1 अक्टूबर 2026
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बशीर मौत मामला: केरल हाई कोर्ट ने IAS अधिकारी वेंकिटरमन के ट्रायल पर लगाई रोक, 27 अक्टूबर को अगली सुनवाई

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बशीर मौत मामला: केरल हाई कोर्ट ने IAS अधिकारी वेंकिटरमन के ट्रायल पर लगाई रोक, 27 अक्टूबर को अगली सुनवाई

सारांश

पत्रकार बशीर की मौत के सात साल बाद शुरू हुआ ट्रायल एक बार फिर थम गया। केरल हाई कोर्ट ने IAS अधिकारी वेंकिटरमन के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगाई — वजह है सरकार का वह यूटर्न, जिसमें उसने SPP नियुक्त करने का अपना ही आश्वासन पलट दिया।

मुख्य बातें

केरल हाई कोर्ट ने 1 अक्टूबर 2026 को IAS अधिकारी श्रीराम वेंकिटरमन के खिलाफ पत्रकार केएम बशीर मौत मामले के ट्रायल पर अंतरिम रोक लगाई।
गिरीश ने यह आदेश बशीर की पत्नी जसीला की याचिका पर पारित किया।
राज्य सरकार ने 17 सितंबर 2026 के आदेश में विशेष लोक अभियोजक ( SPP ) की नियुक्ति की माँग खारिज कर दी — जबकि अगस्त में अदालत को नियुक्ति का आश्वासन दिया था।
मामले का ट्रायल बशीर की मौत के करीब सात साल बाद 1 अगस्त 2026 को शुरू हुआ था; अब 27 अक्टूबर 2026 को अगली सुनवाई होगी।
वेंकिटरमन पर नशे में तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने और लापरवाही से मौत का कारण बनने समेत कई आरोप हैं।

केरल हाई कोर्ट ने 1 अक्टूबर 2026 को पत्रकार केएम बशीर की 2019 में सड़क हादसे में हुई मौत के मामले में वरिष्ठ IAS अधिकारी श्रीराम वेंकिटरमन के खिलाफ तिरुवनंतपुरम की अतिरिक्त सत्र अदालत में चल रहे ट्रायल की आगे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी। यह आदेश जस्टिस जी. गिरीश ने बशीर की पत्नी जसीला की याचिका पर पारित किया, जिसमें राज्य सरकार द्वारा विशेष लोक अभियोजक (SPP) नियुक्त न करने के निर्णय को चुनौती दी गई है।

मुख्य घटनाक्रम

केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से इस फैसले से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने को कहा है। साथ ही, अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया गया है कि वह सरकार से आवश्यक निर्देश प्राप्त करे। इस मामले पर अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।

गौरतलब है कि बशीर की मौत के करीब सात वर्ष बाद 1 अगस्त 2026 को इस मामले का ट्रायल शुरू हो सका था। ट्रायल फिलहाल तिरुवनंतपुरम की अतिरिक्त सत्र अदालत-IV में चल रहा है।

हादसे की पृष्ठभूमि

पत्रकार केएम बशीर की मौत अगस्त 2019 में तब हुई थी, जब तिरुवनंतपुरम के म्यूजियम जंक्शन के पास उनकी मोटरसाइकिल को कथित तौर पर तेज रफ्तार से वेंकिटरमन द्वारा चलाई जा रही कार ने टक्कर मारी। वेंकिटरमन पर तेज व लापरवाही से वाहन चलाने, लापरवाही से मौत का कारण बनने और नशे की हालत में वाहन चलाने समेत कई गंभीर आरोप हैं।

सरकार का यूटर्न और जसीला की याचिका

जसीला ने पहले मामले की सुनवाई के लिए विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति और ट्रायल को दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने की दोहरी माँग हाई कोर्ट में रखी थी। बाद में उन्होंने अपनी याचिका को केवल विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति की माँग तक सीमित कर लिया।

अगस्त 2026 में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की उस दलील को रिकॉर्ड में लिया था, जिसमें कहा गया था कि सरकार ने सैद्धांतिक रूप से अधिवक्ता ए. संतोष कुमार को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का निर्णय कर लिया है। तब अदालत ने औपचारिक आदेश के लिए एक महीने का समय देते हुए ट्रायल स्थगित किया था। किंतु 17 सितंबर 2026 को सरकार ने एक आदेश जारी कर विशेष लोक अभियोजक की माँग को खारिज कर दिया।

