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पाकिस्तान में अफगान पत्रकार सैयद कासिम हाशमी गिरफ्तार, शरणार्थियों पर बढ़ती कार्रवाई पर मानवाधिकार संगठनों की चिंता गहरी

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पाकिस्तान में अफगान पत्रकार सैयद कासिम हाशमी गिरफ्तार, शरणार्थियों पर बढ़ती कार्रवाई पर मानवाधिकार संगठनों की चिंता गहरी

सारांश

पाकिस्तान में दस दिनों के भीतर दूसरे अफगान पत्रकार की गिरफ्तारी — सैयद कासिम हाशमी एबटाबाद-इस्लामाबाद हाईवे पर हिरासत में। AMSO की रिपोर्ट बताती है कि 2023 से 34 लाख अफगानों को वापस भेजा जा चुका है और 96.4% ने हिरासत में दुर्व्यवहार का दावा किया है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान पुलिस ने अफगान पत्रकार सैयद कासिम हाशमी को 29 मई 2025 को दोपहर 12:19 बजे एबटाबाद-इस्लामाबाद हाईवे पर गिरफ्तार किया।
इससे पहले 20 मई को अफगान पत्रकार परवेज अमीनजादा को इस्लामाबाद के फैसल टाउन से हिरासत में लिया गया था।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने गिरफ्तारी का कारण या हाशमी की मौजूदा स्थिति के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया।
AMSO की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 से अब तक पाकिस्तान और ईरान से 34 लाख से अधिक अफगान प्रवासियों को वापस भेजा जा चुका है।
सर्वे में शामिल 96.4% अफगानों ने हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार का दावा किया; 85.7% को रिहाई के लिए पैसे देने पड़े।
यह रिपोर्ट वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन अगेंस्ट टॉर्चर के सहयोग से तैयार होकर संयुक्त राष्ट्र की कमेटी अगेंस्ट टॉर्चर के सामने पेश की गई।

पाकिस्तान पुलिस ने अफगान पत्रकार सैयद कासिम हाशमी को गुरुवार, 29 मई 2025 को दोपहर करीब 12:19 बजे एबटाबाद-इस्लामाबाद हाईवे पर हिरासत में ले लिया। अफगानिस्तान स्थित समाचार संस्था खामा प्रेस ने इस गिरफ्तारी की जानकारी दी। पाकिस्तानी अधिकारियों ने अब तक न तो गिरफ्तारी का कारण बताया है और न ही हाशमी की मौजूदा स्थिति के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी किया है।

गिरफ्तारी की परिस्थितियाँ

हाशमी को कहाँ रखा गया है, इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। उनके साथी पत्रकार और परिचित लगातार उनकी खोज-खबर लेने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान में अफगान नागरिकों — विशेषकर पत्रकारों — के खिलाफ कार्रवाई तेज हो रही है।

गौरतलब है कि इससे महज नौ दिन पहले, 20 मई को, पाकिस्तानी पुलिस ने एक अन्य अफगान पत्रकार परवेज अमीनजादा को इस्लामाबाद के फैसल टाउन इलाके से हिरासत में लिया था। इस प्रकार, केवल दस दिनों के भीतर दो अफगान पत्रकारों की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया स्वतंत्रता समुदाय में गंभीर चिंता उत्पन्न की है।

अफगान शरणार्थियों पर बढ़ती कार्रवाई का संदर्भ

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद वहाँ के सैकड़ों पत्रकार और मीडियाकर्मी देश छोड़कर भाग गए थे। सेंसरशिप, मीडिया पर पाबंदियों और जान के खतरे के चलते इनमें से बड़ी संख्या पाकिस्तान और ईरान जैसे पड़ोसी देशों में पश्चिमी देशों में पुनर्वास के इंतजार में रह रही है।

अफगानिस्तान मीडिया सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (AMSO) ने 8 मई को जारी एक रिपोर्ट में कहा था कि पाकिस्तान में रह रहे अफगान शरणार्थियों को मनमानी गिरफ्तारियों, दुर्व्यवहार, जबरन पैसे वसूलने और जबरन निर्वासन जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

AMSO रिपोर्ट के चौंकाने वाले आँकड़े

AMSO की रिपोर्ट 41 अफगान नागरिकों के सर्वे, 6 गहन इंटरव्यू और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (UNHCR), इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM), एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान जैसी संस्थाओं के दस्तावेजों पर आधारित है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं: सर्वे में शामिल 68.3% अफगानों ने कहा कि उन्हें गिरफ्तार किया गया या जेल में रखा गया। 96.4% लोगों ने दावा किया कि हिरासत के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। 85.7% को गिरफ्तारी से बचने या रिहाई के लिए पैसे देने पड़े। 75.6% को धमकियाँ दी गईं और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। 72.4% को बिना किसी कानूनी सुनवाई के 48 घंटे से अधिक हिरासत में रखा गया।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि पाकिस्तान से निकाले गए किसी भी व्यक्ति का पहले व्यक्तिगत जोखिम आकलन नहीं किया गया। यह रिपोर्ट वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन अगेंस्ट टॉर्चर के सहयोग से तैयार की गई और संयुक्त राष्ट्र की कमेटी अगेंस्ट टॉर्चर के सामने पेश की गई।

