रेवंत रेड्डी के 'राम-शिव' बयान पर NDA भड़का, सपा ने भी दी भगवान पर न बोलने की नसीहत
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के एक विवादास्पद बयान ने 29 सितंबर 2026 को देशभर में सियासी तूफान खड़ा कर दिया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि BJP नेता 'जय श्री राम' का नारा तो बार-बार लगाते हैं, लेकिन 'हर हर महादेव' क्यों नहीं — और इसी क्रम में उन्होंने भगवान शिव को गरीबों का देवता और भगवान राम को अमीरों का देवता बताया। इस बयान के बाद NDA घटकों के साथ-साथ विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी रेड्डी की तीखी आलोचना की।
NDA नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने इस बयान को देश को बाँटने की कोशिश करार दिया। उन्होंने पटना में कहा, 'भगवान एक ही हैं। रेवंत रेड्डी आप बंटवारा क्यों कर रहे हैं? बंटवारा करके आप राज्य को बर्बाद कर रहे हैं। अब आग में घी मत डालिए। भगवान एक ही हैं, चाहे वह शंकर, राम या कृष्ण के रूप में हों। हमारे यहां करोड़ों देवी-देवता हैं जिनकी हम सब पूजा करते हैं, चाहे वह दुर्गा, सरस्वती या लक्ष्मी के रूप में हों।'
जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने भी रेड्डी के बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, 'कुछ लोग जाति और धर्म के आधार पर भगवान को भी बाँटने की कोशिश कर रहे हैं। बाबासाहेब आंबेडकर ने इसी बात का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि हमें जाति के बारे में नहीं, बल्कि समाज के बारे में बात करनी चाहिए। बौद्ध धर्म और बुद्ध की शिक्षाओं में कोई जाति, धर्म, वर्ग या वर्ण नहीं है।'
सपा की नसीहत — संतों पर छोड़ें भगवान के मामले
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने लखनऊ में कहा, 'मुझे लगता है कि आप एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं। आपको भगवान से जुड़े मामलों में नहीं पड़ना चाहिए। संविधान से मिली शक्तियों का इस्तेमाल गरीबों, पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों और शोषित लोगों के लिए काम करने में कीजिए। भगवान से जुड़े मामले और कौन सा भगवान बड़ा या छोटा है, यह संतों, ऋषियों और आध्यात्मिक गुरुओं पर छोड़ देना चाहिए।'
यह उल्लेखनीय है कि सपा ने BJP की आलोचना करने के बजाय रेड्डी को ही आड़े हाथों लिया — जो इस विवाद के राजनीतिक आयाम की जटिलता को रेखांकित करता है।
कांग्रेस का रुख — BJP पर पलटवार
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने इस मामले पर अलग कोण से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है। यह धर्म और आध्यात्मिकता का मामला है। यह समाज का भी मामला है, जिसे BJP के वे लोग नहीं समझ पाएंगे जो वोट चोरी करते हैं और धर्म के नाम पर वोट मांगते हैं।'
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में कांग्रेस सरकार को विपक्षी BJP से लगातार चुनौतियाँ मिल रही हैं और आगामी स्थानीय चुनावों की पृष्ठभूमि में धार्मिक विमर्श एक संवेदनशील विषय बना हुआ है।
विवाद का व्यापक संदर्भ
रेवंत रेड्डी का यह बयान देश की उस परंपरागत राजनीतिक रेखा को छूता है, जहाँ धार्मिक प्रतीकों के इर्द-गिर्द वोट-बैंक की राजनीति होती रही है। आलोचकों का कहना है कि किसी भी सत्तारूढ़ मुख्यमंत्री का इस प्रकार की धार्मिक तुलना में उतरना न केवल संवैधानिक मर्यादाओं पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि सामाजिक सद्भाव के लिए भी जोखिम पैदा करता है। यह पहली बार नहीं है कि किसी वरिष्ठ नेता के ऐसे बयान पर सर्वदलीय आपत्ति दर्ज की गई हो।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या रेवंत रेड्डी अपने बयान पर स्पष्टीकरण देते हैं या इसे अपनी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बनाए रखते हैं।