18 सितंबर 2026
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पाकिस्तान: सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलते ही वकील ईमान मजारी-हजीर और हादी चट्टा फिर गिरफ्तार, ATC ने भेजा न्यायिक हिरासत में

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पाकिस्तान: सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलते ही वकील ईमान मजारी-हजीर और हादी चट्टा फिर गिरफ्तार, ATC ने भेजा न्यायिक हिरासत में

सारांश

पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी, लेकिन घंटों में फिर गिरफ्तारी — मानवाधिकार वकील ईमान मजारी-हजीर और हादी चट्टा का मामला न्यायपालिका के भीतर गहरे अंतर्विरोध और कार्यकर्ताओं पर बढ़ते दमन की तस्वीर पेश करता है।

मुख्य बातें

मानवाधिकार वकील ईमान जैनब मजारी-हजीर और पति हादी अली चट्टा को 18 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत के कुछ घंटों बाद पुनः गिरफ्तार किया गया।
इस्लामाबाद ATC ने दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजा; मामला सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट से जुड़ा है।
24 जनवरी को जिला अदालत ने दोनों को 17-17 साल की सजा और 3 करोड़ 60 लाख पाकिस्तानी रुपये जुर्माना सुनाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने IHC पर सवाल उठाए — 12 मई के आदेश के बावजूद IHC ने चार महीने में कोई निर्णय नहीं दिया।
HRC-Pakistan ने 25 अगस्त को ईमान की बिगड़ती सेहत और अदियाला जेल में चिकित्सा सुविधाओं की खराब स्थिति पर गंभीर चिंता जताई थी।

पाकिस्तान में मानवाधिकार वकील ईमान जैनब मजारी-हजीर और उनके पति हादी अली चट्टा को 18 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के महज कुछ ही घंटों के भीतर पुनः गिरफ्तार कर लिया गया। इस्लामाबाद की आतंकवाद-रोधी अदालत (ATC) ने दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह गिरफ्तारी सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट से जुड़े मामले में की गई है।

मामले का घटनाक्रम

23 जनवरी को दोनों वकीलों को पहली बार गिरफ्तार किया गया था और ATC ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। इसके अगले ही दिन 24 जनवरी को जिला एवं सत्र न्यायालय ने सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े कई आरोपों के तहत दोनों को 17-17 साल की कैद और 3 करोड़ 60 लाख पाकिस्तानी रुपये प्रत्येक का जुर्माना सुनाया।

दोनों ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट (IHC) में सजा को चुनौती दी और सजा पर रोक की अपील की। जब IHC ने चार महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इन याचिकाओं पर कोई निर्णय नहीं दिया, तो दोनों वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और IHC पर सवाल

12 मई को सुप्रीम कोर्ट ने IHC को निर्देश दिया था कि वह सजा पर रोक की याचिकाओं पर निर्णय करे। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने सोशल मीडिया पोस्ट मामले में दोनों की सजा पर रोक लगाई। बेंच ने यह भी सवाल उठाया कि IHC ने सुप्रीम कोर्ट के 12 मई के आदेश का उल्लेख तो किया, लेकिन उसका पालन नहीं किया — जिसे बेंच ने 'अजीब' बात बताया।

यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच टकराव की खबरें लगातार आ रही हैं। गौरतलब है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब किसी उच्च न्यायालय के आदेश और निचली अदालत की कार्रवाई के बीच इस तरह का अंतर्विरोध सामने आया हो।

स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताएँ

25 अगस्त को पाकिस्तान के ह्यूमन राइट्स काउंसिल (HRC-Pakistan) ने ईमान मजारी-हजीर की बिगड़ती सेहत पर गहरी चिंता जताई थी। परिवार के अनुसार, वे एक सप्ताह से चेस्ट इन्फेक्शन से पीड़ित थीं और ब्लड टेस्ट में श्वेत रक्त कणिकाओं की अधिक संख्या पाई गई, जो संक्रमण का संकेत था।

