महिला आरक्षण विधेयक: आबादी पर आधारित होगा इसका कार्यान्वयन - निशिकांत दुबे

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महिला आरक्षण विधेयक: आबादी पर आधारित होगा इसका कार्यान्वयन - निशिकांत दुबे

सारांश

महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सत्ताधारी सांसदों ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को उठाया। जानिए इस विधेयक के संभावित प्रभावों के बारे में।

Key Takeaways

  • महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना है।
  • यह विधेयक आबादी के आधार पर लागू होगा।
  • सत्ताधारी सांसदों ने विपक्ष पर निशाना साधा।
  • कई सांसदों ने विधेयक के समर्थन की बात की।
  • महिला आरक्षण का महत्व महिलाओं के अधिकारों को सशक्त बनाना है।

नई दिल्ली, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा करने के लिए आयोजित विशेष सत्र और जारी नोटिफिकेशन पर सत्ताधारी पार्टी के सांसदों और मंत्रियों ने अपने विचार व्यक्त किए। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष पर भी तीखा प्रहार किया।

महिला आरक्षण विधेयक के संबंध में जारी नोटिफिकेशन पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा, "यह एक प्रक्रिया है। हम वर्तमान में कानून में एक संशोधन लाने की तैयारी कर रहे हैं। चूंकि पिछला कानून अब तक प्रभावी नहीं हुआ है, इसलिए इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए अधिसूचना जारी की गई है।"

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, "2023 में जो विधेयक पारित हुआ था, उसे कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त था। उस समय यह विधेयक सर्वसम्मति से पारित हुआ था। यह पहले से ही पारित विधेयक है। प्रियंका गांधी ने सुझाव दिया था कि इसे मौजूदा सीटों पर लागू किया जाना चाहिए। हालांकि, कानून में यह स्पष्ट है कि यह आबादी के आधार पर होगा। वर्तमान विधेयक में यह प्रावधान है कि प्रतिनिधित्व आनुपातिक रूप से निर्धारित किया जाएगा। जैसा कि गृह मंत्री ने कल बताया था, दक्षिण भारत में कुछ सीटें बढ़ सकती हैं।"

भाजपा सांसद कविता पाटीदार ने कहा, "महिला आरक्षण विधेयक में जो संशोधन लाया जा रहा है और परिसीमन की प्रक्रिया शुरू की गई है, जब इस पर चर्चा होगी तो सभी बातें स्पष्ट हो जाएंगी। कल प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने सब कुछ स्पष्ट कर दिया था। मुझे नहीं लगता कि अब जनता के मन में कोई भ्रम बचा है।"

राज्यसभा सांसद उज्ज्वल निकम ने कहा, "मैं इस अधिनियम के लिए सरकार का दिल से स्वागत करता हूँ, क्योंकि उसने यह पक्का निर्णय लिया है कि हर हाल में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। इसलिए, प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद महिला आरक्षण विधेयक लागू किया गया है। यह एक सकारात्मक और सराहनीय कदम है।"

भाजपा सांसद रेखा शर्मा ने कहा, "विधेयक पर बहस चल रही है और वोटिंग होगी। लेकिन यदि इसे लागू नहीं किया जाता, तो वोटिंग किस आधार पर होगी और हम इसे 2029 में आगे कैसे बढ़ाएंगे? हमें विश्वास है कि विपक्ष इसका समर्थन करेगा और हमें पूरा यकीन है कि यह विधेयक पारित हो जाएगा। इसमें सरकार की ओर से कोई नकारात्मकता नहीं है। उनके मन में कोई गलत इरादा नहीं है।"

Point of View

जो महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है। हालाँकि, इसे लागू करने की प्रक्रिया में कई चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं।
NationPress
17/04/2026

Frequently Asked Questions

महिला आरक्षण विधेयक क्या है?
महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना है।
यह विधेयक कब पारित हुआ था?
यह विधेयक 2023 में पारित हुआ था।
क्या यह विधेयक आबादी के आधार पर लागू होगा?
हाँ, इस विधेयक के अनुसार, इसका कार्यान्वयन आबादी के आधार पर होगा।
इस विधेयक का समर्थन किसने किया है?
इस विधेयक का समर्थन कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों ने किया है।
महिला आरक्षण का क्या महत्व है?
महिला आरक्षण का उद्देश्य महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों को सशक्त बनाना और उनके प्रतिनिधित्व को बढ़ाना है।
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