केरल मर्सिडीज हिट-एंड-रन: जज से 3 घंटे पूछताछ, 4 पुलिसकर्मी निलंबित, कोच्चि पुलिस आयुक्त का तबादला
सारांश
मुख्य बातें
कोच्चि के चेरानल्लूर में हुए मर्सिडीज-बेंज हिट-एंड-रन हादसे में एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश से पुलिस ने बुधवार, 29 अक्टूबर 2026 को करीब तीन घंटे तक पूछताछ की। न्यायाधीश के 17 वर्षीय नाबालिग बेटे पर आरोप है कि उसने यह लग्जरी कार चलाते हुए 55 वर्षीय जयाबालकृष्णन के स्कूटर को टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। मामले ने केरल में न्यायिक जवाबदेही और पुलिस की कार्यप्रणाली दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे का घटनाक्रम
यह दुर्घटना 25 अक्टूबर 2026 को तड़के करीब 2:20 बजे कोच्चि के पास चेरानल्लूर की कंटेनर रोड पर हुई। जयाबालकृष्णन सड़क किनारे स्थित अपनी खाने-पीने की दुकान बंद करके घर लौट रहे थे, तभी एक मर्सिडीज-बेंज ने उनके स्कूटर को ज़ोरदार टक्कर मारी। उनकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। वे अपने पीछे अपनी पत्नी और तीन बच्चों को छोड़ गए हैं।
जाँच एजेंसियों के अनुसार, उस रात यह मर्सिडीज-बेंज जज के नाबालिग बेटे द्वारा कथित तौर पर चलाई जा रही थी। नाबालिग होने के कारण यह मामला कई कानूनी और नैतिक परतों वाला हो गया है।
जज से पूछताछ और न्यायिक समिति का रुख
न्यायाधीश को बुधवार दोपहर करीब 2:40 बजे अलुवा पुलिस क्लब बुलाया गया, जहाँ उनसे लगभग तीन घंटे तक पूछताछ की गई। पूछताछ के बाद उन्हें जाने दिया गया और गुरुवार को फिर से बुलाया गया है।
इस बीच, केरल उच्च न्यायालय की प्रशासनिक समिति ने न्यायाधीश के खिलाफ तत्काल कोई कार्रवाई न करने का निर्णय लिया। समिति पुलिस जांच की रिपोर्ट के आधार पर दो दिन बाद इस मामले पर विचार करेगी। गौरतलब है कि त्रिशूर जिले के प्रभारी उच्च न्यायालय के एक जज ने अतिरिक्त जिला जज को निलंबित करने की सिफारिश पहले ही की थी, परंतु प्रशासनिक समिति ने सभी तथ्य सामने आने तक प्रतीक्षा करने का मार्ग चुना।
पुलिस पर कार्रवाई: 4 अधिकारी निलंबित, आयुक्त का तबादला
इस प्रकरण में सबसे बड़ा प्रशासनिक हस्तक्षेप बुधवार को देखने को मिला। जिस स्थानीय पुलिस थाने में यह मामला दर्ज किया गया था, वहाँ तैनात चार पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। साथ ही, कोच्चि शहर के पुलिस आयुक्त का भी बुधवार को तबादला कर दिया गया। ये कार्रवाइयाँ यह संकेत देती हैं कि मामले को शुरुआत में जिस तरह संभाला गया, उस पर उच्च स्तरीय असंतोष था।
यह ऐसे समय में आया है जब केरल में हाल के महीनों में कई हाई-प्रोफाइल सड़क हादसों को लेकर पुलिस की तत्परता और जवाबदेही सवालों के घेरे में रही है।
आम जनता और पीड़ित परिवार पर असर
जयाबालकृष्णन एक साधारण दुकानदार थे, जो देर रात काम से लौट रहे थे। उनकी असमय और दर्दनाक मृत्यु ने उनके परिवार को बेसहारा छोड़ दिया है। सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल हुआ है और आम नागरिकों में यह धारणा बल पकड़ रही है कि प्रभावशाली लोगों के बच्चों को कानून से अलग तरीके से संरक्षण मिलता है।
आलोचकों का कहना है कि एक सक्रिय न्यायिक अधिकारी के नाबालिग बेटे का देर रात लग्जरी कार चलाना न केवल मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि कानून के रक्षकों के परिवारों में भी कानून की उपेक्षा हो सकती है।
आगे क्या होगा
पुलिस गुरुवार को जज से दोबारा पूछताछ करेगी, जिससे हादसे से जुड़ी परिस्थितियों पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है। केरल उच्च न्यायालय की प्रशासनिक समिति अगले दो दिनों में पुलिस की जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद न्यायाधीश के भविष्य पर निर्णय लेगी। इस मामले में न्यायपालिका और पुलिस दोनों की पारदर्शिता की परीक्षा होगी।