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₹650 करोड़ के कथित दवा घोटाले पर 'आप' का एलएनजेपी अस्पताल के बाहर मौन प्रदर्शन, CM रेखा गुप्ता से माँगा इस्तीफा

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₹650 करोड़ के कथित दवा घोटाले पर 'आप' का एलएनजेपी अस्पताल के बाहर मौन प्रदर्शन, CM रेखा गुप्ता से माँगा इस्तीफा

सारांश

₹650 करोड़ के कथित दवा घोटाले पर AAP सड़क पर उतरी — LNJP अस्पताल के बाहर मानव शृंखला, CM रेखा गुप्ता से इस्तीफे की माँग। पार्टी का आरोप है कि खरीद केंद्रीकरण और संदिग्ध नियुक्ति ने घोटाले की जमीन तैयार की, और कथित मास्टरमाइंड जर्मनी फरार है।

मुख्य बातें

AAP ने 6 जुलाई 2026 को LNJP अस्पताल के बाहर ₹650 करोड़ के कथित दवा घोटाले पर मौन प्रदर्शन किया।
दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने CM रेखा गुप्ता और स्वास्थ्य मंत्री से इस्तीफे की माँग की।
AAP का आरोप है कि डॉ.
वत्सला अग्रवाल को विजिलेंस जाँच लंबित होने के बावजूद DGHS पद पर नियुक्त किया गया।
कथित मास्टरमाइंड राजीव रंगीला कथित तौर पर जर्मनी फरार; AAP ने प्रत्यर्पण की माँग की।
ACB की एफआईआर में बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की खरीद का उल्लेख।
AAP ने न्यायिक या स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जाँच और CPA के माध्यम से केंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया की समीक्षा की माँग की।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने 6 जुलाई 2026 को लोकनायक जयप्रकाश (LNJP) अस्पताल, नई दिल्ली के बाहर ₹650 करोड़ के कथित दवा घोटाले को लेकर मौन सांकेतिक प्रदर्शन किया। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने लंबी मानव शृंखला बनाकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और स्वास्थ्य मंत्री से इस्तीफे की माँग की।

प्रदर्शन का स्वरूप और माँगें

प्रदर्शनकारियों के हाथों में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएँ (DGHS) डॉ. वत्सला अग्रवाल की तस्वीर वाले पोस्टर थे, जिन पर लिखा था — 'ये रिश्ता क्या कहलाता है?' AAP ने पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग उठाई।

सौरभ भारद्वाज के आरोप

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) स्वयं यह स्वीकार कर रही है कि DGHS कार्यालय में ₹650 करोड़ का घोटाला हुआ, किंतु सबसे बड़ा सवाल यह है कि डॉ. वत्सला अग्रवाल को DGHS पद पर किसने नियुक्त किया। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. वत्सला के विरुद्ध पहले से विजिलेंस जाँच लंबित होने के बावजूद उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों की अनदेखी कर इस महत्वपूर्ण पद पर बैठाया गया।

भारद्वाज ने यह भी दावा किया कि सरकार ने अस्पतालों से स्थानीय खरीद का अधिकार वापस लेकर सारी खरीद केंद्रीय खरीद एजेंसी (CPA) के माध्यम से कराने का निर्णय लिया, जिससे पूरी व्यवस्था एक अधिकारी के हाथों में केंद्रित हो गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कथित घोटाले के मास्टरमाइंड राजीव रंगीला को समय पर गिरफ्तार नहीं किया गया और वह देश छोड़कर जर्मनी चला गया। उन्होंने माँग की कि रंगीला को भारत वापस लाकर पूछताछ की जाए।

अन्य नेताओं के आरोप

बुराड़ी विधायक संजीव झा ने आरोप लगाया कि बिना राजनीतिक संरक्षण के इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं है। उन्होंने दावा किया कि भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) की एफआईआर में करोड़ों रुपए की खरीद में भारी वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख है, और दवाइयों व चिकित्सा उपकरणों की खरीद बाजार मूल्य की तुलना में कई गुना अधिक कीमत पर की गई।

