योगी सरकार का बालवाटिका: सक्षम, संवेदनशील और सृजनशील नागरिकों का निर्माण

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योगी सरकार का बालवाटिका: सक्षम, संवेदनशील और सृजनशील नागरिकों का निर्माण

सारांश

योगी सरकार ने बालवाटिका को एक महत्वपूर्ण प्रयोगशाला में बदलने के लिए कदम उठाए हैं, जो 3 से 6 वर्ष के बच्चों के समग्र विकास के लिए एक नया पाठ्यक्रम तैयार कर रही है। यह पहल बच्चों को उनके भविष्य के लिए तैयार कर रही है।

Key Takeaways

  • योगी सरकार का बालवाटिका में समग्र विकास का पाठ्यक्रम
  • बच्चों के लिए सृजनशीलता और संवेदनशीलता को बढ़ावा
  • आवश्यक शारीरिक, सामाजिक और संज्ञानात्मक विकास
  • खेल और गतिविधियों के माध्यम से शिक्षण
  • 85%25 क्षमताओं का विकास इस आयु में होता है

लखनऊ, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। योगी सरकार ने बालवाटिका को एक प्रारंभिक शिक्षा के केंद्र के साथ-साथ भविष्य के सक्षम, संवेदनशील और सृजनशील नागरिकों के निर्माण की पहली प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। बाल्यावस्था शिक्षा को नई दिशा देते हुए, बालवाटिका (3 से 6 वर्ष आयु वर्ग) को समग्र विकास का केंद्र बनाने की योजना बनाई जा रही है।

बालवाटिका के नए पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा के ‘पंचकोश’ सिद्धांत को बाल विकास के पांच महत्वपूर्ण आयामों से वैज्ञानिक रूप से जोड़ा गया है। अन्नमय कोष को शारीरिक विकास, प्राणमय कोष को सामाजिक-भावनात्मक और नैतिक विकास, मनोमय कोष को भाषा और साक्षरता, विज्ञानमय कोष को संज्ञानात्मक विकास, और आनंदमय कोष को सौंदर्यबोध विकास से जोड़ा गया है।

इसी संदर्भ में एससीईआरटी द्वारा चहक, कदम और कलांकुर जैसी वर्कबुक, गतिविधि पुस्तिकाएं, चित्र कथा, संख्या ज्ञान, कला और संगीत आधारित सामग्री तैयार की गई है। ये खेल, कहानी और गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति के माध्यम से बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करती हैं।

योगी सरकार की इस पहल से बच्चों का विकास शैक्षणिक स्तर के साथ-साथ उनके शरीर, मन, बुद्धि और भावनाओं के संतुलित और समग्र विकास के रूप में होगा। वे प्रारंभिक अवस्था से ही सृजनशील, संवेदनशील और सक्षम नागरिक के रूप में विकसित होंगे। इस पाठ्यक्रम का लक्ष्य बच्चों के व्यक्तित्व के प्रत्येक पहलू को संतुलित रूप से विकसित करना है, ताकि प्रारंभिक अवस्था से ही उनकी सीखने की नींव मजबूत हो सके। बालवाटिका के लिए तैयार यह पाठ्यक्रम खेल, गतिविधि और अनुभव आधारित शिक्षण पर आधारित है।

बच्चों को कहानी, संवाद, चित्रकला और समूह गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर दिया जा रहा है, जिससे वे बिना किसी दबाव के भाषा और संख्यात्मक दक्षताओं के साथ-साथ सामाजिक व्यवहार भी विकसित कर सकें।

पाठ्यक्रम में शारीरिक विकास के लिए खेलकूद, भाषा विकास के लिए संवाद आधारित गतिविधियां, संज्ञानात्मक विकास के लिए जिज्ञासा आधारित सीखने की प्रक्रिया, सामाजिक एवं नैतिक विकास के लिए समूह सहभागिता और सौंदर्यबोध के लिए रचनात्मक गतिविधियों को शामिल किया गया है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और सृजनात्मक सोच का विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा।

एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान का कहना है कि 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है, जिसमें विकसित होने वाली लगभग 85 फीसदी क्षमताएं बच्चे के भविष्य की दिशा तय करती हैं। ऐसे में इस आयु वर्ग के लिए समग्र और गुणवत्तापूर्ण बाल केंद्रित पाठ्यक्रम विकसित किया गया है।

Point of View

NationPress
17/04/2026

Frequently Asked Questions

बालवाटिका का मुख्य उद्देश्य क्या है?
बालवाटिका का मुख्य उद्देश्य 3 से 6 वर्ष के बच्चों को सक्षम, संवेदनशील और सृजनशील नागरिक बनाने के लिए समग्र विकास प्रदान करना है।
इस पाठ्यक्रम में कौन-कौन से आयाम शामिल हैं?
इस पाठ्यक्रम में शारीरिक, सामाजिक, नैतिक, संज्ञानात्मक और सौंदर्यबोध विकास के विभिन्न आयाम शामिल हैं।
बालवाटिका में बच्चों के लिए कौन-कौन सी गतिविधियाँ हैं?
बालवाटिका में कहानी, चित्रकला, संवाद और समूह गतिविधियाँ जैसे खेलों का आयोजन किया जाता है।
यह पाठ्यक्रम किसके द्वारा विकसित किया गया है?
यह पाठ्यक्रम एससीईआरटी द्वारा विकसित किया गया है।
बच्चों का विकास किस आयु में सबसे महत्वपूर्ण होता है?
3 से 6 वर्ष की आयु में बच्चों का विकास सबसे महत्वपूर्ण होता है।
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