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पीओके में पत्रकार अहमद फरहाद की रिहाई की मांग, फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने पाकिस्तान को घेरा

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पीओके में पत्रकार अहमद फरहाद की रिहाई की मांग, फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने पाकिस्तान को घेरा

सारांश

पीओके में पत्रकार अहमद फरहाद की रिहाई की माँग, पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव

मुख्य बातें

आयरलैंड स्थित फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने पाकिस्तान से पत्रकार अहमद फरहाद की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की माँग की।
फरहाद को 20 जून को पीओके के बाग शहर में बिना औपचारिक गिरफ्तारी वारंट के हिरासत में लिया गया।
वे रावलाकोट में जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के विरोध प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करके लौट रहे थे।
वर्ष 2024 में भी फरहाद का अपहरण हुआ था, जो बाद में गिरफ्तारी में बदल गया था।
संगठन ने इंटरनेट बंदी और आवाजाही प्रतिबंधों को स्वतंत्र रिपोर्टिंग में बाधा बताया।
कथित तौर पर जेएएसी विरोध के दौरान हजारों प्रदर्शनकारियों को जन व्यवस्था अध्यादेश की धारा 3 के तहत गिरफ्तार किया गया।

आयरलैंड स्थित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने पाकिस्तान सरकार से पत्रकार एवं मानवाधिकार रक्षक अहमद फरहाद को तत्काल और बिना शर्त रिहा करने की माँग की है। संगठन का आरोप है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में अपनी वैध पत्रकारिता और मानवाधिकार गतिविधियों के कारण फरहाद को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। संगठन ने उन पर लगाए गए सभी आरोप वापस लेने की भी माँग की है।

हिरासत की परिस्थितियाँ

फ्रंट लाइन डिफेंडर्स के अनुसार, पाकिस्तानी पुलिस ने 20 जून को पीओके के बाग शहर में फरहाद को उस समय हिरासत में लिया, जब वे रावलाकोट में जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के विरोध प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करके अपने घर लौट रहे थे। संगठन का कहना है कि तब से उन्हें बिना किसी कानूनी आधार या औपचारिक गिरफ्तारी वारंट के बाग पुलिस थाने में रखा गया है।

संगठन ने बताया कि जेएएसी के विरोध आंदोलन की कवरेज के दौरान पाकिस्तानी अधिकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगे। कथित तौर पर हजारों प्रदर्शनकारियों को जन व्यवस्था बनाए रखने संबंधी अध्यादेश की धारा 3 के तहत गिरफ्तार किया गया, जो न्यायिक समीक्षा की सीमित व्यवस्था के साथ एहतियाती हिरासत की अनुमति देती है।

फरहाद पर पहले भी हुए हमले

फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने रेखांकित किया कि यह फरहाद के उत्पीड़न का पहला मामला नहीं है। संगठन के अनुसार, वर्ष 2024 में उनका पहले अपहरण किया गया, जो बाद में औपचारिक गिरफ्तारी में बदल गया। इसके अतिरिक्त, राज्य के अधिकारियों द्वारा उन्हें अपराधी के रूप में पेश करने और सार्वजनिक रूप से बदनाम करने की कोशिश भी की गई।

संगठन ने कहा कि फरहाद पीओके में सामाजिक न्याय, मानवाधिकार उल्लंघनों और शांतिपूर्ण जन आंदोलनों के दमन से जुड़े मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते रहे हैं। उनके इसी कार्य के कारण उन्हें बार-बार हिंसक प्रतिशोध का सामना करना पड़ा है।

व्यापक दमन का पैटर्न

फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने पीओके में जारी दमन को कोई अलग-थलग घटना मानने से इनकार किया। संगठन के अनुसार, यह उन लोगों के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न के व्यापक पैटर्न का हिस्सा है जो अधिकारियों के खिलाफ आवाज उठाते हैं और मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेही की माँग करते हैं।