जसीला की याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाई कोर्ट को संतोष कुमार की नियुक्ति का आश्वासन देने के बाद सरकार ने अपना रुख पलट लिया। याचिका में कहा गया, 'ऐसा लगता है कि सरकार ने विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति की माँग खारिज करके अपने रुख से यूटर्न ले लिया है।' जसीला ने सरकार के 17 सितंबर के आदेश को रद्द करने और गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को संतोष कुमार को SPP नियुक्त करने का निर्देश देने की माँग की है।

ट्रायल ट्रांसफर का मुद्दा

इससे पहले जसीला ने ट्रायल को अन्य अदालत में स्थानांतरित करने की माँग भी की थी। हाई कोर्ट ने उनके द्वारा यह माँग वापस लेने के बाद ट्रायल के स्थानांतरण को बरकरार रखा था। अब यह मामला तिरुवनंतपुरम की अतिरिक्त सत्र अदालत-IV में ही चल रहा है।

आगे क्या होगा

हाई कोर्ट के ताजा आदेश के अनुसार ट्रायल की सभी आगामी कार्यवाही फिलहाल निलंबित रहेगी। 27 अक्टूबर 2026 को होने वाली सुनवाई में सरकार के रिकॉर्ड और अभियोजन पक्ष के निर्देश सामने आने के बाद न्यायालय आगे की दिशा तय करेगा। न्याय पाने के लिए सात साल से अधिक समय से संघर्ष कर रहीं जसीला के लिए यह सुनवाई निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें उसने हाई कोर्ट को SPP नियुक्ति का भरोसा देकर बाद में मना कर दिया, न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मौत के सात साल और ट्रायल की महज दो महीने की उम्र के बाद एक और स्थगन यह दर्शाता है कि संस्थागत देरी अपने आप में न्याय का क्षरण कर सकती है। अदालत का अगला कदम — क्या वह सरकार को SPP नियुक्त करने पर बाध्य करती है — इस बात की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल हाई कोर्ट ने वेंकिटरमन के ट्रायल पर रोक क्यों लगाई?
हाई कोर्ट ने यह रोक पत्रकार बशीर की पत्नी जसीला की उस याचिका पर लगाई, जिसमें राज्य सरकार द्वारा विशेष लोक अभियोजक (SPP) नियुक्त न करने के 17 सितंबर 2026 के फैसले को चुनौती दी गई है। अदालत ने सरकार से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने को कहा है और 27 अक्टूबर 2026 को अगली सुनवाई तय की है।
केएम बशीर मौत मामला क्या है?
पत्रकार केएम बशीर की अगस्त 2019 में तिरुवनंतपुरम के म्यूजियम जंक्शन के पास मौत हो गई थी, जब कथित तौर पर IAS अधिकारी श्रीराम वेंकिटरमन की तेज रफ्तार कार ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मारी। वेंकिटरमन पर नशे में वाहन चलाने, तेज व लापरवाह ड्राइविंग और लापरवाही से मौत का कारण बनने के आरोप हैं।
विशेष लोक अभियोजक (SPP) की नियुक्ति पर विवाद क्यों है?
अगस्त 2026 में राज्य सरकार ने हाई कोर्ट को बताया था कि उसने सैद्धांतिक रूप से अधिवक्ता ए. संतोष कुमार को SPP नियुक्त करने का फैसला किया है। लेकिन 17 सितंबर 2026 को सरकार ने आदेश जारी कर यह माँग खारिज कर दी। जसीला का आरोप है कि सरकार ने अदालत को दिए आश्वासन से यूटर्न लिया।
इस मामले का ट्रायल कब और कहाँ चल रहा है?
बशीर की मौत के करीब सात साल बाद 1 अगस्त 2026 को ट्रायल शुरू हुआ। यह तिरुवनंतपुरम की अतिरिक्त सत्र अदालत-IV में चल रहा है। हाई कोर्ट के ताजा आदेश से यह कार्यवाही 27 अक्टूबर 2026 तक निलंबित है।
जसीला की याचिका में क्या माँगें हैं?
जसीला ने सरकार के 17 सितंबर 2026 के आदेश को रद्द करने और गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को अधिवक्ता संतोष कुमार को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का निर्देश देने की माँग की है। उन्होंने ट्रायल ट्रांसफर की पूर्व माँग बाद में वापस ले ली थी।
राष्ट्र प्रेस
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