1 अक्टूबर 2026
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भारत ईएफटीए टीईपीए को एक साल पूरा: पीयूष गोयल बोले — निर्यातकों के लिए खुले नए द्वार, $100 अरब निवेश का वादा

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भारत ईएफटीए टीईपीए को एक साल पूरा: पीयूष गोयल बोले — निर्यातकों के लिए खुले नए द्वार, $100 अरब निवेश का वादा

सारांश

भारत ईएफटीए टीईपीए के एक साल पूरे होने पर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि मोटर वाहन, हेवी वाटर और मोल्डिंग पैटर्न के निर्यात में पहले से ही उछाल आ चुका है। $100 अरब के निवेश वादे और 10 लाख नौकरियों के लक्ष्य के साथ यह समझौता भारत की व्यापार विविधीकरण रणनीति का अहम स्तंभ बनता जा रहा है।

मुख्य बातें

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 1 अक्टूबर 2026 को भारत ईएफटीए टीईपीए की पहली वर्षगाँठ पर निर्यातकों के लिए नए अवसर खुलने की बात कही।
ईएफटीए देशों ( स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन ) ने अगले 15 वर्षों में $100 अरब निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियाँ सृजित करने का वादा किया है।
टीईपीए 92.2% टैरिफ लाइनों पर बाज़ार पहुँच देता है; ईएफटीए को भारत के 99.6% निर्यात को कवर करता है।
मोटर कारों, हेवी वाटर और मोल्डिंग पैटर्न के निर्यात में पहले साल में ही उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई।
भारत ने डेयरी, सोया, कोयला और कुछ कृषि उत्पादों को समझौते की शर्तों से बाहर सुरक्षित रखा है।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 1 अक्टूबर 2026 को भारत यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) की पहली वर्षगाँठ पर कहा कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों और व्यवसायों के लिए नए बाज़ार अवसरों का द्वार खोल रहा है। गोयल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के ज़रिए इस मील के पत्थर को रेखांकित किया और चार ईएफटीए देशों — स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन — के साथ भारत के गहरे होते आर्थिक संबंधों को ऐतिहासिक बताया।

निवेश और रोज़गार के बड़े वादे

गोयल के अनुसार, ईएफटीए देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में $100 अरब (लगभग ₹8.3 लाख करोड़) का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। इस निवेश से 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियाँ सृजित होने की उम्मीद है। मंत्री ने कहा कि ये निवेश वादे भारत के मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र दोनों को गति देंगे और दीर्घकालिक आर्थिक विकास की नींव रखेंगे।

टैरिफ कवरेज और बाज़ार पहुँच

गोयल ने बताया कि टीईपीए 92.2 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर बाज़ार पहुँच प्रदान करता है, जिसमें ईएफटीए देशों को भारत के 99.6 प्रतिशत निर्यात शामिल हैं। गैर कृषि उत्पादों के लिए पूर्ण कवरेज भी इस समझौते की विशेषता है। साथ ही, भारत ने डेयरी, सोया, कोयला और कुछ कृषि उत्पादों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते के दायरे से बाहर सुरक्षित रखा है — जो घरेलू उत्पादकों के हितों की रक्षा करता है।

शुरुआती प्रभाव: निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी

समझौते के ज़मीनी असर का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा, "टीईपीए लागू होने के बाद से मोटर कारों और अन्य मोटर गाड़ियों, हेवी वाटर और मोल्डिंग पैटर्न के भारत के निर्यात में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है। यह तो बस शुरुआत है।" यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि समझौते ने पहले ही व्यापार प्रवाह को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

व्यापक आर्थिक महत्व

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक व्यापार साझेदारी को विविध बनाने की दिशा में तेज़ी से काम कर रहा है। ईएफटीए के साथ यह समझौता न केवल यूरोपीय बाज़ारों में भारतीय उत्पादों की पहुँच सुगम बनाता है, बल्कि उच्च तकनीक और वित्तीय सेवाओं में दीर्घकालिक सहयोग का मार्ग भी प्रशस्त करता है। मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि यह समझौता विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता को मज़बूत कर रहा है और भारत ईएफटीए ब्लॉक के बीच आपसी विकास और समृद्धि को बढ़ावा दे रहा है।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि टीईपीए की असली परीक्षा अगले कुछ वर्षों में होगी, जब निवेश वादे ज़मीनी रोज़गार में तब्दील होंगे। भारत की नीति निर्माण प्रक्रिया में ऐसे समझौतों की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि घरेलू उद्योग नई बाज़ार पहुँच का कितनी कुशलता से उपयोग कर पाते हैं। आने वाले महीनों में दोनों पक्षों के बीच क्षेत्र विशेष सहयोग की नई रूपरेखा तैयार होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन $100 अरब के निवेश वादे और 10 लाख नौकरियों का लक्ष्य 15 वर्षों की लंबी समयसीमा में फैला है — यानी जवाबदेही की परख पीढ़ी भर बाद होगी। भारत के पिछले बड़े व्यापार समझौतों का इतिहास बताता है कि घोषणाओं और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई अक्सर चौड़ी रहती है। मोटर वाहन और हेवी वाटर जैसे सेक्टरों में शुरुआती निर्यात उछाल स्वागतयोग्य है, पर यह देखना होगा कि क्या यह रुझान सेवा क्षेत्र और एमएसएमई तक पहुँचता है। बिना पारदर्शी निवेश ट्रैकिंग तंत्र के, ये वादे महत्वाकांक्षी इरादों से आगे नहीं बढ़ सकते।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ईएफटीए टीईपीए क्या है?
भारत ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के चार देशों — स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन — के बीच हुआ एक द्विपक्षीय व्यापार करार है। यह 92.2% टैरिफ लाइनों पर बाज़ार पहुँच देता है और ईएफटीए को भारत के 99.6% निर्यात को कवर करता है।
ईएफटीए देशों ने भारत में कितने निवेश का वादा किया है?
ईएफटीए देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में $100 अरब (लगभग ₹8.3 लाख करोड़) का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। इस निवेश से 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियाँ सृजित होने की उम्मीद है।
टीईपीए लागू होने के बाद किन क्षेत्रों में निर्यात बढ़ा है?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, टीईपीए लागू होने के बाद मोटर कारों और अन्य मोटर गाड़ियों, हेवी वाटर और मोल्डिंग पैटर्न के निर्यात में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है। मंत्री ने इसे 'बस शुरुआत' बताया।
क्या भारत ने कोई संवेदनशील क्षेत्र इस समझौते से बाहर रखा है?
हाँ, भारत ने डेयरी, सोया, कोयला और कुछ कृषि उत्पादों को टीईपीए की शर्तों से बाहर सुरक्षित रखा है। यह कदम घरेलू उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है।
टीईपीए भारतीय निर्यातकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
टीईपीए भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाज़ारों में कम शुल्क पर प्रवेश का अवसर देता है और गैर कृषि उत्पादों के लिए पूर्ण टैरिफ कवरेज सुनिश्चित करता है। यह मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र दोनों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को मज़बूत करने का माध्यम है।
राष्ट्र प्रेस
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