6 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एआई की असली बाधा चिप्स नहीं, बिजली है: ब्लैकरॉक सीईओ लैरी फिंक की चेतावनी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एआई की असली बाधा चिप्स नहीं, बिजली है: ब्लैकरॉक सीईओ लैरी फिंक की चेतावनी

सारांश

ब्लैकरॉक के लैरी फिंक का यह बयान एआई की बहस को डेटा सेंटर से बाहर बिजली के खंभों तक ले जाता है। उनके अनुसार असली अड़चन सिलिकॉन नहीं, इलेक्ट्रॉन्स हैं — और जब तक ट्रांसमिशन ग्रिड नहीं सुधरता, एआई क्रांति बड़े खिलाड़ियों तक सिमटी रहेगी।

मुख्य बातें

ब्लैकरॉक सीईओ लैरी फिंक ने 6 जुलाई को कहा कि एआई की सबसे बड़ी बाधा अब एडवांस्ड चिप्स नहीं, बल्कि बिजली की उपलब्धता है।
अमेरिका के पास प्राकृतिक गैस जैसे ऊर्जा संसाधन पर्याप्त हैं, लेकिन ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी बड़ी समस्या है।
फिंक ने पावर ग्रिड अपग्रेड के लिए "अरबों डॉलर" के निवेश की आवश्यकता बताई।
एआई कंप्यूटिंग की माँग आपूर्ति से अधिक होने के कारण अस्पताल, नगर पालिकाएँ और छोटे व्यवसाय पीछे रह सकते हैं।
फिंक ने एआई में इक्विटी बुलबुले की आशंकाओं को खारिज किया और वैश्विक अर्थव्यवस्था की मज़बूती पर भरोसा जताया।
उन्होंने अमेरिका की आर्थिक वृद्धि दर 3% सालाना बनाए रखने को सरकारी कर्ज़ प्रबंधन की कुंजी बताया।

ब्लैकरॉक के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी लैरी फिंक ने 6 जुलाई को स्पष्ट किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विस्तार में सबसे बड़ी रुकावट अब एडवांस्ड कंप्यूटर चिप्स की कमी नहीं, बल्कि बिजली की अनुपलब्धता है। उन्होंने आगाह किया कि यदि अमेरिका ने अपने पुराने पड़ चुके पावर ग्रिड को समय रहते आधुनिक नहीं बनाया, तो तकनीकी नवाचार की अगली लहर गंभीर रूप से बाधित हो सकती है।

मुख्य चेतावनी: बिजली संकट बनेगा एआई की सीमा

सीएनएन के कार्यक्रम 'फरीद ज़कारिया जीपीएस' को दिए इंटरव्यू में फिंक ने कहा, "अमेरिका में हमारे पास पर्याप्त बिजली नहीं है।" उनके अनुसार एआई की कंप्यूटिंग आवश्यकताएँ इतनी तेज़ी से बढ़ रही हैं कि मौजूदा बिजली ढाँचा उस माँग को पूरा करने में सक्षम नहीं है। उन्होंने एआई को परिभाषित करते हुए कहा, "एआई असल में इलेक्ट्रॉन्स का एक समूह है — और इलेक्ट्रॉन्स बनाने के लिए बिजली चाहिए।"

फिंक ने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिका के पास प्राकृतिक गैस जैसे ऊर्जा संसाधनों की कमी नहीं है, परंतु समस्या ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की है। उन्होंने कहा, "हमारे पास नैचुरल गैस से मिलने वाली बहुत अधिक बिजली है, लेकिन हम इसे सही तरीके से बाँट नहीं पा रहे।" इस कमी को दूर करने के लिए उन्होंने "अरबों डॉलर" के निवेश की आवश्यकता बताई।

माँग और आपूर्ति का असंतुलन

फिंक के अनुसार इस समय एआई कंप्यूटिंग क्षमता की माँग आपूर्ति से कहीं आगे निकल चुकी है। उन्होंने कहा, "अभी हमारे पास कंप्यूटिंग क्षमता की कमी है, जो मुझे लगता है कि आज हमारे देश की सबसे बड़ी समस्या है।" यह असंतुलन न केवल चिप्स, बल्कि बिजली और अन्य बुनियादी ढाँचे की कमी को भी बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक कंप्यूटिंग की लागत पर्याप्त रूप से कम नहीं होती, छोटी संस्थाओं के लिए एआई क्रांति का लाभ उठाना कठिन बना रहेगा।

एआई का लोकतंत्रीकरण: नगर पालिकाओं और अस्पतालों की चिंता

फिंक ने एआई तक व्यापक पहुँच के सवाल पर कहा, "मुझे इस बात की चिंता नहीं है कि ब्लैकरॉक या जे.पी. मॉर्गन के पास इन मॉडल्स में निवेश करने के लिए पैसे हैं या नहीं। लेकिन मुझे नगर पालिकाओं या अस्पतालों की बहुत चिंता है — क्या वे इसमें निवेश करेंगे?" उनका मानना है कि अमेरिका को एआई का "लोकतंत्रीकरण" करना होगा, ताकि अस्पताल, स्थानीय सरकारें, परिवहन तंत्र और छोटे व्यवसाय भी एडवांस्ड एआई टूल्स का उपयोग कर सकें। उन्होंने चेतावनी दी, "अगर हम ऐसा नहीं कर पाते, तो हमें कुछ गंभीर स्ट्रक्चरल समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।"

