पाकिस्तान का दर्द: कश्मीरी नेता आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा पर प्रतिक्रिया
सारांश
Key Takeaways
- आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा, पाकिस्तान की तीखी प्रतिक्रिया।
- पाकिस्तान ने मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
- इस मामले से भारत-पाक रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर ध्यान देने की आवश्यकता।
नई दिल्ली, 25 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली की एक अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी नेता और प्रतिबंधित संगठन 'दुख्तरान-ए-मिल्लत' की प्रमुख आसिया अंद्राबी को यूएपीए मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने अंद्राबी को इस बात का दोषी पाया है कि उन्होंने प्रतिबंधित संगठन का नेतृत्व किया और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रची। इस फैसले पर पाकिस्तान की कड़ी प्रतिक्रिया आई है, जिसमें सरकार ने इस न्यायिक निर्णय की निंदा की है, जो भारत के आंतरिक मामलों में निरंतर हस्तक्षेप को दर्शाता है।
दिल्ली की अदालत ने आसिया अंद्राबी और उनकी दो सहयोगियों, सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को 30-30 साल की सजा सुनाई है। पाकिस्तान ने इस सजा की आलोचना की है और एक बार फिर से जम्मू और कश्मीर में मानवाधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान देने की मांग की है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "पाकिस्तान, दिल्ली की एक अदालत द्वारा कश्मीर की एक प्रमुख नेता आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा और उनकी दो सहयोगियों को कठोर कानून के तहत दी गई 30 साल की सजा को पूरी तरह से खारिज करता है। यह फैसला इंसाफ की एक बड़ी गलती है और जम्मू और कश्मीर में बुनियादी अधिकारों के निरंतर दमन को दर्शाता है।"
पाकिस्तान शुरू से ही भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने की कोशिश कर रहा है। इस बार भी विदेश मंत्रालय की टिप्पणी इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान अपनी गिरती अर्थव्यवस्था को संभाल नहीं पा रहा, जबकि उसका ध्यान भारत की गतिविधियों पर है।
विदेश मंत्रालय ने आगे लिखा, "पाकिस्तान इस फैसले को राजनीतिक रूप से प्रेरित मुकदमों का एक हिस्सा मानता है, जिसका उद्देश्य अलग राय रखने वालों की आवाजों को दबाना है। यह सजा न्यायिक आजादी और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों की जिम्मेदारियों के पालन को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न करती है।"
पाकिस्तान का कहना है कि आसिया अंद्राबी लंबे समय से कश्मीर मुद्दे की मुखर समर्थक रही हैं। उनकी सजा जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक प्रतिक्रिया और नागरिकों की स्वतंत्रता में कमी को दर्शाती है। पाकिस्तान मानता है कि इस प्रकार की कार्यवाहियां तनाव को बढ़ाती हैं और दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता की उम्मीदों को कमजोर करती हैं।
ईरान के खिलाफ जारी हमलों पर चुप्पी साधने वाले पाकिस्तान का मानना है कि भारत में कानूनी तौर पर सिद्ध दोषी को सजा देने से पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता को हानि पहुँचती है।