इमरान खान को बड़ा झटका: IHC ने ₹190 मिलियन पाउंड मामले में सजा सस्पेंशन याचिका खारिज की
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को सोमवार, 4 मई 2026 को बड़ा कानूनी झटका लगा, जब इस्लामाबाद हाई कोर्ट (IHC) ने 190 मिलियन पाउंड के भ्रष्टाचार मामले में उनकी सजा सस्पेंड करने की याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दंपति की मुख्य अपीलों पर सुनवाई पहले से ही निर्धारित है, इसलिए निलंबन आवेदन अप्रासंगिक है।
कोर्ट का फैसला और अगली सुनवाई
पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, चीफ जस्टिस सरदार मुहम्मद सरफराज डोगर की अगुवाई वाली दो सदस्यीय बेंच ने यह फैसला सुनाया। बेंच ने कहा कि सजा सस्पेंशन की माँग को अलग से सुनने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि केंद्रीय अपील पर 7 मई को सुनवाई पहले से तय है। इस प्रकार कोर्ट ने निलंबन आवेदन को अप्रासंगिक करार दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान अगस्त 2023 से तोशखाना मामले में जेल में हैं। इसके अतिरिक्त, 2025 में इस्लामाबाद की एक अकाउंटेबिलिटी कोर्ट ने अल-कादिर ट्रस्ट (190 मिलियन पाउंड) मामले में इमरान खान को 14 साल और बुशरा बीबी को 7 साल की सजा सुनाई थी। वे फिलहाल रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। इस दंपति ने IHC में इस सजा को चुनौती दी है।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि इमरान खान ने एक रियल एस्टेट फर्म से अवैध लाभ के बदले में ज़मीन हासिल की और ट्रस्ट बनाकर 50 अरब पाकिस्तानी रुपये को वैध बनाने की कोशिश की। इमरान खान अब तक जेल में 1,000 से अधिक दिन गुजार चुके हैं।
PTI की प्रतिक्रिया
यूएई के गल्फ टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, PTI के सेंट्रल इन्फॉर्मेशन सेक्रेटरी वकास अकरम ने आरोप लगाया कि इमरान खान को राजनीतिक रूप से परेशान किया जा रहा है, क्योंकि मौजूदा सरकार उनकी लोकप्रियता और स्वतंत्र रुख से भयभीत होकर उन्हें हाशिये पर धकेलना चाहती है। अकरम ने यह भी दावा किया कि इमरान खान और बुशरा बीबी के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है, उन्हें एकांत कारावास में रखा गया है, और परिवार, वकीलों तथा पार्टी नेतृत्व को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा। PTI इन दावों को बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन बताती है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठी आवाज़
इससे पहले मार्च 2026 की शुरुआत में, इमरान खान के बेटे कासिम खान ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के सत्र के दौरान अपने पिता की हिरासत को