पाकिस्तान: सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलते ही वकील ईमान मजारी-हजीर और हादी चट्टा फिर गिरफ्तार, ATC ने भेजा न्यायिक हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान में मानवाधिकार वकील ईमान जैनब मजारी-हजीर और उनके पति हादी अली चट्टा को 18 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के महज कुछ ही घंटों के भीतर पुनः गिरफ्तार कर लिया गया। इस्लामाबाद की आतंकवाद-रोधी अदालत (ATC) ने दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह गिरफ्तारी सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट से जुड़े मामले में की गई है।
मामले का घटनाक्रम
23 जनवरी को दोनों वकीलों को पहली बार गिरफ्तार किया गया था और ATC ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। इसके अगले ही दिन 24 जनवरी को जिला एवं सत्र न्यायालय ने सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े कई आरोपों के तहत दोनों को 17-17 साल की कैद और 3 करोड़ 60 लाख पाकिस्तानी रुपये प्रत्येक का जुर्माना सुनाया।
दोनों ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट (IHC) में सजा को चुनौती दी और सजा पर रोक की अपील की। जब IHC ने चार महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इन याचिकाओं पर कोई निर्णय नहीं दिया, तो दोनों वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और IHC पर सवाल
12 मई को सुप्रीम कोर्ट ने IHC को निर्देश दिया था कि वह सजा पर रोक की याचिकाओं पर निर्णय करे। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने सोशल मीडिया पोस्ट मामले में दोनों की सजा पर रोक लगाई। बेंच ने यह भी सवाल उठाया कि IHC ने सुप्रीम कोर्ट के 12 मई के आदेश का उल्लेख तो किया, लेकिन उसका पालन नहीं किया — जिसे बेंच ने 'अजीब' बात बताया।
यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच टकराव की खबरें लगातार आ रही हैं। गौरतलब है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब किसी उच्च न्यायालय के आदेश और निचली अदालत की कार्रवाई के बीच इस तरह का अंतर्विरोध सामने आया हो।
स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताएँ
25 अगस्त को पाकिस्तान के ह्यूमन राइट्स काउंसिल (HRC-Pakistan) ने ईमान मजारी-हजीर की बिगड़ती सेहत पर गहरी चिंता जताई थी। परिवार के अनुसार, वे एक सप्ताह से चेस्ट इन्फेक्शन से पीड़ित थीं और ब्लड टेस्ट में श्वेत रक्त कणिकाओं की अधिक संख्या पाई गई, जो संक्रमण का संकेत था।
परिवार ने बताया कि टीबी जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका को खारिज करने के लिए चेस्ट एक्स-रे आवश्यक था, परंतु जेल प्रशासन ने यह जाँच नहीं करवाई। HRC-Pakistan ने कहा कि अदियाला जेल के महिला वार्ड में संक्रामक रोगों से ग्रसित कैदियों को अलग नहीं रखा जाता, जो बाकी कैदियों और उनके बच्चों के लिए भी खतरा बनता है।
मानवाधिकार संगठन की माँगें
HRC-Pakistan ने पाकिस्तानी अधिकारियों से माँग की कि ईमान का तुरंत चेस्ट एक्स-रे और पूर्ण चिकित्सा जाँच कराई जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उचित अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए। संगठन ने यह भी कहा कि सभी महिला कैदियों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा, आवश्यक दवाएँ और जाँच सुविधाएँ तुरंत उपलब्ध कराई जाएँ।
संगठन ने स्पष्ट किया कि हिरासत में रहने का अर्थ यह नहीं कि किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य का अधिकार छिन जाए — हर कैदी की जान, सेहत और सम्मान की रक्षा सीधे राज्य और जेल प्रशासन की जिम्मेदारी है।
आगे क्या होगा
दोनों वकीलों की लंबित कानूनी याचिकाओं पर IHC और सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाही जारी रहने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस मामले पर करीबी नज़र रख रहे हैं और पाकिस्तान में न्याय प्रक्रिया की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।