निर्वासन का व्यापक दायरा

AMSO के आँकड़ों के अनुसार, 2023 से अब तक पाकिस्तान और ईरान से 34 लाख से अधिक अफगान प्रवासियों को वापस भेजा जा चुका है। यह कार्रवाई बिना दस्तावेज वाले विदेशियों के खिलाफ चल रहे व्यापक अभियान का हिस्सा बताई जा रही है। आलोचकों का कहना है कि इस अभियान में अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी कानूनों की अनदेखी की जा रही है।

आगे क्या होगा

सैयद कासिम हाशमी की रिहाई और उनके ठिकाने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। मानवाधिकार संगठन पाकिस्तानी अधिकारियों से पारदर्शिता और हाशमी की तत्काल रिहाई की माँग कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता स्वतंत्रता समुदाय की नजर इस मामले पर टिकी है, और यदि स्थिति नहीं सुधरी तो यह मुद्दा द्विपक्षीय कूटनीतिक दबाव का रूप ले सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी संरक्षण के बुनियादी मानकों की अनदेखी के आरोप लग रहे हैं। चिंताजनक पहलू यह है कि निशाने पर वे पत्रकार हैं जो तालिबान शासन से जान बचाकर भागे थे और पश्चिमी देशों में पुनर्वास का इंतजार कर रहे थे — यानी वही लोग जिन्हें सबसे अधिक संरक्षण की जरूरत है। AMSO के आँकड़े — 96.4% ने दुर्व्यवहार का दावा किया, किसी का भी जोखिम आकलन नहीं हुआ — अगर सही हैं, तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि इन गिरफ्तारियों का सीधा असर उन अफगान आवाजों पर पड़ता है जो तालिबान के अत्याचारों को दुनिया तक पहुँचाने में सक्षम थीं।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सैयद कासिम हाशमी कौन हैं और उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया?
सैयद कासिम हाशमी एक अफगान पत्रकार हैं जिन्हें 29 मई 2025 को पाकिस्तानी पुलिस ने एबटाबाद-इस्लामाबाद हाईवे पर हिरासत में लिया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने अब तक गिरफ्तारी का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है।
पाकिस्तान में अफगान पत्रकारों पर कार्रवाई क्यों बढ़ रही है?
पाकिस्तान में अवैध प्रवासियों के खिलाफ चल रहे व्यापक अभियान के तहत अफगान नागरिकों की गिरफ्तारियाँ और निर्वासन बढ़े हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भागे कई अफगान पत्रकार पाकिस्तान में पश्चिमी देशों में पुनर्वास का इंतजार कर रहे थे, जो अब इस अभियान की चपेट में आ रहे हैं।
AMSO की रिपोर्ट में अफगान शरणार्थियों की क्या स्थिति बताई गई है?
अफगानिस्तान मीडिया सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (AMSO) की 8 मई की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे में शामिल 96.4% अफगानों ने हिरासत में दुर्व्यवहार का दावा किया, 85.7% को रिहाई के लिए पैसे देने पड़े और 72.4% को बिना कानूनी सुनवाई के 48 घंटे से अधिक हिरासत में रखा गया। यह रिपोर्ट वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन अगेंस्ट टॉर्चर के सहयोग से तैयार की गई।
2023 से अब तक कितने अफगान प्रवासियों को पाकिस्तान से वापस भेजा गया है?
AMSO के आँकड़ों के अनुसार, 2023 से अब तक पाकिस्तान और ईरान से मिलाकर 34 लाख से अधिक अफगान प्रवासियों को वापस भेजा जा चुका है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इनमें से किसी का भी पहले व्यक्तिगत जोखिम आकलन नहीं किया गया।
हाशमी की गिरफ्तारी से पहले पाकिस्तान में कौन से अफगान पत्रकार हिरासत में लिए गए थे?
हाशमी की गिरफ्तारी से ठीक नौ दिन पहले, 20 मई 2025 को, पाकिस्तानी पुलिस ने अफगान पत्रकार परवेज अमीनजादा को इस्लामाबाद के फैसल टाउन इलाके से हिरासत में लिया था। इस प्रकार दस दिनों में दो अफगान पत्रकारों की गिरफ्तारी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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