बशीर मौत मामला: केरल हाई कोर्ट ने IAS अधिकारी वेंकिटरमन के ट्रायल पर लगाई रोक, 27 अक्टूबर को अगली सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
केरल हाई कोर्ट ने 1 अक्टूबर 2026 को पत्रकार केएम बशीर की 2019 में सड़क हादसे में हुई मौत के मामले में वरिष्ठ IAS अधिकारी श्रीराम वेंकिटरमन के खिलाफ तिरुवनंतपुरम की अतिरिक्त सत्र अदालत में चल रहे ट्रायल की आगे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी। यह आदेश जस्टिस जी. गिरीश ने बशीर की पत्नी जसीला की याचिका पर पारित किया, जिसमें राज्य सरकार द्वारा विशेष लोक अभियोजक (SPP) नियुक्त न करने के निर्णय को चुनौती दी गई है।
मुख्य घटनाक्रम
केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से इस फैसले से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने को कहा है। साथ ही, अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया गया है कि वह सरकार से आवश्यक निर्देश प्राप्त करे। इस मामले पर अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
गौरतलब है कि बशीर की मौत के करीब सात वर्ष बाद 1 अगस्त 2026 को इस मामले का ट्रायल शुरू हो सका था। ट्रायल फिलहाल तिरुवनंतपुरम की अतिरिक्त सत्र अदालत-IV में चल रहा है।
हादसे की पृष्ठभूमि
पत्रकार केएम बशीर की मौत अगस्त 2019 में तब हुई थी, जब तिरुवनंतपुरम के म्यूजियम जंक्शन के पास उनकी मोटरसाइकिल को कथित तौर पर तेज रफ्तार से वेंकिटरमन द्वारा चलाई जा रही कार ने टक्कर मारी। वेंकिटरमन पर तेज व लापरवाही से वाहन चलाने, लापरवाही से मौत का कारण बनने और नशे की हालत में वाहन चलाने समेत कई गंभीर आरोप हैं।
सरकार का यूटर्न और जसीला की याचिका
जसीला ने पहले मामले की सुनवाई के लिए विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति और ट्रायल को दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने की दोहरी माँग हाई कोर्ट में रखी थी। बाद में उन्होंने अपनी याचिका को केवल विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति की माँग तक सीमित कर लिया।
अगस्त 2026 में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की उस दलील को रिकॉर्ड में लिया था, जिसमें कहा गया था कि सरकार ने सैद्धांतिक रूप से अधिवक्ता ए. संतोष कुमार को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का निर्णय कर लिया है। तब अदालत ने औपचारिक आदेश के लिए एक महीने का समय देते हुए ट्रायल स्थगित किया था। किंतु 17 सितंबर 2026 को सरकार ने एक आदेश जारी कर विशेष लोक अभियोजक की माँग को खारिज कर दिया।
जसीला की याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाई कोर्ट को संतोष कुमार की नियुक्ति का आश्वासन देने के बाद सरकार ने अपना रुख पलट लिया। याचिका में कहा गया, 'ऐसा लगता है कि सरकार ने विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति की माँग खारिज करके अपने रुख से यूटर्न ले लिया है।' जसीला ने सरकार के 17 सितंबर के आदेश को रद्द करने और गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को संतोष कुमार को SPP नियुक्त करने का निर्देश देने की माँग की है।
ट्रायल ट्रांसफर का मुद्दा
इससे पहले जसीला ने ट्रायल को अन्य अदालत में स्थानांतरित करने की माँग भी की थी। हाई कोर्ट ने उनके द्वारा यह माँग वापस लेने के बाद ट्रायल के स्थानांतरण को बरकरार रखा था। अब यह मामला तिरुवनंतपुरम की अतिरिक्त सत्र अदालत-IV में ही चल रहा है।
आगे क्या होगा
हाई कोर्ट के ताजा आदेश के अनुसार ट्रायल की सभी आगामी कार्यवाही फिलहाल निलंबित रहेगी। 27 अक्टूबर 2026 को होने वाली सुनवाई में सरकार के रिकॉर्ड और अभियोजन पक्ष के निर्देश सामने आने के बाद न्यायालय आगे की दिशा तय करेगा। न्याय पाने के लिए सात साल से अधिक समय से संघर्ष कर रहीं जसीला के लिए यह सुनवाई निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।