पीयूष गोयल की लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलोइस से मुलाकात, भारत-ईएफटीए टीईपीए को नई गति
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 28 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में लिकटेंस्टीन के हेरिडिटरी प्रिंस एलोइस से मुलाकात की और भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के अंतर्गत सहयोग को और प्रगाढ़ बनाने पर व्यापक चर्चा की। इस द्विपक्षीय भेंट में निवेश के नए अवसरों और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के भारत के प्रयासों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
बैठक में क्या हुई चर्चा
गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई जानकारी में बताया कि उन्होंने प्रिंस एलोइस के साथ शिष्टाचार भेंट की और भारत में निवेश एवं व्यापार के नए द्वार खोलने की संभावनाओं पर विमर्श हुआ। उन्होंने कारोबारी माहौल को और अधिक निवेशक-अनुकूल बनाने के लिए चल रहे सुधारों की जानकारी भी साझा की।
गोयल के अनुसार, भारत-ईएफटीए टीईपीए के तहत 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता दोनों पक्षों की गहरी आर्थिक भागीदारी की महत्वाकांक्षा को स्पष्ट करती है। उनका मत है कि यह निवेश आर्थिक वृद्धि को गति देने के साथ-साथ उद्योग और कारोबार जगत के लिए बड़े अवसर भी सृजित करेगा।
निर्मला सीतारमण की भी हुई बैठक
इससे एक दिन पहले, 27 अक्टूबर को, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी लिकटेंस्टीन के हेरिडिटरी प्रिंस एलोइस और हेरिडिटरी प्रिंसेस सोफी से मुलाकात की। उस बैठक में उन्नत इंजीनियरिंग, अवसंरचना और नवाचार के क्षेत्रों में संभावित सहयोग पर चर्चा हुई।
दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि निवेश, व्यापार और आर्थिक सहयोग के अवसरों का विस्तार कर द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती दी जा सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब इसी महीने नई दिल्ली में इंडिया-ईएफटीए प्रॉस्पेरिटी समिट 2026 का आयोजन हो चुका है, जिसने इन संबंधों को नई रफ्तार दी है।
भारत-ईएफटीए टीईपीए की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) 1 अक्टूबर 2025 से लागू हुआ था। ईएफटीए में लिकटेंस्टीन, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और आइसलैंड — ये चार देश शामिल हैं।
इस समझौते के तहत ईएफटीए देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। अनुमानों के अनुसार इससे भारत में लगभग 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
आम जनता और उद्योग पर असर
यदि टीईपीए के अंतर्गत निवेश की यह प्रतिबद्धता पूरी होती है, तो इंजीनियरिंग, फार्मा, सोलर ऊर्जा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में कुशल श्रमशक्ति की माँग बढ़ने की संभावना है। लिकटेंस्टीन की वित्तीय सेवाओं और उन्नत विनिर्माण में विशेषज्ञता भारत के आधुनिकीकरण लक्ष्यों से मेल खाती है।
भारत के लिए यह यात्रा मात्र एक कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं है — यह टीईपीए की जमीनी क्रियान्वयन प्रक्रिया को गति देने की दिशा में उठाया गया व्यावहारिक कदम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में दोनों पक्षों के बीच संयुक्त कार्यसमूहों के गठन की संभावना है।