पीयूष गोयल का यूएई निवेशकों को न्योता: भारत-यूएई निवेश $100 अरब तक पहुंचाने का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 28 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में यूएई के शीर्ष निवेश और व्यापार अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें कीं और स्पष्ट किया कि भारत-यूएई व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) दोनों देशों के बीच व्यापार व निवेश को नई रफ्तार दे रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत में यूएई निवेशकों के लिए अंतरिक्ष, बंदरगाह, जहाज निर्माण, स्टार्टअप और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में असीमित संभावनाएं मौजूद हैं।
मुख्य बैठकें और चर्चाएं
गोयल ने सोमवार को अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) के प्रबंध निदेशक शेख हमेद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। बैठक में भारत-यूएई आर्थिक साझेदारी को तेज करने और CEPA के लाभों का अधिकतम उपयोग करने पर विस्तृत चर्चा हुई। गोयल ने बताया कि यह समझौता व्यापार बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाएं विकसित करने में निर्णायक भूमिका निभा रहा है।
इससे पहले उन्होंने यूएई के विदेश व्यापार मंत्री डॉ. थानी बिन अहमद अल जेयौदी से भी मुलाकात की, जिसमें CEPA के तहत हुई प्रगति और द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश साझेदारी को और मजबूत बनाने के नए अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया।
$100 अरब निवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
गोयल ने बताया कि सरकार का लक्ष्य भारत में यूएई के कुल निवेश को मौजूदा लगभग $25 अरब से बढ़ाकर $100 अरब तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यूएई की रुचि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र, स्टार्टअप इकोसिस्टम, बंदरगाह विकास, जहाज निर्माण उद्योग और भारतीय शेयर बाजार में निरंतर बढ़ रही है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक निवेशकों के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में उभर रहा है।
गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा, 'भारत और यूएई के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और दोनों देश इस साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।'
समुद्री क्षेत्र में सहयोग के छह प्रमुख क्षेत्र
मंत्री ने बताया कि भारत और यूएई ने समुद्री सहयोग के लिए छह प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है — जहाज स्वामित्व, आधुनिक बंदरगाह, जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत एवं रखरखाव, शिपब्रेकिंग और कंटेनर निर्माण। इन क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक समर्पित कार्य समूह गठित किया जाएगा, जिसमें भारतीय पक्ष का नेतृत्व पोत परिवहन मंत्रालय करेगा।
स्थानीय मुद्रा व्यापार और ऊर्जा सहयोग
गोयल ने जानकारी दी कि भारत-यूएई स्थानीय मुद्रा व्यापार पहले ही दोहरे अंकों के स्तर तक पहुंच चुका है और दोनों देश इसे और तेजी से विस्तार देने की दिशा में काम कर रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र में चल रही चर्चाएं भारत में यूएई निवेश बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।
गौरतलब है कि ये चर्चाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मई 2026 की यूएई यात्रा के दौरान हुए समझौतों की निरंतरता हैं। उस यात्रा में दोनों देशों ने कच्चे तेल भंडारण, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, LNG और LPG अवसंरचना विकास तथा दीर्घकालिक LPG आपूर्ति व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग की घोषणाएं की थीं।
आगे की राह
गोयल ने विश्वास जताया कि CEPA, बढ़ते निवेश, ऊर्जा सहयोग और नई आर्थिक पहलों के जरिए भारत-यूएई संबंध आने वाले वर्षों में और प्रगाढ़ होंगे। भारत की सुधार-आधारित नीतियों और तेज आर्थिक वृद्धि को देखते हुए, विशेषज्ञों का मानना है कि $100 अरब के निवेश लक्ष्य को हासिल करने के लिए ठोस क्रियान्वयन और नियामकीय पारदर्शिता अनिवार्य होगी।