नोएडा में श्रम विभाग ने 203 संविदाकारों पर कड़ी कार्रवाई की

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नोएडा में श्रम विभाग ने 203 संविदाकारों पर कड़ी कार्रवाई की

सारांश

गौतमबुद्धनगर के श्रम विभाग ने 203 संविदाकारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है, जिसमें लाइसेंस निरस्तीकरण और ब्लैकलिस्टिंग शामिल है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और श्रमिकों के अधिकारों के लिए उठाए गए कदम।

Key Takeaways

  • 203 संविदाकारों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।
  • श्रम कानूनों के उल्लंघन का मामला सामने आया है।
  • श्रमिकों के लिए 1 करोड़ 16 लाख 5 हजार रुपए का भुगतान आदेशित किया गया है।
  • गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में 21 प्रतिशत वेतन वृद्धि की गई है।
  • लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई हो रही है।

गौतमबुद्धनगर, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नोएडा एवं आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रम कानूनों के उल्लंघन के संबंध में श्रम विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। विभाग ने 24 कारखानों से जुड़े कुल 203 संविदाकारों के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है और साथ ही संबंधित एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी की जा रही है।

अपर श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी का कहना है कि हाल ही में श्रमिकों के आंदोलन के दौरान हुई तोड़फोड़ की घटनाओं में कुछ संविदाकारों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जांच में यह भी पता चला है कि कई संविदाकार श्रम कानूनों का पालन नहीं कर रहे थे और श्रमिकों को उनके वैधानिक अधिकारों एवं लाभों से वंचित रखा जा रहा था। इसी आधार पर विभाग ने इन संविदाकारों को नोटिस जारी करते हुए लगभग 1 करोड़ 16 लाख 5 हजार रुपए की राशि श्रमिकों को भुगतान करने का आदेश दिया है।

श्रम विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि यह राशि श्रमिकों के बकाया वेतन और अन्य लाभों के रूप में उन्हें दी जानी है। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया जाता है, तो संबंधित संविदाकारों के खिलाफ वसूली की कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। इसके अतिरिक्त, अन्य संदिग्ध संविदाकारों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कठोर कदम उठाने की तैयारी चल रही है।

इसी के साथ, श्रमिकों की लंबे समय से चल रही वेतन वृद्धि की मांग को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। शासन स्तर पर गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिश के बाद गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में 74 अनुसूचित नियोजनों में कार्यरत श्रमिकों के वेतन में 21 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी, और इसका भुगतान 7 से 10 मई 2026 के बीच किया जाएगा।

श्रम विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि बढ़ी हुई वेतन दरें संविदा और स्थायी दोनों प्रकार के श्रमिकों पर समान रूप से लागू होंगी। कर्मचारियों के वेतन से केवल ईपीएफ और ईएसआई की ही कटौती मान्य होगी, इसके अलावा किसी भी प्रकार की कटौती गैरकानूनी मानी जाएगी। इसके अतिरिक्त, श्रमिकों को ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से, साथ ही बोनस और ग्रेच्युटी जैसे लाभ भी दिए जाएंगे।

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि कोई संविदाकार समय पर वेतन भुगतान नहीं करता या कम भुगतान करता है, तो उसके खिलाफ न केवल लाइसेंस रद्द किया जाएगा बल्कि उसे ब्लैकलिस्ट कर न्यायालय में अभियोजन भी चलाया जाएगा।

Point of View

जो कि देश के श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्रम विभाग की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
NationPress
18/04/2026

Frequently Asked Questions

श्रम विभाग ने कितने संविदाकारों के खिलाफ कार्रवाई की?
श्रम विभाग ने 203 संविदाकारों के खिलाफ कार्रवाई की है।
क्या कारण हैं जिनकी वजह से यह कार्रवाई हुई?
यह कार्रवाई श्रम कानूनों के उल्लंघन और श्रमिकों के अधिकारों के हनन के कारण हुई है।
वेतन वृद्धि कब से लागू होगी?
वेतन वृद्धि 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी।
अगर संविदाकार वेतन भुगतान नहीं करते, तो क्या होगा?
अगर संविदाकार समय पर वेतन भुगतान नहीं करते, तो उनके खिलाफ लाइसेंस रद्द करने और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बढ़ी हुई वेतन दरें किस पर लागू होंगी?
बढ़ी हुई वेतन दरें संविदा और स्थायी दोनों प्रकार के श्रमिकों पर लागू होंगी।
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