क्या आसिया अंद्राबी समेत तीन दोषियों की सजा पर सुनवाई टली?
सारांश
Key Takeaways
- आसिया अंद्राबी और उनकी सहयोगियों की सजा पर सुनवाई टली।
- अगली सुनवाई 2 फरवरी को होगी।
- आसिया अंद्राबी को यूएपीए के तहत दोषी ठहराया गया है।
- दुख्तरान-ए-मिल्लत संगठन का उद्देश्य अलगाववादी विचार फैलाना था।
- पुलिस ने इस संगठन से जुड़े अन्य मामलों की भी जांच की है।
नई दिल्ली, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कश्मीरी अलगाववादी नेता और प्रतिबंधित संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत (डीईएम) की प्रमुख आसिया अंद्राबी सहित दो अन्य दोषियों की सजा पर दिल्ली की एनआईए कोर्ट में शनिवार को सुनवाई को टाल दिया गया। इस मामले में अब 2 फरवरी को अगली सुनवाई होगी।
एनआईए कोर्ट ने आसिया अंद्राबी को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम- यूएपीए के तहत दोषी करार दिया है। अदालत ने उनके साथ उनकी दो सहयोगियों सोफी फहमिदा और नाहिदा नसरीन को भी दोषी ठहराया है। कोर्ट ने तीनों को यूएपीए की धारा 18 (आतंकी साजिश) और धारा 38 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता हासिल करने का अपराध) के तहत दोषी माना है।
एनआईए ने आसिया अंद्राबी पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आतंकी संगठन को संचालित करने और आतंकवादी गतिविधियों के लिए साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपी अलगाववादी एजेंडे को आगे बढ़ाने और आतंकी नेटवर्क को समर्थन देने में संलिप्त थे।
गौरतलब है कि साल 2018 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने आसिया अंद्राबी को इस मामले में गिरफ्तार किया था। वह कश्मीर की पहली महिला अलगाववादी नेता मानी जाती है और उसने 1987 में दुख्तरान-ए-मिल्लत नाम का संगठन बनाया था। यह संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के महिला विंग के तौर पर काम करता था। इसका मकसद कश्मीर में अलगाववादी विचार फैलाना और महिलाओं को इसमें सक्रिय करना था। बाद में भारत सरकार ने इसे प्रतिबंधित कर दिया। बताया जाता है कि पाकिस्तान का कुख्यात आतंकी हाफिज सईद भी आसिया अंद्राबी को अपनी मुंहबोली बहन मानता है।
इससे पहले, एनआईए कोर्ट ने बुधवार को कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी और उनकी दो सहयोगियों को दोषी ठहराया था। एनआईए की जांच में यह सामने आया था कि आसिया और उसके सहयोगी लोगों को अलगाववादी विचारों के लिए प्रेरित करते थे और संगठन के जरिए ऐसे काम करते थे, जो देश के खिलाफ थे।
आपको बताते चलें, पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट मामले में शामिल आरोपियों के तार भी दुख्तरान-ए-मिल्लत संगठन से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। मामले में गिरफ्तार शहजादा अख्तर पर महिलाओं के आतंकी ग्रुप 'दुख्तरान-ए-मिल्लत' को फिर से शुरू करने की कोशिश करने का आरोप है।