संगठन ने यह भी कहा कि इंटरनेट बंदी और क्षेत्र में आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंधों ने स्वतंत्र रिपोर्टिंग और मानवाधिकार उल्लंघनों की वास्तविक स्थिति की जानकारी के प्रवाह को बाधित किया है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में असहमति के स्वर को व्यवस्थित रूप से दबाने का दीर्घकालिक रिकॉर्ड रहा है।

अंतरराष्ट्रीय दबाव और आगे की राह

फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने चेताया कि अहमद फरहाद जैसे पत्रकार विशेष रूप से असुरक्षित हैं, क्योंकि वे राज्य-प्रायोजित दुष्प्रचार को चुनौती देते हैं और जमीनी स्तर से स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करते हैं। संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से फरहाद की हिरासत के दौरान उनकी शारीरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी माँग की है।

यह माँग ऐसे समय में आई है जब पीओके में जेएएसी के नेतृत्व में अधिकार आंदोलन तेज हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस क्षेत्र में प्रेस स्वतंत्रता की स्थिति को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

गिरफ्तारी और बदनामी के जरिये चुप कराया जाता है। इंटरनेट बंदी और आवाजाही प्रतिबंधों के साथ यह हिरासत एक सूचना-रोधी घेरा बनाती है, जिसमें उल्लंघनों की स्वतंत्र पुष्टि लगभग असंभव हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय माँगें तब तक प्रतीकात्मक रहती हैं जब तक कि उन्हें ठोस राजनयिक दबाव का समर्थन न मिले — और पाकिस्तान का इतिहास बताता है कि बिना कीमत के ऐसी माँगें अनसुनी रह जाती हैं।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमद फरहाद कौन हैं और उन्हें क्यों हिरासत में लिया गया?
अहमद फरहाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में सक्रिय एक पत्रकार और मानवाधिकार रक्षक हैं। फ्रंट लाइन डिफेंडर्स के अनुसार, उन्हें 20 जून को रावलाकोट में जेएएसी के विरोध प्रदर्शन की रिपोर्टिंग के बाद बाग में बिना वारंट हिरासत में लिया गया।
फ्रंट लाइन डिफेंडर्स क्या संगठन है?
फ्रंट लाइन डिफेंडर्स आयरलैंड की राजधानी डबलिन स्थित एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन है, जो जोखिम में पड़े मानवाधिकार रक्षकों की सुरक्षा के लिए कार्य करता है। यह संगठन दुनिया भर में पत्रकारों और कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न के मामलों को दस्तावेजीकृत करता है।
पीओके में जेएएसी का विरोध प्रदर्शन किस बात को लेकर था?
जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) पीओके में अधिकार और न्याय के लिए शांतिपूर्ण जन आंदोलन चला रही है। रिपोर्टों के अनुसार, इस आंदोलन के दौरान पाकिस्तानी अधिकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगे और कथित तौर पर हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
क्या पहले भी अहमद फरहाद को निशाना बनाया गया था?
हाँ, फ्रंट लाइन डिफेंडर्स के अनुसार वर्ष 2024 में फरहाद का पहले अपहरण किया गया, जो बाद में औपचारिक गिरफ्तारी में बदल गया। इसके अलावा, राज्य के अधिकारियों द्वारा उन्हें अपराधी के रूप में पेश करने और बदनाम करने की भी कोशिश की गई।
पीओके में प्रेस स्वतंत्रता की स्थिति कैसी है?
फ्रंट लाइन डिफेंडर्स के अनुसार पीओके में इंटरनेट बंदी और आवाजाही प्रतिबंधों के कारण स्वतंत्र रिपोर्टिंग बाधित है। संगठन का कहना है कि यह क्षेत्र में उन लोगों के खिलाफ व्यापक दमन के पैटर्न का हिस्सा है जो अधिकारियों की आलोचना करते हैं या मानवाधिकार उल्लंघनों की रिपोर्टिंग करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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