आरजी कर रेप-मर्डर केस: तीन आईपीएस अधिकारियों का निलंबन 120 दिन और बढ़ा, सीबीआई की नई एसआईटी जांच जारी
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता में आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में अगस्त 2024 में हुए महिला डॉक्टर के रेप और हत्या मामले में ड्यूटी में लापरवाही के आरोपी तीन भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों के निलंबन की अवधि सोमवार, 6 जुलाई 2026 को 120 दिन और बढ़ा दी गई। राज्य सचिवालय के अनुसार, यह निर्णय विभागीय जांच को निष्पक्ष और प्रभावमुक्त रूप से पूरा करने के उद्देश्य से लिया गया है।
कौन हैं निलंबित अधिकारी
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने 15 मई 2026 को तीन आईपीएस अधिकारियों — कोलकाता पुलिस के तत्कालीन कमिश्नर विनीत कुमार गोयल, तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (नॉर्थ डिवीजन) अभिषेक गुप्ता और तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (सेंट्रल डिवीजन) इंदिरा मुखर्जी — को निलंबित कर उनके विरुद्ध विभागीय जांच का आदेश दिया था।
अब सोमवार को उनके निलंबन की अवधि में 120 दिन की अतिरिक्त वृद्धि की गई है। राज्य सचिवालय की ओर से जारी जानकारी में कहा गया है कि जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया।
सीबीआई की नई एसआईटी और जांच की स्थिति
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले की नए सिरे से जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) पहले ही गठित कर दिया है। नई एसआईटी के सदस्यों ने पिछले महीने अभिषेक गुप्ता और इंदिरा मुखर्जी से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए।
गौरतलब है कि यह मामला तब सुर्खियों में आया जब 9 अगस्त 2024 की सुबह आरजी कर अस्पताल परिसर से एक महिला डॉक्टर का शव बरामद हुआ था।
विरोध प्रदर्शन और जनदबाव
शव मिलने के बाद पश्चिम बंगाल में चिकित्सा जगत, नागरिक समाज,著名 हस्तियों और आम नागरिकों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए। धीरे-धीरे यह आंदोलन अन्य राज्यों तक भी फैल गया।
जांच को ठीक से न संभालने के लिए गोयल और गुप्ता के तत्काल इस्तीफे की मांग उठी। उस दौरान मुखर्जी पर मीडिया के सामने भ्रामक जानकारी देने का आरोप लगा था।
जनदबाव के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गोयल और गुप्ता का तबादला कर दिया, लेकिन मुखर्जी को डिप्टी कमिश्नर (सेंट्रल डिवीजन) के पद पर बनाए रखा गया।
नई सरकार की कार्रवाई
15 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के कार्यभार संभालने के कुछ दिनों के भीतर राज्य प्रशासन ने आरजी कर मामले की फाइलें दोबारा खोलीं, तीनों आरोपी आईपीएस अधिकारियों को निलंबित किया और उनके विरुद्ध विभागीय जांच शुरू की।
यह ऐसे समय में आया है जब इस मामले को लेकर सार्वजनिक आक्रोश और न्यायिक दबाव दोनों बने हुए हैं। सीबीआई की एसआईटी जांच के नतीजे आने वाले महीनों में इस मामले की दिशा तय करेंगे।