पाकिस्तान में अफगान पत्रकार सैयद कासिम हाशमी गिरफ्तार, शरणार्थियों पर बढ़ती कार्रवाई पर मानवाधिकार संगठनों की चिंता गहरी
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान पुलिस ने अफगान पत्रकार सैयद कासिम हाशमी को गुरुवार, 29 मई 2025 को दोपहर करीब 12:19 बजे एबटाबाद-इस्लामाबाद हाईवे पर हिरासत में ले लिया। अफगानिस्तान स्थित समाचार संस्था खामा प्रेस ने इस गिरफ्तारी की जानकारी दी। पाकिस्तानी अधिकारियों ने अब तक न तो गिरफ्तारी का कारण बताया है और न ही हाशमी की मौजूदा स्थिति के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी किया है।
गिरफ्तारी की परिस्थितियाँ
हाशमी को कहाँ रखा गया है, इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। उनके साथी पत्रकार और परिचित लगातार उनकी खोज-खबर लेने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान में अफगान नागरिकों — विशेषकर पत्रकारों — के खिलाफ कार्रवाई तेज हो रही है।
गौरतलब है कि इससे महज नौ दिन पहले, 20 मई को, पाकिस्तानी पुलिस ने एक अन्य अफगान पत्रकार परवेज अमीनजादा को इस्लामाबाद के फैसल टाउन इलाके से हिरासत में लिया था। इस प्रकार, केवल दस दिनों के भीतर दो अफगान पत्रकारों की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया स्वतंत्रता समुदाय में गंभीर चिंता उत्पन्न की है।
अफगान शरणार्थियों पर बढ़ती कार्रवाई का संदर्भ
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद वहाँ के सैकड़ों पत्रकार और मीडियाकर्मी देश छोड़कर भाग गए थे। सेंसरशिप, मीडिया पर पाबंदियों और जान के खतरे के चलते इनमें से बड़ी संख्या पाकिस्तान और ईरान जैसे पड़ोसी देशों में पश्चिमी देशों में पुनर्वास के इंतजार में रह रही है।
अफगानिस्तान मीडिया सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (AMSO) ने 8 मई को जारी एक रिपोर्ट में कहा था कि पाकिस्तान में रह रहे अफगान शरणार्थियों को मनमानी गिरफ्तारियों, दुर्व्यवहार, जबरन पैसे वसूलने और जबरन निर्वासन जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
AMSO रिपोर्ट के चौंकाने वाले आँकड़े
AMSO की रिपोर्ट 41 अफगान नागरिकों के सर्वे, 6 गहन इंटरव्यू और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (UNHCR), इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM), एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान जैसी संस्थाओं के दस्तावेजों पर आधारित है।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं: सर्वे में शामिल 68.3% अफगानों ने कहा कि उन्हें गिरफ्तार किया गया या जेल में रखा गया। 96.4% लोगों ने दावा किया कि हिरासत के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। 85.7% को गिरफ्तारी से बचने या रिहाई के लिए पैसे देने पड़े। 75.6% को धमकियाँ दी गईं और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। 72.4% को बिना किसी कानूनी सुनवाई के 48 घंटे से अधिक हिरासत में रखा गया।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि पाकिस्तान से निकाले गए किसी भी व्यक्ति का पहले व्यक्तिगत जोखिम आकलन नहीं किया गया। यह रिपोर्ट वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन अगेंस्ट टॉर्चर के सहयोग से तैयार की गई और संयुक्त राष्ट्र की कमेटी अगेंस्ट टॉर्चर के सामने पेश की गई।
निर्वासन का व्यापक दायरा
AMSO के आँकड़ों के अनुसार, 2023 से अब तक पाकिस्तान और ईरान से 34 लाख से अधिक अफगान प्रवासियों को वापस भेजा जा चुका है। यह कार्रवाई बिना दस्तावेज वाले विदेशियों के खिलाफ चल रहे व्यापक अभियान का हिस्सा बताई जा रही है। आलोचकों का कहना है कि इस अभियान में अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी कानूनों की अनदेखी की जा रही है।
आगे क्या होगा
सैयद कासिम हाशमी की रिहाई और उनके ठिकाने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। मानवाधिकार संगठन पाकिस्तानी अधिकारियों से पारदर्शिता और हाशमी की तत्काल रिहाई की माँग कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता स्वतंत्रता समुदाय की नजर इस मामले पर टिकी है, और यदि स्थिति नहीं सुधरी तो यह मुद्दा द्विपक्षीय कूटनीतिक दबाव का रूप ले सकता है।