29 अक्टूबर 2026
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हन्नान मोल्लाह का रिजिजू पर पलटवार: नसीरुद्दीन शाह को 'दिमागी नक्सल' कहने पर बोले — 'मेंटल क्रिमिनल' हैं मंत्री

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हन्नान मोल्लाह का रिजिजू पर पलटवार: नसीरुद्दीन शाह को 'दिमागी नक्सल' कहने पर बोले — 'मेंटल क्रिमिनल' हैं मंत्री

सारांश

केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने नसीरुद्दीन शाह को 'खतरनाक शहरी दिमागी नक्सल' बताया — और बदले में सीपीआई (एम) नेता हन्नान मोल्लाह ने उन्हें 'मेंटल क्रिमिनल' कह दिया। यह विवाद असहमति को लेबल करने की उस पुरानी राजनीति का ताज़ा अध्याय है जो 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' से 'अर्बन नक्सल' होते हुए अब 'दिमागी नक्सल' तक पहुँच गई है।

मुख्य बातें

किरेन रिजिजू ने 28 अक्टूबर 2026 को एक्स पर पोस्ट करके अभिनेता नसीरुद्दीन शाह को 'खतरनाक शहरी दिमागी नक्सल' बताया।
सीपीआई (एम) नेता हन्नान मोल्लाह ने 29 अक्टूबर को पलटवार करते हुए रिजिजू को 'मेंटल क्रिमिनल' (मानसिक अपराधी) करार दिया।
मोल्लाह ने आरोप लगाया कि सरकार की आलोचना करने वालों को अपमानजनक नामों से निशाना बनाया जा रहा है।
कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा कि 'टुकड़े-टुकड़े गैंग', 'अर्बन नक्सल' और 'दिमागी नक्सल' — यह BJP की असहमति दबाने की चिरपरिचित रणनीति है।
रिजिजू की ओर से मोल्लाह की प्रतिक्रिया पर अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।

सीपीआई (एम) नेता हन्नान मोल्लाह ने गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू पर कड़ा हमला बोला और उन्हें 'मेंटल क्रिमिनल' (मानसिक अपराधी) करार दिया। यह प्रतिक्रिया रिजिजू द्वारा वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह को 'खतरनाक शहरी दिमागी नक्सल' बताने वाली एक्स पोस्ट के बाद सामने आई। नई दिल्ली में भड़का यह राजनीतिक विवाद सत्ता की आलोचना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर व्यापक बहस को नया आयाम दे रहा है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार, 28 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा: 'मैं समझता था कि नसीरुद्दीन शाह सिर्फ एक साधारण अभिनेता हैं। मैं उनका सम्मान करता था और उन्हें पसंद भी करता था। मुझे नहीं पता था कि वह एक खतरनाक शहरी दिमागी नक्सल हैं। मुझे उनके असली चरित्र के बारे में बहुत देर से पता चला। वह भारत के लोकतंत्र के लिए बेहद हानिकारक हैं।'

रिजिजू की इस पोस्ट को लेकर विपक्षी दलों में तीव्र प्रतिक्रिया हुई और नसीरुद्दीन शाह द्वारा जेनजी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किए जाने का मुद्दा केंद्र में आ गया।

मोल्लाह का पलटवार

हन्नान मोल्लाह ने रिजिजू की टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम, लोकतंत्र, संविधान और मौलिक अधिकारों की समझ नहीं है। मोल्लाह ने कहा, 'किरेन रिजिजू अपनी ही सोच में रहते हैं। उन्हें भारत की आज़ादी, लोकतंत्र और संविधान की कोई समझ नहीं है।'

उन्होंने आगे कहा कि नसीरुद्दीन शाह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित अभिनेता हैं और यदि उन्होंने प्रदर्शनकारियों के पक्ष में आवाज़ उठाई तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए थी, न कि उन पर व्यक्तिगत हमले किए जाने चाहिए थे।

सरकार पर लेबलिंग का आरोप

मोल्लाह ने यह भी कहा कि जो लोग सरकार से सवाल पूछते हैं या गलत कामों के खिलाफ बोलते हैं, उन्हें 'ब्रेनवॉश्ड नक्सल' कहा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया: 'आज देश में लोगों को दो हिस्सों में बाँट दिया गया है। नसीरुद्दीन शाह को ब्रेनवॉश्ड नक्सल कहा जा रहा है, जबकि किरेन रिजिजू को मैं दिमागी पागल कहता हूँ।'

उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग सत्तारूढ़ दल से सवाल पूछते हैं, उन्हें अपमानजनक नामों से पुकारा जाता है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने भी इस प्रकरण में BJP की आलोचना की। उन्होंने कहा, 'जो भी व्यक्ति ऐसी बात कहता है जो BJP को पसंद नहीं, उसे अलग-अलग नाम दे दिए जाते हैं — कभी टुकड़े-टुकड़े गैंग, कभी अर्बन नक्सल और अब दिमागी नक्सल। यह उनका काम करने का तरीका है।'

गौरतलब है कि 'अर्बन नक्सल' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसे शब्द पहले भी कई बार विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर इस्तेमाल होते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह 'लेबलिंग की राजनीति' असहमति को दबाने का एक औज़ार बन गई है।

क्या होगा आगे

यह विवाद ऐसे समय में भड़का है जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक असहमति को लेकर देशभर में बहस तेज़ है। विपक्षी दल इस मुद्दे को संसद में उठाने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। किरेन रिजिजू की ओर से अभी तक मोल्लाह के जवाब पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

'अर्बन नक्सल', 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' — इन लेबलों की बढ़ती सूची दर्शाती है कि राजनीतिक असहमति को बहस से नहीं, नामकरण से खारिज करने का चलन कितना गहरा हो चुका है। रिजिजू जैसे वरिष्ठ मंत्री का एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित कलाकार पर ऐसी टिप्पणी संस्थागत मर्यादा का सवाल खड़ा करती है। दूसरी तरफ मोल्लाह का जवाब भी उसी तर्ज़ पर व्यक्तिगत है — जो यह रेखांकित करता है कि असली मुद्दा, यानी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक लेबलिंग की सीमाएँ, इस शोर में दब जाती हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि यह विवाद अकेला नहीं — यह एक लंबी प्रवृत्ति की कड़ी है जहाँ असहमति को विचारधारा से नहीं, अपमान से जवाब दिया जाता है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किरेन रिजिजू ने नसीरुद्दीन शाह के बारे में क्या कहा था?
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 28 अक्टूबर 2026 को एक्स पर पोस्ट करके नसीरुद्दीन शाह को 'खतरनाक शहरी दिमागी नक्सल' बताया और कहा कि वह भारत के लोकतंत्र के लिए बेहद हानिकारक हैं। रिजिजू ने यह भी लिखा कि उन्हें शाह के 'असली चरित्र' के बारे में बहुत देर से पता चला।
हन्नान मोल्लाह ने रिजिजू को 'मेंटल क्रिमिनल' क्यों कहा?
सीपीआई (एम) नेता हन्नान मोल्लाह ने रिजिजू की 'दिमागी नक्सल' टिप्पणी के जवाब में उन्हें 'मेंटल क्रिमिनल' बताया। मोल्लाह का तर्क था कि जो लोग सरकार की आलोचना करते हैं उन्हें नक्सल कहना और जो चापलूसी करते हैं उन्हें देशभक्त मानना मानसिक रूप से बीमार सोच है।
नसीरुद्दीन शाह ने किस मुद्दे पर बयान दिया था जिससे यह विवाद शुरू हुआ?
नसीरुद्दीन शाह ने कथित तौर पर जेनजी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया था, जिस पर किरेन रिजिजू ने एक्स पर उनके खिलाफ टिप्पणी की। हन्नान मोल्लाह के अनुसार, शाह की बात सुनी जानी चाहिए थी, न कि उन पर व्यक्तिगत हमले किए जाने चाहिए थे।
कांग्रेस ने इस विवाद पर क्या कहा?
कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा कि BJP का यही काम करने का तरीका है — जो भी असहमति जताए, उसे 'टुकड़े-टुकड़े गैंग', 'अर्बन नक्सल' या 'दिमागी नक्सल' जैसे नामों से बुलाओ। उन्होंने इसे BJP की एक सुनियोजित रणनीति बताया।
क्या 'अर्बन नक्सल' लेबल पहले भी इस्तेमाल हुआ है?
हाँ, 'अर्बन नक्सल' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसे शब्द पहले भी कई विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ इस्तेमाल किए जा चुके हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसे लेबल राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए व्यवस्थित रूप से उपयोग किए जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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