भारत ईएफटीए टीईपीए को एक साल पूरा: पीयूष गोयल बोले — निर्यातकों के लिए खुले नए द्वार, $100 अरब निवेश का वादा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 1 अक्टूबर 2026 को भारत यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) की पहली वर्षगाँठ पर कहा कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों और व्यवसायों के लिए नए बाज़ार अवसरों का द्वार खोल रहा है। गोयल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के ज़रिए इस मील के पत्थर को रेखांकित किया और चार ईएफटीए देशों — स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन — के साथ भारत के गहरे होते आर्थिक संबंधों को ऐतिहासिक बताया।
निवेश और रोज़गार के बड़े वादे
गोयल के अनुसार, ईएफटीए देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में $100 अरब (लगभग ₹8.3 लाख करोड़) का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। इस निवेश से 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियाँ सृजित होने की उम्मीद है। मंत्री ने कहा कि ये निवेश वादे भारत के मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र दोनों को गति देंगे और दीर्घकालिक आर्थिक विकास की नींव रखेंगे।
टैरिफ कवरेज और बाज़ार पहुँच
गोयल ने बताया कि टीईपीए 92.2 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर बाज़ार पहुँच प्रदान करता है, जिसमें ईएफटीए देशों को भारत के 99.6 प्रतिशत निर्यात शामिल हैं। गैर कृषि उत्पादों के लिए पूर्ण कवरेज भी इस समझौते की विशेषता है। साथ ही, भारत ने डेयरी, सोया, कोयला और कुछ कृषि उत्पादों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते के दायरे से बाहर सुरक्षित रखा है — जो घरेलू उत्पादकों के हितों की रक्षा करता है।
शुरुआती प्रभाव: निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी
समझौते के ज़मीनी असर का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा, "टीईपीए लागू होने के बाद से मोटर कारों और अन्य मोटर गाड़ियों, हेवी वाटर और मोल्डिंग पैटर्न के भारत के निर्यात में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है। यह तो बस शुरुआत है।" यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि समझौते ने पहले ही व्यापार प्रवाह को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
व्यापक आर्थिक महत्व
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक व्यापार साझेदारी को विविध बनाने की दिशा में तेज़ी से काम कर रहा है। ईएफटीए के साथ यह समझौता न केवल यूरोपीय बाज़ारों में भारतीय उत्पादों की पहुँच सुगम बनाता है, बल्कि उच्च तकनीक और वित्तीय सेवाओं में दीर्घकालिक सहयोग का मार्ग भी प्रशस्त करता है। मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि यह समझौता विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता को मज़बूत कर रहा है और भारत ईएफटीए ब्लॉक के बीच आपसी विकास और समृद्धि को बढ़ावा दे रहा है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि टीईपीए की असली परीक्षा अगले कुछ वर्षों में होगी, जब निवेश वादे ज़मीनी रोज़गार में तब्दील होंगे। भारत की नीति निर्माण प्रक्रिया में ऐसे समझौतों की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि घरेलू उद्योग नई बाज़ार पहुँच का कितनी कुशलता से उपयोग कर पाते हैं। आने वाले महीनों में दोनों पक्षों के बीच क्षेत्र विशेष सहयोग की नई रूपरेखा तैयार होने की संभावना है।