एआई साइबर खतरे: अमेरिकी कांग्रेस सुनवाई में विशेषज्ञों की चेतावनी, चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर चिंता
सारांश
मुख्य बातें
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अमेरिका की साइबर सुरक्षा के परिदृश्य को दो धारों वाली तलवार की तरह बदल रहा है — एक ओर यह रक्षकों को शक्तिशाली उपकरण दे रहा है, तो दूसरी ओर साइबर अपराधियों और शत्रु देशों को क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले के नए रास्ते सुझा रहा है। 7 जून 2026 को वॉशिंगटन में अमेरिकी कांग्रेस की एक विशेष सुनवाई में तकनीकी विशेषज्ञों और सांसदों ने इन बढ़ते खतरों पर गहरी चिंता व्यक्त की।
सुनवाई की पृष्ठभूमि
यह सुनवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए जाने के कुछ दिन बाद आयोजित की गई। उस आदेश में संघीय एजेंसियों को उन्नत एआई की साइबर क्षमताओं का मूल्यांकन करने के लिए एक ढाँचा तैयार करने का निर्देश दिया गया था। साथ ही सरकार और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे के संचालकों को अत्याधुनिक एआई मॉडलों तक अधिक पहुँच देने की बात कही गई थी। साइबर सिक्योरिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन पर हाउस होमलैंड सिक्योरिटी सबकमेटी के समक्ष हुई इस सुनवाई में कई शीर्ष विशेषज्ञों ने गवाही दी।
मुख्य चेतावनियाँ और विशेषज्ञों के बयान
उपसमिति के अध्यक्ष एंडी ओगल्स ने सुनवाई की शुरुआत में कहा, 'ये एआई मॉडल पहले ही खतरे के माहौल को बदल रहे हैं, और संघीय सरकार ऐसी आखिरी संस्था नहीं हो सकती, जिसे समझ आए कि ये क्या कर सकते हैं।'
गूगल थ्रेट इंटेलिजेंस ग्रुप की उपाध्यक्ष सैंड्रा जॉयस ने गवाही में खुलासा किया कि साइबर अपराधी पहले से ही एआई का सक्रिय उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हाल ही में हमारी चिंताओं की पुष्टि तब हुई जब हमें पहली बार ऐसे सबूत मिले कि साइबर अपराधियों ने एक जीरो-डे एक्सप्लॉइट विकसित करने के लिए एआई का उपयोग किया था।' जॉयस ने आगे बताया कि हमलावर एआई की सहायता से कमजोरियाँ तेजी से ढूंढ रहे हैं और पारंपरिक सुरक्षा टीमों की तुलना में नेटवर्क के भीतर कहीं अधिक गति से आगे बढ़ रहे हैं।
फ्रंटियर मॉडल फोरम के कार्यकारी निदेशक क्रिस मेसेरोल ने कहा, 'अगर कोई एआई एजेंट जीरो-डे कमजोरियाँ खोज सकता है, तो वह किसी रक्षक के हाथ में हमारी सुरक्षा कर सकता है, लेकिन किसी हमलावर के हाथ में वही चीज खतरा बन सकती है।' मेसेरोल ने 'एडवर्सेरियल डिस्टिलेशन' नामक तकनीक को लेकर विशेष चेतावनी दी, जिसके जरिए विदेशी प्रतिस्पर्धी उन्नत एआई सिस्टम की क्षमताओं की नकल कर सकते हैं और उनकी सुरक्षा सीमाओं को भी हटा सकते हैं।
कॉरिडोर सिक्योरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और साइबरसिक्योरिटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी (CISA) के पूर्व सलाहकार जैक केबल ने कहा, 'सबसे बड़ी चुनौती यह नहीं है कि एआई नई तरह की कमजोरियाँ पैदा कर रहा है। असली चुनौती यह है कि एआई कमजोरियों को पैदा करने, खोजने और उनका फायदा उठाने की रफ्तार और संख्या दोनों को बहुत बढ़ा देता है।'
चीन की चुनौती और वैश्विक प्रतिस्पर्धा
सुनवाई के दौरान चीन का मुद्दा बार-बार केंद्र में आया। सांसदों ने विशेषज्ञों से चीनी एआई मॉडलों के बढ़ते वैश्विक प्रभाव के बारे में विस्तृत जानकारी माँगी। विशेषज्ञों ने आगाह किया कि यदि अमेरिका इस प्रतिस्पर्धा में पिछड़ गया, तो कम लागत वाले चीनी एआई सिस्टम सॉफ्टवेयर विकास, क्लाउड कंप्यूटिंग और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे में व्यापक पैमाने पर स्थापित हो सकते हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा अर्धचालक, क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई — तीनों मोर्चों पर एक साथ तेज हो रही है।
आगे क्या होगा
केबल ने सिफारिश की कि सरकारों और निजी कंपनियों को केवल प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण छोड़कर सॉफ्टवेयर निर्माण के प्रारंभिक चरण में ही कमजोरियाँ रोकने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकारी आदेश के तहत संघीय एजेंसियों से एआई साइबर क्षमताओं का मूल्यांकन ढाँचा तैयार करने की उम्मीद है, हालाँकि इसकी समयसीमा और क्रियान्वयन के ब्यौरे अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सुनवाई अमेरिकी नीति-निर्माताओं के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि एआई-संचालित साइबर खतरों से निपटने के लिए तत्काल विधायी और तकनीकी दोनों स्तरों पर कदम उठाने होंगे।