धारवाड़ नाबालिग दलित मौत मामला: जांच में लापरवाही पर सीपीआई शिवयोगी लोहार सस्पेंड
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के धारवाड़ जिले में एक नाबालिग दलित लड़की की मौत की जांच में कथित लापरवाही के आरोप में सर्किल पुलिस इंस्पेक्टर (सीपीआई) शिवयोगी लोहार को शनिवार, 13 जून को निलंबित कर दिया गया। धारवाड़ पुलिस अधीक्षक गुंजन आर्या ने यह निलंबन आदेश जारी किया। यह कार्रवाई तब आई जब हिंदू संगठनों और पीड़िता के परिवार का दबाव लगातार बढ़ रहा था।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला धारवाड़ तालुक के गराग गांव की एक नाबालिग दलित लड़की से जुड़ा है। आरोप है कि एक मुस्लिम युवक द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने के बाद उसने 8 मई को कीटनाशक का सेवन कर लिया। उसे कर्नाटक मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (केएमसीआरआई) में भर्ती कराया गया, जहाँ 9 मई को उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
पुलिस ने इस मामले में 'बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण' (पॉक्सो) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। हालाँकि, गिरफ्तारी में देरी और जांच के तरीके को लेकर गंभीर सवाल उठे। पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके माता-पिता को नजरअंदाज किया और मामले को दबाने की कोशिश की।
गिरफ्तारियाँ और साक्ष्य
लड़की की मृत्यु के एक महीने से अधिक समय बाद, पुलिस ने बुधवार को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान हनुमानाकोप्पा गांव के 25 वर्षीय नईम बेग जोरमनावर और उप्पिनाबेटागेरी गांव के 22 वर्षीय सोहेल मुल्ला के रूप में हुई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांचकर्ताओं ने आरोपियों के मोबाइल फोन से तस्वीरें और अश्लील वीडियो बरामद किए हैं, जो कथित तौर पर नाबालिग के यौन शोषण का संकेत देते हैं।
सीपीआई पर आरोप और निलंबन
निलंबित सीपीआई शिवयोगी लोहार पर आरोप है कि उन्होंने मामले में उचित कार्रवाई करने के बजाय समझौता कराने की कोशिश की और जांच में ड्यूटी के प्रति घोर लापरवाही बरती। एसपी गुंजन आर्या ने इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए तत्काल निलंबन का आदेश जारी किया। यह ऐसे समय में आया है जब मामले में 'लव जिहाद' और मामले को दबाने की कोशिश के आरोप भी सामने आए थे।
हिंदू संगठनों का विरोध प्रदर्शन
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। इसके अगले दिन निलंबन का आदेश जारी किया गया। इस हफ्ते की शुरुआत में श्रीराम सेना के प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने भी लड़की की मौत के एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए थे और गराग गांव का दौरा कर पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) समेत अन्य संगठनों ने आरोपियों और जांच में लापरवाही के लिए कथित तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।
आगे की जांच
पुलिस के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है। गौरतलब है कि यह मामला न केवल एक नाबालिग की दुखद मृत्यु का है, बल्कि यह पुलिस तंत्र की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। सीपीआई के निलंबन के बाद अब देखना होगा कि जांच की दिशा किस ओर जाती है और परिवार को न्याय मिलता है या नहीं।