बाज़ार बुलबुले की आशंका खारिज, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर आशावाद

फिंक ने उन आशंकाओं को सिरे से नकार दिया जिनमें एआई में भारी निवेश को इक्विटी बाज़ारों में सट्टा बुलबुले का कारण बताया जा रहा है। उनके अनुसार असामान्य रूप से अधिक माँग ने ऐसी कमी पैदा की है जिससे कुछ कंपनियाँ अपने उत्पादों के लिए ऊँची कीमतें वसूल पा रही हैं — यह बुलबुला नहीं, बल्कि माँग-आपूर्ति की स्वाभाविक स्थिति है।

व्यापक आर्थिक परिदृश्य पर उन्होंने कहा कि हालिया भू-राजनीतिक झटकों — जिनमें ईरान से जुड़ा संघर्ष भी शामिल है — के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था ने अपनी मज़बूती साबित की है। उन्होंने कहा, "वैश्विक अर्थव्यवस्था ने असल में ज़्यादातर दबावों को कम किया है। हम समस्याओं का समाधान करते हैं।"

विशेषज्ञ का नीतिगत आग्रह: विकास ही कर्ज़ का जवाब

अमेरिका के बढ़ते सरकारी कर्ज़ पर फिंक ने तर्क दिया कि निरंतर आर्थिक वृद्धि ही इसका सबसे कारगर उपाय है। उन्होंने कहा, "अगर हम अर्थव्यवस्था को हर साल तीन प्रतिशत की दर से नहीं बढ़ा पाते, तो हम मुश्किल में पड़ जाएँगे।" उन्होंने नीति-निर्माताओं से आग्रह किया कि वे अधिक कर लगाने के बजाय निजी निवेश को प्रोत्साहित करें और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी मंज़ूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाएँ। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एआई में निवेश की होड़ तेज़ हो रही है और ऊर्जा क्षमता एक केंद्रीय नीतिगत बहस बनती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह बिजली वितरण जैसी बुनियादी समस्या से जूझ रहा है। फिंक की नगर पालिकाओं और अस्पतालों वाली चिंता असल में एआई की सामाजिक असमानता का सवाल है — और यह बहस अभी शुरू हुई है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लैरी फिंक ने एआई के लिए बिजली को सबसे बड़ी बाधा क्यों बताया?
फिंक के अनुसार एआई की कंप्यूटिंग आवश्यकताएँ इतनी तेज़ी से बढ़ रही हैं कि मौजूदा पावर ग्रिड उस माँग को पूरा करने में असमर्थ है। उन्होंने कहा कि एआई मूलतः इलेक्ट्रॉन्स पर निर्भर है, इसलिए बिजली की कमी सीधे एआई विकास को सीमित करती है।
अमेरिका के पावर ग्रिड में क्या कमी है?
फिंक ने बताया कि अमेरिका के पास प्राकृतिक गैस जैसे ऊर्जा संसाधन पर्याप्त मात्रा में हैं, लेकिन बिजली को कुशलतापूर्वक वितरित करने के लिए ज़रूरी ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। इसे दूर करने के लिए उन्होंने अरबों डॉलर के निवेश की बात कही।
एआई की ऊँची लागत से कौन सबसे अधिक प्रभावित होगा?
फिंक ने विशेष रूप से नगर पालिकाओं, अस्पतालों, परिवहन तंत्र और छोटे व्यवसायों की चिंता जताई। उनके अनुसार जब तक कंप्यूटिंग की लागत पर्याप्त रूप से कम नहीं होती, ये संस्थाएँ एआई क्रांति के लाभ से वंचित रह सकती हैं।
क्या एआई में निवेश से शेयर बाज़ार में बुलबुला बन रहा है?
फिंक ने इस आशंका को खारिज किया। उनके अनुसार असामान्य रूप से अधिक माँग ने आपूर्ति की कमी पैदा की है, जिससे कुछ कंपनियाँ ऊँची कीमतें वसूल पा रही हैं — यह बुलबुला नहीं, बल्कि माँग-आपूर्ति असंतुलन की स्वाभाविक स्थिति है।
फिंक ने अमेरिका के बढ़ते सरकारी कर्ज़ पर क्या कहा?
फिंक ने तर्क दिया कि सालाना 3% की आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखना ही बढ़ते कर्ज़ का सबसे कारगर उपाय है। उन्होंने नीति-निर्माताओं से अधिक कर लगाने के बजाय निजी निवेश को बढ़ावा देने और इंफ्रास्ट्रक्चर मंज़ूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाने का आग्रह किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 4 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले