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क्या भारत-यूएई 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचा पाएंगे?

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क्या भारत-यूएई 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचा पाएंगे?

सारांश

भारत और यूएई ने एक महत्वपूर्ण बैठक में द्विपक्षीय व्यापार को 2032 तक 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस कदम से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और व्यापार में वृद्धि की उम्मीद है। क्या यह लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा? जानें इस महत्वपूर्ण पहल के बारे में।

मुख्य बातें

2032 तक 200 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
एमएसएमई के सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
खाद्य सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत किया जाएगा।
अंतरिक्ष विज्ञान में सहयोग के नए पहल शुरू होंगे।

नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने सोमवार को भारत–यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 2032 तक दोगुना कर 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया। यह जानकारी यहां हुई बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दी गई।

दोनों नेताओं ने 2022 में व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) पर हस्ताक्षर के बाद से व्यापार और आर्थिक सहयोग में हुई मजबूत वृद्धि का स्वागत किया। बयान में कहा गया कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-यूएई द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

नेताओं ने सितंबर 2025 में आयोजित 13वीं उच्चस्तरीय निवेश टास्क फोर्स और दिसंबर 2025 में हुई 16वीं भारत-यूएई संयुक्त आयोग बैठक तथा 5वीं रणनीतिक वार्ता के परिणामों का समर्थन किया। उन्होंने दोनों देशों की सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयों को आपस में जोड़ने के लिए अपनी टीमों को दिशा-निर्देश दिए।

इस संदर्भ में ‘भारत मार्ट’, ‘वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर’ और ‘भारत–अफ्रीका सेतु’ जैसी प्रमुख पहलों के शीघ्र क्रियान्वयन का आह्वान किया गया, ताकि मध्य पूर्व, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरेशिया क्षेत्र में एमएसएमई उत्पादों को बढ़ावा दिया जा सके।

नेताओं ने 2024 में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय निवेश संधि से दोनों देशों में विभिन्न क्षेत्रों में निवेश प्रवाह मजबूत होने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने गुजरात के धोलेरा में विशेष निवेश क्षेत्र के विकास के लिए संभावित यूएई साझेदारी पर हुई चर्चाओं का भी स्वागत किया।

इस प्रस्तावित साझेदारी के तहत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, पायलट प्रशिक्षण स्कूल, मेंटेनेंस-रिपेयर-ओवरहॉल (एमआरओ) सुविधा, ग्रीनफील्ड बंदरगाह, स्मार्ट शहरी टाउनशिप, रेलवे कनेक्टिविटी और ऊर्जा अवसंरचना जैसे रणनीतिक ढांचे विकसित किए जाने की परिकल्पना की गई है।

पहले नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) की सफलता को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई के सॉवरेन वेल्थ फंड्स को 2026 में प्रस्तावित दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में भागीदारी पर विचार करने के लिए आमंत्रित किया।

दोनों नेताओं ने गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) में डीपी वर्ल्ड और फर्स्ट अबू धाबी बैंक (एफएबी) की शाखाओं की स्थापना का स्वागत किया, जिससे गिफ्ट सिटी एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र के रूप में उभर रही है। एफएबी की गिफ्ट सिटी शाखा भारतीय कंपनियों और निवेशकों को खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) तथा मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के बाजारों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी।

दोनों पक्षों ने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भारत-यूएई सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई और सतत आपूर्ति शृंखलाओं तथा दीर्घकालिक स्थिरता के लिए इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सतत कृषि को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुदृढ़ करने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी, नवाचार और ज्ञान आदान-प्रदान की भूमिका पर जोर दिया।

ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय साझेदारी की मजबूती पर संतोष व्यक्त करते हुए नेताओं ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा में यूएई के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और एडीएनओसी गैस के बीच 10 वर्षीय एलएनजी आपूर्ति समझौते के हस्ताक्षर का स्वागत किया, जिसके तहत 2028 से प्रति वर्ष 0.5 मिलियन टन एलएनजी की आपूर्ति होगी।

संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों पक्ष उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों में साझेदारी की संभावनाएं तलाशने पर सहमत हुए हैं, जिनमें बड़े परमाणु रिएक्टरों और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (एसएमआर) का विकास एवं तैनाती, उन्नत रिएक्टर प्रणालियों, परमाणु संयंत्र संचालन एवं रखरखाव तथा परमाणु सुरक्षा में सहयोग शामिल है।

नेताओं ने वित्तीय क्षेत्र में गहराते सहयोग की भी सराहना की और सीमा-पार भुगतान को तेज, सस्ता और अधिक प्रभावी बनाने के लिए राष्ट्रीय भुगतान प्लेटफॉर्म को आपस में जोड़ने पर काम करने का निर्देश दिया।

अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने पर भी सहमति बनी। इस संदर्भ में अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से वाणिज्यीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक संयुक्त पहल पर हुए समझ को सराहा गया। इस पहल का उद्देश्य एक एकीकृत अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना, संयुक्त भारत–यूएई मिशनों को सक्षम बनाना, वैश्विक वाणिज्यिक सेवाओं का विस्तार, उच्च-कौशल रोजगार और स्टार्टअप सृजन तथा सतत व्यावसायिक मॉडलों के जरिए द्विपक्षीय निवेश को मजबूत करना है।

दोनों नेताओं ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा नवाचार में, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय लिया। भारत में सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने में सहयोग के फैसले का स्वागत करते हुए उन्होंने देश में डेटा सेंटर स्थापित करने की संभावनाओं पर भी सहमति जताई।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वैश्विक बाजार में भी उनके प्रभाव को मजबूत करेगा। ऐसे में, यह एक सकारात्मक संकेत है कि दोनों देश एक-दूसरे के साथ मिलकर अपने व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और यूएई के बीच व्यापार का मौजूदा स्तर क्या है?
वर्तमान में भारत-यूएई द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
2032 तक व्यापार को बढ़ाने का लक्ष्य क्या है?
2032 तक भारत-यूएई द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
इस व्यापार बढ़ोतरी के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
दोनों देशों ने एमएसएमई को जोड़ने, वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर जैसी पहलों के कार्यान्वयन पर जोर दिया है।
भारत-यूएई साझेदारी का क्या महत्व है?
यह साझेदारी दोनों देशों के आर्थिक विकास और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने में मदद करेगी।
क्या इस साझेदारी से खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ेगा?
हां, दोनों देश खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
राष्ट्र प्रेस
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