मल्लखम्भ चैंपियनशिप 2026: गुजरात के दीया रावल और देवव्रत पंड्या ने झांसी में जीते कई पदक
सारांश
मुख्य बातें
श्री सीताराम गुप्ता मेमोरियल ऑल इंडिया मल्लखम्भ चैंपियनशिप 2026 में गुजरात के युवा खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य का गौरव बढ़ाया। उत्तर प्रदेश के झांसी में 27 से 29 सितंबर 2026 तक आयोजित इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में वडोदरा की दीया रावल ने अंडर-16 गर्ल्स कैटेगरी में सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीते, जबकि अंडर-18 बॉयज कैटेगरी में देवव्रत पंड्या ने गोल्ड और सिल्वर मेडल अपने नाम किए। देश के 14 राज्यों की टीमों के बीच हुई इस प्रतिस्पर्धा में गुजरात का प्रदर्शन बहुआयामी रहा।
पदक विजेताओं का प्रदर्शन
दीया रावल ने टीम चैंपियनशिप स्पर्धा में सिल्वर मेडल और व्यक्तिगत स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। दीया ने अपनी उपलब्धि के बारे में बताया, 'मैंने झांसी मल्लखम्भ प्रतियोगिता में अंडर-16 कैटेगरी में भाग लिया था। मैंने टीम चैंपियनशिप में सिल्वर और व्यक्तिगत स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया है।'
देवव्रत पंड्या ने टीम स्पर्धा में गोल्ड मेडल और व्यक्तिगत स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता। देवव्रत ने कहा, 'झांसी में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हमारी टीम ने गोल्ड मेडल जीता और व्यक्तिगत स्पर्धा में मैंने सिल्वर मेडल हासिल किया।'
गुजरात की टीमों का समग्र प्रदर्शन
व्यक्तिगत पदकों के अलावा गुजरात की अंडर-19 बॉयज और अंडर-14 गर्ल्स टीमों ने गोल्ड मेडल जीते। अंडर-16 गर्ल्स टीम को सिल्वर और अंडर-14 बॉयज टीम को ब्रॉन्ज मेडल मिला। इस प्रकार राज्य ने समग्र टीम प्रदर्शन में भी उल्लेखनीय स्थान हासिल किया।
एसोसिएशन की भूमिका और तैयारी
गुजरात स्टेट मल्लखम्भ एसोसिएशन के सचिव राहुल चोकसी ने बताया, 'बच्चों का चयन होने के बाद वे राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें, इसके लिए उन्हें अधिक से अधिक अभ्यास का समय दिया गया। एसोसिएशन की ओर से हमने उन्हें अलग-अलग जगहों पर ट्रेनिंग दी और अपनी तरफ से हर संभव सहयोग प्रदान किया।' उनके अनुसार खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण का सीधा असर राष्ट्रीय मंच पर दिखाई दिया।
परिजनों की प्रतिक्रिया और सरकारी प्रोत्साहन
दीया की माँ पल्लवी रावल ने बताया कि दीया ने छठी कक्षा में मल्लखम्भ खेलना शुरू किया था और अब तक 6-8 राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं। उन्होंने कहा, 'हम उनके प्रदर्शन से बहुत खुश हैं।'
देवव्रत के पिता विपुल कुमार पंड्या ने खेल अवसंरचना में हो रहे विस्तार की सराहना की। उन्होंने 'खेलो इंडिया', 'खेलेगा गुजरात-जीतेगा गुजरात' और खेल महाकुंभ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिल रहे हैं। गुजरात सरकार की ओर से मिल रही सुविधाओं को परिजनों ने इन सफलताओं का अहम कारण बताया।
आगे की राह
इस चैंपियनशिप में मिली सफलता से गुजरात के मल्लखम्भ खिलाड़ियों का मनोबल ऊँचा है। यह ऐसे समय में आया है जब पारंपरिक भारतीय खेलों को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने की कोशिशें तेज हो रही हैं। दीया और देवव्रत जैसे युवा खिलाड़ियों की सफलता आने वाले वर्षों में और अधिक प्रतिभाओं को इस खेल की ओर आकर्षित कर सकती है।