भारत ने इजरायल-लेबनान युद्धविराम का स्वागत किया, शांति की दिशा में हर प्रयास का समर्थन
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नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने शुक्रवार को इजरायल और लेबनान के बीच स्थापित युद्धविराम की सराहना की और कहा कि वह शांति की दिशा में उठाए गए हर प्रयास का समर्थन करता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “हम इस युद्धविराम का स्वागत करते हैं। हम हर उस कदम का समर्थन करते हैं जो शांति की ओर बढ़ता है।”
विदेश मंत्रालय का यह बयान उस समय आया जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य ईरान से जुड़े एक मोर्चे पर अस्थायी रूप से तनाव को कम करना है।
हालांकि लेबनान औपचारिक रूप से इजरायल के साथ युद्ध में नहीं है, लेकिन दक्षिणी लेबनान के अधिकतर क्षेत्रों पर हिजबुल्ला का नियंत्रण है। इस संगठन ने इजरायल पर कई हमले किए हैं, जिसके जवाब में इजरायल ने भी कार्रवाई की है। लेबनान को इजरायली जवाबी हमलों का शिकार होना पड़ा है, क्योंकि वह हिजबुल्ला पर नियंत्रण स्थापित करने में असमर्थ रहा है।
जब भारत से हमास को आतंकवादी संगठन घोषित करने के इजरायल के अनुरोध के बारे में पूछा गया, तो जायसवाल ने कहा, “हमारे पास एक प्रक्रिया है और ऐसे मामलों को उसी प्रक्रिया के तहत सुलझाया जाता है।”
गुरुवार को इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने विश्वभर के प्रमुख हिंदू नेताओं के एक समूह के साथ बातचीत के दौरान भारत से हमास को आतंकवादी संगठन घोषित करने का आग्रह किया।
गिदोन सार ने कहा, “मैंने भारत से अनुरोध किया है कि वह हमास को आतंकवादी संगठन मान्यता दे। हमास अन्य कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवादी संगठनों, जैसे कि लश्कर-ए-तैयबा, से भी संबंध रखता है।”
इजरायली विदेश मंत्री ने कहा कि वह इस विशेष समूह को जानकारी देकर गर्व महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैंने भारत के साथ इजरायल के संबंधों के सकारात्मक रुझानों और इस रिश्ते के महत्व पर चर्चा की। साथ ही, मैंने उस ऐतिहासिक अभियान का भी उल्लेख किया, जो इजरायल पिछले ढाई वर्षों से कट्टरपंथी इस्लाम के खिलाफ लड़ने के लिए कर रहा है।”
उन्होंने आगे कहा, “इन संगठनों का घोषित उद्देश्य इजरायल का अस्तित्व समाप्त करना है, और वे इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। इजरायल ने सभी मोर्चों पर यह सिद्ध किया है कि वह आगे है। उसने ईरान के नेतृत्व वाले कट्टरपंथी इस्लाम के 'आतंकी ऑक्टोपस' को काफी कमजोर कर दिया है। इस संघर्ष का प्रभाव मध्य पूर्व से बाहर भी महसूस किया जाएगा।