क्या जगद्गुरु रामभद्राचार्य प्रेमानंद महाराज को बेटे की तरह मानते हैं?
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मुंबई, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने संतों के बीच आपसी मतभेदों को सनातन धर्म के लिए हानिकारक बताया। भिवंडी के बागेश्वर सनातन मठ में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर संतों के बीच विवाद उत्पन्न कर रहे हैं, जिससे सनातन धर्म की छवि को नुकसान पहुँच रहा है।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य और बाबा प्रेमानंद महाराज पर चर्चा करते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, "सोशल मीडिया पर प्रेमानंद महाराज और जगद्गुरु रामभद्राचार्य को लेकर एक मुद्दा तेजी से फैल रहा है। मैं इस पर यही कहना चाहूंगा कि एक महान आत्मा (प्रेमानंद महाराज) ने भागती, दौड़ती पीढ़ी को भजन के माध्यम से जोड़ा है, जबकि जगद्गुरु रामभद्राचार्य गुरुदेव ने सुप्रीम कोर्ट में खड़े होकर रामलला के पक्ष में बयान देकर राम मंदिर निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।"
धीरेंद्र शास्त्री ने गुरु रामभद्राचार्य का समर्थन करते हुए कहा, "हमारे गुरुदेव कुछ छिपाते नहीं हैं, वे जो सोचते हैं, वही कहते हैं। उनके मन में कोई बुरी भावना नहीं है।"
उन्होंने यह भी कहा कि संतों के बीच मतभेदों को सार्वजनिक करना सनातन धर्म को कमजोर करता है।
शास्त्री ने कहा, "हमें संतों की बातों को सोशल मीडिया या मीडिया का विषय नहीं बनाना चाहिए। यह एक आदर का विषय है। संतों की लड़ाई को दिखाने से केवल सनातन धर्म को ही हानि होगी।"
उन्होंने बताया कि रामभद्राचार्य ने स्वयं कहा है कि वे प्रेमानंद महाराज को अपने बेटे की तरह मानते हैं और उनके प्रति कोई ईर्ष्या नहीं रखते। प्रेमानंद महाराज ने भी रामभद्राचार्य की बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन कुछ लोग जानबूझकर संतों के बीच विवाद पैदा कर रहे हैं, जिससे सनातन धर्म की छवि को ठेस पहुँच रही है।
जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने संत प्रेमानंद महाराज पर टिप्पणी की थी, जिससे संत समाज में नाराजगी उत्पन्न हुई थी।
हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद स्वामी रामभद्राचार्य ने सफाई दी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी का गलत अर्थ निकाला गया और उनका किसी भी संत का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था।