चेरानल्लूर कार दुर्घटना विवाद: कोच्चि पुलिस कमिश्नर कालीराज महेश हटाए गए, 4 पुलिसकर्मी निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
केरल सरकार ने 28 अक्टूबर 2026 को कोच्चि सिटी पुलिस कमिश्नर कालीराज महेश को उनके पद से हटा दिया। यह निर्णय चेरानल्लूर कार दुर्घटना मामले को संभालने के तरीके पर उठे गंभीर विवाद के बीच लिया गया, जिसमें एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश का 17 वर्षीय बेटा कथित तौर पर कार चला रहा था। आर. निशंतिनी को महेश की जगह नए कमिश्नर के रूप में नियुक्त किया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह घटना रविवार सुबह कोच्चि के चेरानल्लूर स्थित कंटेनर रोड पर घटी, जब एक मर्सिडीज-बेंज कार ने स्कूटर सवार 55 वर्षीय जयाबालकृष्णन को टक्कर मार दी। जयाबालकृष्णन सड़क किनारे खाने-पीने की एक छोटी दुकान चलाते थे। कार कथित तौर पर एक किशोर चला रहा था, जो एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश का पुत्र है। इस हादसे में जयाबालकृष्णन की मौत हो गई।
आलोचकों का कहना है कि पुलिस ने शुरुआत में मामले को हल्के में लिया। किशोर पर लापरवाही से वाहन चलाने और लापरवाही के कारण मौत से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज कर थाने से ही जमानत दे दी गई — एक ऐसा कदम जिसने बड़े पैमाने पर जन-आक्रोश को जन्म दिया।
सरकार की कार्रवाई
बढ़ते दबाव के बीच मंगलवार शाम सरकार ने चेरानल्लूर पुलिस स्टेशन के चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। निलंबित अधिकारियों में सर्कल इंस्पेक्टर के.एस. श्याम कुमार, स्टेशन हाउस ऑफिसर वी.एस. विश्वजीत, ग्रेड असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के.टी. मनोज और सीनियर सिविल पुलिस ऑफिसर अरुण जोशी शामिल हैं। यह निलंबन एडीजीपी पी. विजयन की प्रारंभिक जांच के बाद किया गया, जिन्होंने दुर्घटना स्थल का दौरा किया, पुलिस रिकॉर्ड खंगाले और पीड़ित परिवार से भी मुलाकात की।
गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने विधानसभा में स्पष्ट किया था कि दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। उनके इस आश्वासन के बाद ही महेश को हटाने और निलंबन की कार्रवाई तेज़ हुई।
जांच का दायरा बढ़ा
मामले को बाद में और मज़बूत किया गया और किशोर के पिता को भी आरोपी बनाया गया। मंगलवार रात पुलिस की एक टीम अलुवा स्थित न्यायाधीश के फ्लैट पर पहुँची और जांच-पड़ताल की। जांचकर्ताओं ने सीसीटीवी फुटेज खंगाली और साक्ष्य संकलित किए। इस पूरे मामले की जांच अब क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ है जब केरल में प्रभावशाली लोगों को पुलिस-संरक्षण मिलने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। इस मामले ने पुलिस-न्यायपालिका के गठजोड़ पर एक बार फिर सार्वजनिक बहस छेड़ दी है।
आम जनता और पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया
पुलिस की कथित लापरवाही के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए। जयाबालकृष्णन के परिजनों ने न्याय सुनिश्चित करने के लिए हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने का फैसला किया है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि पीड़ित साधारण नागरिक हो और आरोपी प्रभावशाली परिवार से, तो पुलिस की प्रतिक्रिया में अंतर आ जाता है।
आगे क्या होगा
क्राइम ब्रांच द्वारा जांच अपने हाथ में लिए जाने से मामले के निष्पक्ष परिणाम की उम्मीद जताई जा रही है। नई पुलिस कमिश्नर आर. निशंतिनी के सामने यह चुनौती है कि वे कोच्चि पुलिस की साख को पुनर्स्थापित करें। पीड़ित परिवार के हाई कोर्ट जाने के फैसले के बाद यह मामला न्यायिक निगरानी में भी आ सकता है।