29 अक्टूबर 2026
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पाकिस्तान: मानवाधिकार वकील दंपति इमान माजारी और हादी चट्ठा को आतंकवाद निरोधक अदालत ने सुनाई 10 साल की जेल

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पाकिस्तान: मानवाधिकार वकील दंपति इमान माजारी और हादी चट्ठा को आतंकवाद निरोधक अदालत ने सुनाई 10 साल की जेल

सारांश

पाकिस्तान में एक मानवाधिकार वकील दंपति को आतंकवाद निरोधक कानून के तहत 10-10 साल की जेल — जो खुद को 'राज्य के कैदी' बता रहे हैं। 15 अंतरराष्ट्रीय संगठन पहले ही अलर्ट जारी कर चुके हैं। यह मामला पाकिस्तान में मानवाधिकार रक्षकों के खिलाफ बढ़ते दमन की तस्वीर पेश करता है।

मुख्य बातें

इस्लामाबाद की आतंकवाद निरोधक अदालत ने 29 अक्टूबर 2026 को इमान जैनब माजारी-हाजिर और हादी अली चट्ठा को 10-10 साल की सजा सुनाई।
मामला अक्टूबर 2024 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम के दौरे के दौरान कथित सुरक्षा लापरवाही से जुड़ा है।
अदालत ने आतंकवाद निरोधक अधिनियम, 1997 के तहत 10 साल की सजा और एक-एक लाख पाकिस्तानी रुपए जुर्माना लगाया; सभी सजाएँ साथ-साथ चलेंगी।
FIDH और OMCT समेत 15 अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने पहले ही संयुक्त बयान जारी कर चिंता व्यक्त की थी।
बचाव पक्ष के अनुसार, इस मामले से जुड़ी याचिकाएँ पाकिस्तान सर्वोच्च न्यायालय और इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में अभी भी लंबित हैं।
दंपति का कहना है कि उन्हें हाशिए के समुदायों और जबरन लापता व्यक्तियों के लिए किए गए मानवाधिकार कार्यों के कारण निशाना बनाया गया।

इस्लामाबाद की एक आतंकवाद निरोधक अदालत (ATC) ने 29 अक्टूबर 2026 को मानवाधिकार वकील इमान जैनब माजारी-हाजिर और उनके पति हादी अली चट्ठा को एक सुरक्षा उल्लंघन मामले में 10-10 साल की सजा सुनाई। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला अक्टूबर 2024 में एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम के पाकिस्तान दौरे के दौरान कथित सुरक्षा लापरवाही से जुड़ा है। वकील दंपति ने इस मुकदमे को अपने मानवाधिकार कार्य के कारण 'राज्य प्रायोजित उत्पीड़न' करार दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

मामला इस्लामाबाद के आबपारा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। आरोप था कि दंपति ने राज्य के मामलों में हस्तक्षेप कर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला।

अदालत के आदेश के अनुसार, दोनों को पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 353 के तहत दो साल की कैद और 50,000 पाकिस्तानी रुपए जुर्माना, तथा धारा 186 के तहत एक साल की कैद और 50,000 रुपए जुर्माना लगाया गया। इसके अतिरिक्त, आतंकवाद निरोधक अधिनियम, 1997 के तहत दोनों को 10-10 साल की कैद और एक-एक लाख पाकिस्तानी रुपए का जुर्माना सुनाया गया।

अदालत ने यह भी आदेश दिया कि सभी सजाएँ एक साथ चलेंगी, जिसके कारण दोनों को व्यावहारिक रूप से 10 साल की कैद भुगतनी होगी।

बचाव पक्ष की दलीलें

वकील दंपति के अधिवक्ता ऐमल मंडोखैल ने अदालत से फैसला टालने की माँग की थी। उनका तर्क था कि इस मामले से जुड़ी याचिकाएँ अभी पाकिस्तान सर्वोच्च न्यायालय और इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में लंबित हैं। मंडोखैल ने दलील दी कि जब तक उच्च अदालतों में लंबित याचिकाओं पर निर्णय नहीं आ जाता, तब तक निचली अदालत कानूनी रूप से फैसला नहीं सुना सकती थी।

दंपति का पक्ष

इमान माजारी-हाजिर और हादी अली चट्ठा ने अपने खिलाफ दर्ज मामले को 'उत्पीड़न' बताया और कहा कि उन्हें उनके मानवाधिकार कार्य के कारण निशाना बनाया जा रहा है। दोनों ने अदालत में दर्ज बयानों में कहा कि मुकदमे में पेश किए गए साक्ष्य उनके खिलाफ नहीं, बल्कि 'सरकारी अधिकारियों और राज्य तंत्र के खिलाफ आरोपनामे जैसे हैं।'

उनका आरोप है कि सरकारी एजेंसियों ने हाशिए पर रहने वाले समुदायों, सड़क विक्रेताओं, झूठे ईशनिंदा मामलों का सामना कर रहे लोगों और जबरन लापता व्यक्तियों के लिए किए गए उनके कानूनी कार्यों की वजह से उन्हें परेशान किया। दंपति ने अपने बयान में कहा, 'हम राज्य द्वारा प्रताड़ित किए जा रहे कैदी हैं।'

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंता का विषय बना हुआ है। गत महीने इंटरनेशनल फेडरेशन फॉर ह्यूमन राइट्स (FIDH) और वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन अगेंस्ट टॉर्चर (OMCT) समेत 15 अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने संयुक्त बयान जारी कर दोनों की लगातार हिरासत पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी।

आगे क्या होगा

अधिवक्ता मंडोखैल के अनुसार, बचाव पक्ष उच्च अदालतों में इस फैसले को चुनौती देने की तैयारी में है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में मानवाधिकार रक्षकों और स्वतंत्र वकीलों के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानूनों के इस्तेमाल को लेकर अंतरराष्ट्रीय कानूनी विशेषज्ञ लंबे समय से सवाल उठाते रहे हैं। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट दौरे की 'सुरक्षा लापरवाही' को वकीलों पर ATA के तहत मुकदमे से जोड़ना कानूनी तर्क के किसी भी पैमाने पर असाधारण है। यह ऐसे समय में आया है जब 15 वैश्विक मानवाधिकार संगठन पहले से ही अलर्ट जारी कर चुके हैं — जो दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव इस फैसले को रोकने में नाकाम रहा। मुख्यधारा की कवरेज जो अनदेखा कर रही है, वह यह है कि लंबित उच्च अदालती याचिकाओं के बावजूद फैसला सुनाना प्रक्रियागत रूप से विवादास्पद है — और यह न्यायिक स्वतंत्रता पर उतना ही बड़ा सवाल है जितना मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर दमन का।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इमान माजारी-हाजिर और हादी अली चट्ठा को किस मामले में सजा सुनाई गई?
इन्हें अक्टूबर 2024 में एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम के पाकिस्तान दौरे के दौरान कथित सुरक्षा लापरवाही से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया। मामला इस्लामाबाद के आबपारा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था और आरोप था कि दंपति ने राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला।
दंपति को किन धाराओं के तहत सजा सुनाई गई?
अदालत ने पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 353 के तहत दो साल, धारा 186 के तहत एक साल, और आतंकवाद निरोधक अधिनियम 1997 के तहत 10-10 साल की सजा सुनाई। अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएँ एक साथ चलेंगी, यानी कुल प्रभावी सजा 10 साल होगी।
इमान माजारी और हादी चट्ठा का कहना क्या है?
दंपति ने इस मुकदमे को 'उत्पीड़न' बताया है और कहा है कि उन्हें हाशिए के समुदायों, झूठे ईशनिंदा आरोपों का सामना कर रहे लोगों और जबरन लापता व्यक्तियों के लिए किए गए मानवाधिकार कार्यों के कारण निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने खुद को 'राज्य द्वारा प्रताड़ित कैदी' कहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
FIDH और OMCT समेत 15 अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने पिछले महीने संयुक्त बयान जारी कर दोनों की हिरासत पर गंभीर चिंता जताई थी। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव और तेज होने की संभावना है।
क्या इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती दी जा सकती है?
हाँ, बचाव पक्ष के वकील ऐमल मंडोखैल के अनुसार इस मामले से जुड़ी याचिकाएँ पाकिस्तान सर्वोच्च न्यायालय और इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में पहले से लंबित हैं। बचाव पक्ष इस फैसले को उच्च अदालतों में चुनौती देने की तैयारी में है।
राष्ट्र प्रेस
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