कोंडली विधायक कुलदीप कुमार ने आरोप लगाया कि BJP सरकार के कार्यकाल में गरीब मरीजों को दवाइयों और जाँच सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है। उनके अनुसार सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की कमी और जाँच सेवाओं में बाधा का कारण यही कथित घोटाला है। उन्होंने न्यायिक या किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जाँच की माँग की।

मॉडल टाउन के पूर्व विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि अस्पतालों की खरीद व्यवस्था में बदलाव कर कथित घोटाले की जमीन तैयार की गई। उन्होंने कहा कि छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई कर मामले को सीमित करने की कोशिश हो रही है, जबकि वास्तविक जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जाँच होनी चाहिए।

पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि खरीद प्रक्रिया के केंद्रीकरण का निर्णय BJP सरकार के सत्ता में आने के बाद लिया गया था, और आलोचकों का कहना है कि इसी केंद्रीकरण ने कथित अनियमितताओं को संभव बनाया। AAP ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक स्वतंत्र जाँच नहीं होती, विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे।

आगे क्या होगा

AAP ने संकेत दिया है कि यदि सरकार ने निष्पक्ष जाँच की माँग नहीं मानी तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। राजीव रंगीला के प्रत्यर्पण और डॉ. वत्सला अग्रवाल की नियुक्ति की परिस्थितियों की जाँच पार्टी की प्रमुख माँगें हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दिल्ली की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की संरचनात्मक कमजोरी का प्रतीक है। खरीद प्रक्रिया का केंद्रीकरण — जिसे सुधार के नाम पर लागू किया गया — कथित तौर पर उसी एकल बिंदु विफलता का कारण बना जिससे यह घोटाला संभव हुआ। असली सवाल यह है कि ACB की एफआईआर के बावजूद कथित मास्टरमाइंड देश छोड़ने में कैसे सफल रहा — यह जवाबदेही की उस गहरी खाई को उजागर करता है जो राजनीतिक दल-बदल के बावजूद दिल्ली प्रशासन में बनी रहती है। AAP का विरोध प्रदर्शन राजनीतिक रूप से स्वाभाविक है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज यह नहीं पूछ रही कि AAP के अपने कार्यकाल में खरीद पारदर्शिता का रिकॉर्ड कैसा था।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली का ₹650 करोड़ का कथित दवा घोटाला क्या है?
यह DGHS कार्यालय से जुड़ा कथित घोटाला है जिसमें सरकारी अस्पतालों के लिए दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की खरीद बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर की गई। ACB की एफआईआर में इन वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख है और मामले की जाँच जारी है।
AAP ने CM रेखा गुप्ता से इस्तीफा क्यों माँगा?
AAP का आरोप है कि BJP सरकार ने खरीद प्रक्रिया को CPA के माध्यम से केंद्रीकृत किया, जिससे कथित अनियमितताओं को बढ़ावा मिला। पार्टी का कहना है कि विजिलेंस जाँच लंबित होने के बावजूद डॉ. वत्सला अग्रवाल को DGHS पद पर नियुक्त किया गया, जिसकी नैतिक जिम्मेदारी CM और स्वास्थ्य मंत्री पर है।
राजीव रंगीला कौन है और वह जर्मनी क्यों है?
राजीव रंगीला को AAP ने कथित दवा घोटाले का मास्टरमाइंड बताया है। सौरभ भारद्वाज के अनुसार, समय पर गिरफ्तारी न होने के कारण वह देश छोड़कर जर्मनी चला गया। AAP ने उसके प्रत्यर्पण और पूछताछ की माँग की है।
LNJP अस्पताल के बाहर प्रदर्शन में AAP ने क्या माँगें रखीं?
AAP ने तीन प्रमुख माँगें रखीं — CM रेखा गुप्ता और स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफा, राजीव रंगीला का प्रत्यर्पण, और पूरे मामले की न्यायिक या स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जाँच। पार्टी ने CPA के माध्यम से केंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया की समीक्षा की भी माँग की।
इस घोटाले का आम दिल्लीवासियों पर क्या असर पड़ा?
AAP विधायकों के अनुसार कथित घोटाले के कारण सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की कमी और जाँच सेवाओं में बाधा आई है, जिससे गरीब मरीज सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। हालाँकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक खंडन सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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