भारत-EU FTA से 2 अरब लोगों का बाज़ार एक छत के नीचे, पीयूष गोयल बोले — यह 25 साल की मेहनत का नतीजा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 4 सितंबर को मुंबई में आयोजित भारत-बेल्जियम उच्चस्तरीय बैठक में कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दोनों महाद्वीपों के किसानों, मछुआरों, एमएसएमई, स्टार्टअप, महिला उद्यमियों और सेवा प्रदाताओं के लिए अभूतपूर्व अवसरों का द्वार खोलता है। उन्होंने बताया कि यह समझौता 2 अरब लोगों को एक साझा बाज़ार में जोड़ता है, जिसमें वैश्विक जीडीपी का एक-चौथाई, विश्व व्यापार का एक-तिहाई और 24 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की आर्थिक शक्ति समाहित है।
25 वर्षों की कूटनीतिक यात्रा का परिणाम
गोयल ने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस समझौते पर वार्ता पूरी होने से पहले करीब 25 वर्षों तक काम किया गया। उन्होंने बताया कि यूरोपीय संघ के सभी 27 सदस्य देश इस समझौते के पक्ष में हैं और जल्द से जल्द आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी कर इसे लागू करना चाहते हैं। उनके अनुसार, यूरोप के संदर्भ में किसी व्यापार समझौते पर इस तरह का सर्वसम्मत समर्थन मिलना दुर्लभ है। इसी प्रकार, भारत में भी समाज के सभी वर्गों ने इस FTA का पूरे मन से समर्थन किया है।
बेल्जियम के PM बार्ट डी वेवर का संदेश
इस अवसर पर उपस्थित बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने कहा कि यह समझौता व्यापारिक संबंधों को मजबूत करेगा और कंपनियों, युवा प्रतिभाओं तथा निवेश के लिए नए मार्ग खोलेगा। उन्होंने एंटवर्प-ब्रुग्स बंदरगाह को भारत और यूरोप के बीच एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक कड़ी बताया। डी वेवर ने कहा कि FTA के तहत 95 प्रतिशत से अधिक भारतीय और यूरोपीय वस्तुओं पर लागू शुल्क या तो समाप्त किए जाएँगे या उनमें कमी की जाएगी। हीरा, खाद्य प्रसंस्करण, औषधि, समुद्री सेवाएँ, हरित हाइड्रोजन और बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी इस बैठक में उपस्थित रहे।
भारत-बेल्जियम सहयोग के पाँच प्रमुख क्षेत्र
गोयल ने पाँच ऐसे क्षेत्र गिनाए जहाँ दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएँ एक-दूसरे की पूरक हैं। पहला — रत्न एवं आभूषण, जिसमें प्रयोगशाला में निर्मित हीरे भी शामिल हैं; एंटवर्प, मुंबई और सूरत जैसे हीरा केंद्रों के बीच प्रौद्योगिकी और प्रमाणन में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। दूसरा — सेमीकंडक्टर; बेल्जियम की विश्वस्तरीय माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक्स अनुसंधान क्षमता को भारत के कुशल कार्यबल से जोड़कर डिजाइन से विनिर्माण तक का पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की बात कही गई। तीसरा — हरित हाइड्रोजन; भारत का हरित हाइड्रोजन मिशन एंटवर्प-ब्रुग्स बंदरगाह की ईंधन आपूर्ति और हरित जहाजरानी के माध्यम से यूरोप की ऊर्जा ज़रूरतें पूरी कर सकता है। चौथा — रक्षा एवं उन्नत विनिर्माण; जॉन कॉकरिल के साथ MoU का उल्लेख करते हुए गोयल ने ड्रोन-रोधी प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, ब्रह्मोस और पिनाका मिसाइलों के पश्चिमी देशों को निर्यात की संभावनाएँ बताईं। पाँचवाँ — कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण; आलू प्रसंस्करण, शीत भंडारण और टिकाऊ कृषि-मूल्य श्रृंखला में संयुक्त अवसरों पर चर्चा हुई।
भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षा और तकनीकी छलाँग
गोयल ने बताया कि भारत वर्तमान में PPP के आधार पर 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था है और PPP आधार पर 20 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के GDP के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। 1.4 अरब भारतीयों का लक्ष्य है कि 2047 तक — जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा — अर्थव्यवस्था को 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाया जाए। पिछले एक दशक में EU के साथ भारत का व्यापार दोगुना होकर लगभग 140 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है।
तकनीकी मोर्चे पर गोयल ने बताया कि 'सेमीकॉन इंडिया 2.0' को 14 अरब अमेरिकी डॉलर के बजट के साथ लॉन्च किया गया है और यह मिशन सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कुल 70 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को आकर्षित करेगा। भारत का अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी क्षेत्र अभी 8.5 अरब अमेरिकी डॉलर का है और अगले आठ वर्षों में 44 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने की संभावना है। 'शांति अधिनियम' के तहत परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को 60 साल बाद निजी क्षेत्र के लिए खोला गया है, और अगले 20 वर्षों में 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने की योजना है।
एंटवर्प-ब्रुग्स: FTA का प्रवेश द्वार
गोयल ने एंटवर्प-ब्रुग्स बंदरगाह को यूरोप का दूसरा सबसे बड़ा समुद्री बंदरगाह बताते हुए कहा कि यह FTA के तहत होने वाले व्यापार का मुख्य प्रवेश द्वार बनेगा। एंटवर्प के अंतर्देशीय जलमार्ग, रेल और सड़क नेटवर्क को ब्रुग्स के गहरे पानी और ऑटोमोबाइल सुविधाओं के साथ जोड़कर भारतीय निर्यातकों को यूरोप के औद्योगिक व उपभोक्ता बाज़ारों तक पहुँचने का बेजोड़ मार्ग मिलेगा। अपने भाषण के अंत में गोयल ने हीरे के बनने की प्रक्रिया का रूपक इस्तेमाल करते हुए कहा कि दबाव और उथल-पुथल से भरी इस दुनिया में भारत और बेल्जियम मिलकर ऐसा कुछ बना सकते हैं जो हीरे की तरह — 'टिकाऊ, सुंदर और कीमती' — हो; न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए।