मध्य-पूर्व में तनाव के बीच अमेरिका ने किया अतिरिक्त मरीन और युद्धपोतों की तैनाती
सारांश
Key Takeaways
- मध्य-पूर्व में अमेरिका की सैन्य तैनाती बढ़ी है।
- ईरान का समुद्री खतरा चिंता का विषय है।
- यूएसएस त्रिपोली की तैनाती कुछ ही सप्ताह में होगी।
- वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर प्रभाव संभव है।
वॉशिंगटन, १४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पेंटागन ने मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण अतिरिक्त मरीन सैनिकों और युद्धपोतों को तैनात करने का निर्णय लिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान द्वारा समुद्री यातायात और क्षेत्रीय ठिकानों पर हमलों के पश्चात यह कदम उठाया जा रहा है।
फॉक्स न्यूज के मुताबिक, अमेरिका यूएसएस त्रिपोली के साथ एक मरीन एम्फीबियस रेडी ग्रुप और ३१वीं मरीन अभियान इकाई को क्षेत्र में भेज रहा है। एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी के अनुसार, इस तैनाती में लगभग २,५०० मरीन और २,५०० नाविक शामिल होंगे।
यूएसएस त्रिपोली इस समय जापान में तैनात है और इसे मध्य-पूर्व पहुंचने में लगभग एक से दो सप्ताह का समय लग सकता है। जब यह वहां पहुंचेगा, तो यह पहले से मौजूद अमेरिकी सैन्य संसाधनों के साथ जुड़ जाएगा।
यह तैनाती उस समय की जा रही है जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को धमकाने और खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों पर हमले करने की चेतावनी दी है। इससे वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से करीब २,५०० मरीन तीन युद्धपोतों के माध्यम से मध्य पूर्व की ओर रवाना हो रहे हैं। ये सैनिक वहां पहले से तैनात अमेरिकी बलों को मजबूत करेंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल मध्य-पूर्व में ५०,००० से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और नए मरीन उनके साथ जुड़ेंगे। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट नहीं किया है कि क्षेत्र में पहुंचने के बाद इन अतिरिक्त बलों का उपयोग किस प्रकार किया जाएगा।
इस तैनाती पर पूछे गए सवालों पर, पेंटागन के एक प्रवक्ता ने परिचालन से जुड़े विवरण साझा करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कारणों से भविष्य या संभावित सैन्य गतिविधियों पर टिप्पणी नहीं की जाती है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
उद्योग से जुड़े अनुमानों के अनुसार, दुनिया की लगभग पांचवीं हिस्से की तेल आपूर्ति बड़े टैंकर जहाजों के जरिए इसी संकरे समुद्री मार्ग से गुजरती है। इसलिए, यहां किसी भी प्रकार की बाधा का असर तुरंत वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है।
अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि वाणिज्यिक जहाजों पर हमले बढ़ते हैं, तो यूएस नेवी व्यापारी जहाजों को जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकालने के लिए एस्कॉर्ट देने पर विचार कर सकती है। ऐसा कदम अमेरिका ने १९८० के दशक के अंत में ईरान के साथ तनाव के दौरान भी उठाया था।