6 जुलाई 2026
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आरजी कर रेप-मर्डर केस: तीन आईपीएस अधिकारियों का निलंबन 120 दिन और बढ़ा, सीबीआई की नई एसआईटी जांच जारी

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आरजी कर रेप-मर्डर केस: तीन आईपीएस अधिकारियों का निलंबन 120 दिन और बढ़ा, सीबीआई की नई एसआईटी जांच जारी

सारांश

आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर की रेप-हत्या के मामले में ड्यूटी लापरवाही के आरोपी तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का निलंबन एक बार फिर 120 दिन बढ़ा दिया गया है। सीबीआई की नई एसआईटी जांच जारी है और पिछले महीने दो अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए।

मुख्य बातें

तीन आईपीएस अधिकारियों — विनीत कुमार गोयल , अभिषेक गुप्ता और इंदिरा मुखर्जी — का निलंबन 6 जुलाई 2026 को 120 दिन और बढ़ाया गया।
तीनों को 15 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री ने निलंबित कर विभागीय जांच का आदेश दिया था।
सीबीआई ने नए सिरे से जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया है; गुप्ता और मुखर्जी के बयान पिछले महीने दर्ज किए गए।
मामला 9 अगस्त 2024 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल , कोलकाता में एक महिला डॉक्टर का शव मिलने के बाद सामने आया था।
जनदबाव के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गोयल और गुप्ता का तबादला किया था, लेकिन मुखर्जी पद पर बनी रही थीं।

कोलकाता में आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में अगस्त 2024 में हुए महिला डॉक्टर के रेप और हत्या मामले में ड्यूटी में लापरवाही के आरोपी तीन भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों के निलंबन की अवधि सोमवार, 6 जुलाई 2026 को 120 दिन और बढ़ा दी गई। राज्य सचिवालय के अनुसार, यह निर्णय विभागीय जांच को निष्पक्ष और प्रभावमुक्त रूप से पूरा करने के उद्देश्य से लिया गया है।

कौन हैं निलंबित अधिकारी

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने 15 मई 2026 को तीन आईपीएस अधिकारियों — कोलकाता पुलिस के तत्कालीन कमिश्नर विनीत कुमार गोयल, तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (नॉर्थ डिवीजन) अभिषेक गुप्ता और तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (सेंट्रल डिवीजन) इंदिरा मुखर्जी — को निलंबित कर उनके विरुद्ध विभागीय जांच का आदेश दिया था।

अब सोमवार को उनके निलंबन की अवधि में 120 दिन की अतिरिक्त वृद्धि की गई है। राज्य सचिवालय की ओर से जारी जानकारी में कहा गया है कि जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया।

सीबीआई की नई एसआईटी और जांच की स्थिति

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले की नए सिरे से जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) पहले ही गठित कर दिया है। नई एसआईटी के सदस्यों ने पिछले महीने अभिषेक गुप्ता और इंदिरा मुखर्जी से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए।

गौरतलब है कि यह मामला तब सुर्खियों में आया जब 9 अगस्त 2024 की सुबह आरजी कर अस्पताल परिसर से एक महिला डॉक्टर का शव बरामद हुआ था।

विरोध प्रदर्शन और जनदबाव

शव मिलने के बाद पश्चिम बंगाल में चिकित्सा जगत, नागरिक समाज,著名 हस्तियों और आम नागरिकों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए। धीरे-धीरे यह आंदोलन अन्य राज्यों तक भी फैल गया।

जांच को ठीक से न संभालने के लिए गोयल और गुप्ता के तत्काल इस्तीफे की मांग उठी। उस दौरान मुखर्जी पर मीडिया के सामने भ्रामक जानकारी देने का आरोप लगा था।

जनदबाव के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गोयल और गुप्ता का तबादला कर दिया, लेकिन मुखर्जी को डिप्टी कमिश्नर (सेंट्रल डिवीजन) के पद पर बनाए रखा गया।

नई सरकार की कार्रवाई

15 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के कार्यभार संभालने के कुछ दिनों के भीतर राज्य प्रशासन ने आरजी कर मामले की फाइलें दोबारा खोलीं, तीनों आरोपी आईपीएस अधिकारियों को निलंबित किया और उनके विरुद्ध विभागीय जांच शुरू की।

यह ऐसे समय में आया है जब इस मामले को लेकर सार्वजनिक आक्रोश और न्यायिक दबाव दोनों बने हुए हैं। सीबीआई की एसआईटी जांच के नतीजे आने वाले महीनों में इस मामले की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

और नई सरकार की कार्रवाई राजनीतिक इच्छाशक्ति का संकेत तो देती है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि विभागीय जांच के नतीजे कब और किस रूप में सामने आते हैं। सीबीआई की एसआईटी और राज्य की विभागीय जांच — दोनों समानांतर चल रही हैं, जो समन्वय की चुनौती भी पैदा करती हैं।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरजी कर रेप-मर्डर केस में किन आईपीएस अधिकारियों का निलंबन बढ़ाया गया है?
कोलकाता पुलिस के तत्कालीन कमिश्नर विनीत कुमार गोयल, तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर (नॉर्थ डिवीजन) अभिषेक गुप्ता और तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर (सेंट्रल डिवीजन) इंदिरा मुखर्जी का निलंबन 120 दिन और बढ़ाया गया है। तीनों पर आरजी कर मामले में ड्यूटी में लापरवाही का आरोप है।
आरजी कर मामला क्या है?
9 अगस्त 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर में एक महिला डॉक्टर का शव मिला था, जिसके साथ रेप और हत्या की गई थी। इस घटना ने पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया था।
सीबीआई की एसआईटी इस मामले में क्या कर रही है?
सीबीआई ने मामले की नए सिरे से जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया है। एसआईटी सदस्यों ने पिछले महीने अभिषेक गुप्ता और इंदिरा मुखर्जी से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए हैं।
तीन आईपीएस अधिकारियों को पहली बार कब निलंबित किया गया था?
पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री ने 15 मई 2026 को कार्यभार संभालने के कुछ दिनों बाद आरजी कर मामले की फाइलें दोबारा खोलीं और तीनों आईपीएस अधिकारियों को निलंबित कर विभागीय जांच का आदेश दिया।
निलंबन की अवधि क्यों बढ़ाई गई?
राज्य सचिवालय के अनुसार, विभागीय जांच को निष्पक्ष और किसी भी प्रभाव से मुक्त रखने के लिए निलंबन की अवधि 120 दिन और बढ़ाई गई है। यह कदम जांच प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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