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धारवाड़ नाबालिग दलित मौत मामला: जांच में लापरवाही पर सीपीआई शिवयोगी लोहार सस्पेंड

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धारवाड़ नाबालिग दलित मौत मामला: जांच में लापरवाही पर सीपीआई शिवयोगी लोहार सस्पेंड

सारांश

धारवाड़ में एक नाबालिग दलित लड़की की मौत की जांच में कथित लापरवाही और समझौता कराने की कोशिश के आरोप में सीपीआई शिवयोगी लोहार निलंबित। पॉक्सो मामले में दो आरोपी गिरफ्तार, हिंदू संगठनों के दबाव के बाद पुलिस अधीक्षक ने की कार्रवाई।

मुख्य बातें

सीपीआई शिवयोगी लोहार को 13 जून को धारवाड़ एसपी गुंजन आर्या ने जांच में लापरवाही के आरोप में निलंबित किया।
मामला धारवाड़ तालुक की एक नाबालिग दलित लड़की से जुड़ा है, जिसकी 9 मई को केएमसीआरआई में उपचार के दौरान मृत्यु हो गई।
पुलिस ने नईम बेग जोरमनावर (25 वर्ष) और सोहेल मुल्ला (22 वर्ष) को पॉक्सो अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया।
आरोपियों के मोबाइल फोन से कथित तौर पर तस्वीरें और अश्लील वीडियो बरामद हुए हैं।
बजरंग दल और वीएचपी समेत हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन कर सख्त कार्रवाई की माँग की।
पुलिस के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है।

कर्नाटक के धारवाड़ जिले में एक नाबालिग दलित लड़की की मौत की जांच में कथित लापरवाही के आरोप में सर्किल पुलिस इंस्पेक्टर (सीपीआई) शिवयोगी लोहार को शनिवार, 13 जून को निलंबित कर दिया गया। धारवाड़ पुलिस अधीक्षक गुंजन आर्या ने यह निलंबन आदेश जारी किया। यह कार्रवाई तब आई जब हिंदू संगठनों और पीड़िता के परिवार का दबाव लगातार बढ़ रहा था।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला धारवाड़ तालुक के गराग गांव की एक नाबालिग दलित लड़की से जुड़ा है। आरोप है कि एक मुस्लिम युवक द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने के बाद उसने 8 मई को कीटनाशक का सेवन कर लिया। उसे कर्नाटक मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (केएमसीआरआई) में भर्ती कराया गया, जहाँ 9 मई को उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।

पुलिस ने इस मामले में 'बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण' (पॉक्सो) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। हालाँकि, गिरफ्तारी में देरी और जांच के तरीके को लेकर गंभीर सवाल उठे। पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके माता-पिता को नजरअंदाज किया और मामले को दबाने की कोशिश की।

गिरफ्तारियाँ और साक्ष्य

लड़की की मृत्यु के एक महीने से अधिक समय बाद, पुलिस ने बुधवार को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान हनुमानाकोप्पा गांव के 25 वर्षीय नईम बेग जोरमनावर और उप्पिनाबेटागेरी गांव के 22 वर्षीय सोहेल मुल्ला के रूप में हुई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांचकर्ताओं ने आरोपियों के मोबाइल फोन से तस्वीरें और अश्लील वीडियो बरामद किए हैं, जो कथित तौर पर नाबालिग के यौन शोषण का संकेत देते हैं।

सीपीआई पर आरोप और निलंबन

निलंबित सीपीआई शिवयोगी लोहार पर आरोप है कि उन्होंने मामले में उचित कार्रवाई करने के बजाय समझौता कराने की कोशिश की और जांच में ड्यूटी के प्रति घोर लापरवाही बरती। एसपी गुंजन आर्या ने इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए तत्काल निलंबन का आदेश जारी किया। यह ऐसे समय में आया है जब मामले में 'लव जिहाद' और मामले को दबाने की कोशिश के आरोप भी सामने आए थे।

हिंदू संगठनों का विरोध प्रदर्शन

बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। इसके अगले दिन निलंबन का आदेश जारी किया गया। इस हफ्ते की शुरुआत में श्रीराम सेना के प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने भी लड़की की मौत के एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए थे और गराग गांव का दौरा कर पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) समेत अन्य संगठनों ने आरोपियों और जांच में लापरवाही के लिए कथित तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।

आगे की जांच

पुलिस के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है। गौरतलब है कि यह मामला न केवल एक नाबालिग की दुखद मृत्यु का है, बल्कि यह पुलिस तंत्र की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। सीपीआई के निलंबन के बाद अब देखना होगा कि जांच की दिशा किस ओर जाती है और परिवार को न्याय मिलता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस बड़े सवाल का जवाब नहीं देता कि एक नाबालिग की मौत के एक महीने से अधिक समय बाद गिरफ्तारियाँ क्यों हुईं। जब परिवार और संगठन सड़कों पर उतरते हैं, तभी तंत्र हरकत में आता है — यह पैटर्न दलित पीड़ितों के मामलों में बार-बार देखा गया है। पॉक्सो जैसे कड़े कानून के बावजूद यदि जांच में समझौते की कोशिश होती है, तो कानून की प्रभावशीलता पर ही सवाल उठता है। असली जवाबदेही तब होगी जब केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि पूरी निगरानी श्रृंखला की जाँच हो।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धारवाड़ नाबालिग दलित मौत मामला क्या है?
यह मामला धारवाड़ तालुक के गराग गांव की एक नाबालिग दलित लड़की से जुड़ा है, जिसने कथित तौर पर एक मुस्लिम युवक द्वारा मानसिक प्रताड़ना के बाद 8 मई को कीटनाशक खा लिया और 9 मई को केएमसीआरआई में उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। मामले में पॉक्सो अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज है।
सीपीआई शिवयोगी लोहार को क्यों निलंबित किया गया?
सीपीआई शिवयोगी लोहार पर जांच में ड्यूटी के प्रति लापरवाही और उचित कार्रवाई के बजाय समझौता कराने की कोशिश करने के आरोप लगे। धारवाड़ एसपी गुंजन आर्या ने इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए 13 जून को निलंबन आदेश जारी किया।
इस मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
पुलिस ने बुधवार को दो आरोपियों — हनुमानाकोप्पा गांव के 25 वर्षीय नईम बेग जोरमनावर और उप्पिनाबेटागेरी गांव के 22 वर्षीय सोहेल मुल्ला — को गिरफ्तार किया। जांचकर्ताओं ने उनके मोबाइल फोन से कथित तौर पर तस्वीरें और अश्लील वीडियो बरामद किए हैं।
हिंदू संगठनों की इस मामले में क्या भूमिका रही?
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। श्रीराम सेना के प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने भी गराग गांव का दौरा कर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। बजरंग दल और वीएचपी ने आरोपियों एवं जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
पुलिस के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है। सीपीआई के निलंबन के बाद जांच की दिशा और गति पर सभी की नजर है। हिंदू संगठनों ने और भी प्रदर्शन करने की घोषणा की है, जिससे प्रशासन पर दबाव बना रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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