगे बढ़ा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस पर संसद में चर्चा होने वाली है और उन्होंने सभी दलों से अपील की है कि वे एकजुट होकर इसमें भाग लें। उनके अनुसार, यदि सभी सांसद मिलकर इस बिल को पारित करते हैं, तो यह न केवल भारत के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश होगा कि भारत महिलाओं के सशक्तीकरण को लेकर कितना गंभीर है।
किरन रिजिजू ने आगे बताया कि इस बिल में ऐसा कुछ भी नहीं है जिस पर विवाद किया जा सके। चाहे वह सीटों का आरक्षण हो, परिसीमन से संबंधित मुद्दा हो या अन्य प्रावधान, हर पहलू को स्पष्ट और सरल तरीके से तैयार किया गया है। उन्होंने दावा किया कि इसमें कोई ऐसा बिंदु नहीं है जिस पर गंभीर आपत्ति उठाई जा सके। यदि कोई आपत्ति उठाता है, तो वह केवल राजनीति से प्रेरित होगी।
उन्होंने सभी दलों से यह भी कहा कि इसे किसी एक पार्टी की जीत या हार के रूप में नहीं देखना चाहिए। यह पूरे देश का निर्णय होना चाहिए। उनका कहना है कि इस कानून का श्रेय किसी एक व्यक्ति या पार्टी को नहीं, बल्कि यह पूरी संसद और सभी सांसदों की सामूहिक उपलब्धि होगी।
इस बीच, डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर उन्होंने उन्हें श्रदांजलि अर्पित की। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति के साथ मिलकर उन्होंने बाबा साहेब के स्मारक पर जाकर पुष्पांजलि अर्पित की। रिजिजू ने कहा कि बाबा साहेब के विचार आज भी देश को दिशा देने में सहायक हैं।
उन्होंने कहा कि जब भी उन्हें किसी तरह की उलझन या असमंजस महसूस होता है, तो वे डॉ. अंबेडकर के भाषण सुनते हैं और उनके विचारों को पढ़ते हैं। इससे उन्हें नई ऊर्जा, प्रेरणा और सही दिशा मिलती है। उनके मुताबिक, अंबेडकर के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पहले थे और वे देश के हर नागरिक के लिए मार्गदर्शक हैं।