परिवार ने बताया कि टीबी जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका को खारिज करने के लिए चेस्ट एक्स-रे आवश्यक था, परंतु जेल प्रशासन ने यह जाँच नहीं करवाई। HRC-Pakistan ने कहा कि अदियाला जेल के महिला वार्ड में संक्रामक रोगों से ग्रसित कैदियों को अलग नहीं रखा जाता, जो बाकी कैदियों और उनके बच्चों के लिए भी खतरा बनता है।

मानवाधिकार संगठन की माँगें

HRC-Pakistan ने पाकिस्तानी अधिकारियों से माँग की कि ईमान का तुरंत चेस्ट एक्स-रे और पूर्ण चिकित्सा जाँच कराई जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उचित अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए। संगठन ने यह भी कहा कि सभी महिला कैदियों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा, आवश्यक दवाएँ और जाँच सुविधाएँ तुरंत उपलब्ध कराई जाएँ।

संगठन ने स्पष्ट किया कि हिरासत में रहने का अर्थ यह नहीं कि किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य का अधिकार छिन जाए — हर कैदी की जान, सेहत और सम्मान की रक्षा सीधे राज्य और जेल प्रशासन की जिम्मेदारी है।

आगे क्या होगा

दोनों वकीलों की लंबित कानूनी याचिकाओं पर IHC और सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाही जारी रहने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस मामले पर करीबी नज़र रख रहे हैं और पाकिस्तान में न्याय प्रक्रिया की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पाकिस्तान में न्यायिक स्वायत्तता पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न है। IHC का सुप्रीम कोर्ट के आदेश को चार महीने तक अनदेखा करना संकेत देता है कि संस्थागत दबाव न्यायपालिका की परतों तक पहुँच चुका है। ईमान की बिगड़ती सेहत और जेल में चिकित्सा सुविधाओं से इनकार इस मामले को और गंभीर बनाता है — जहाँ कानूनी उत्पीड़न और स्वास्थ्य अधिकार का हनन एक साथ हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी इस दमन को और बल देती है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईमान मजारी-हजीर और हादी चट्टा को क्यों गिरफ्तार किया गया?
दोनों को सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया है। जिला अदालत ने 24 जनवरी को दोनों को 17-17 साल की सजा और 3 करोड़ 60 लाख पाकिस्तानी रुपये जुर्माना सुनाया था, जिसे उन्होंने उच्च न्यायालयों में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद फिर गिरफ्तारी कैसे हुई?
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच ने दोनों की सजा पर रोक लगाई, लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद इस्लामाबाद ATC ने उन्हें पुनः गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह स्थिति सुप्रीम कोर्ट और निचली अदालतों के बीच के अंतर्विरोध को उजागर करती है।
IHC ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन क्यों नहीं किया?
12 मई को सुप्रीम कोर्ट ने IHC को याचिकाओं पर निर्णय का आदेश दिया था, परंतु चार महीने बाद भी IHC ने कोई फैसला नहीं सुनाया। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इसे 'अजीब' बताते हुए सवाल उठाए कि IHC ने आदेश का उल्लेख किया लेकिन पालन नहीं किया।
ईमान मजारी-हजीर की सेहत को लेकर क्या चिंताएँ हैं?
25 अगस्त को HRC-Pakistan ने बताया कि ईमान एक सप्ताह से चेस्ट इन्फेक्शन से पीड़ित थीं और ब्लड टेस्ट में संक्रमण के संकेत मिले। परिवार के अनुसार जेल प्रशासन ने आवश्यक चेस्ट एक्स-रे कराने से इनकार किया।
HRC-Pakistan ने पाकिस्तानी अधिकारियों से क्या माँगें की हैं?
HRC-Pakistan ने ईमान का तुरंत चेस्ट एक्स-रे और पूर्ण चिकित्सा जाँच कराने, जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित अस्पताल भेजने, और सभी महिला कैदियों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा तथा आवश्यक दवाएँ उपलब्ध कराने की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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