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दिल्ली में ₹103 करोड़ का एक्स-रे मशीन घोटाला? आप ने रेखा गुप्ता सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

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दिल्ली में ₹103 करोड़ का एक्स-रे मशीन घोटाला? आप ने रेखा गुप्ता सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

सारांश

AAP के सौरभ भारद्वाज का दावा — दिल्ली सरकार ने 448 पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें बाज़ार से तीन गुना ऊँची कीमत पर खरीदीं, टेंडर केवल दो मशीनों का जारी किया और बाकी ₹103 करोड़ की खरीद पर्दे के पीछे हुई। कथित दिल्ली दवा घोटाले में यह नया और गंभीर आयाम है।

मुख्य बातें

AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने 1 जुलाई 2026 को रेखा गुप्ता सरकार पर ₹103 करोड़ के एक्स-रे मशीन घोटाले का आरोप लगाया।
कथित तौर पर ₹10 लाख बाज़ार मूल्य वाली मशीनें ₹33 लाख प्रति मशीन की दर से खरीदी गईं; 448 मशीनों पर कुल ₹148 करोड़ खर्च का आरोप।
टेंडर केवल दो मशीनों के लिए जारी किया गया, लेकिन कथित तौर पर उसी कंपनी से 448 मशीनें खरीद ली गईं।
राजीव रंगीला और उनकी कंपनी एफ-मेड डिवाइसेस की इस खरीद में केंद्रीय भूमिका होने का आरोप।
AAP ने स्वतंत्र जाँच और पूरी खरीद प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की माँग की।

आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने 1 जुलाई 2026 को रेखा गुप्ता सरकार पर 448 पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की खरीद में कथित तौर पर ₹103 करोड़ की वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया। यह आरोप कथित 'दिल्ली दवा घोटाले' की जाँच के बीच सामने आया है, जिससे राजधानी की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।

मुख्य आरोप: क्या है एक्स-रे मशीन घोटाला?

भारद्वाज के अनुसार, इन पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की बाज़ार कीमत लगभग ₹10 लाख प्रति मशीन है, जबकि दिल्ली सरकार ने इन्हें कथित तौर पर ₹33 लाख प्रति मशीन की दर से खरीदा। उनके दावे के मुताबिक, 448 मशीनों की कुल खरीद पर ₹148 करोड़ खर्च हुए, जबकि वास्तविक बाज़ार मूल्य पर यह राशि लगभग ₹45 करोड़ होनी चाहिए थी। दोनों रकमों के बीच के ₹103 करोड़ के अंतर को उन्होंने 'कमीशनखोरी' का नतीजा बताया।

राजीव रंगीला और एफ-मेड डिवाइसेस की भूमिका

भारद्वाज ने आरोप लगाया कि इस कथित घोटाले में राजीव रंगीला नामक व्यक्ति की केंद्रीय भूमिका रही। उनके दावे के अनुसार, रंगीला ने एफ-मेड डिवाइसेस नाम से कंपनी बनाकर एक बड़ी पोर्टेबल एक्स-रे मशीन निर्माता कंपनी की डिस्ट्रीब्यूटरशिप हासिल की और उसी माध्यम से दिल्ली सरकार को मशीनें ऊँची कीमत पर बेची गईं। गौरतलब है कि इन आरोपों पर अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक खंडन सामने नहीं आया है।

टेंडर प्रक्रिया पर सवाल

आप नेता के अनुसार, सरकार को पहले से ज्ञात था कि उसे 450 से 500 पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की आवश्यकता है। इसके बावजूद सरकारी पोर्टल पर केवल दो मशीनों के लिए टेंडर जारी किया गया। भारद्वाज का आरोप है कि टेंडर की तकनीकी शर्तें इस प्रकार तैयार की गईं कि केवल एक विशेष कंपनी ही उनके लिए पात्र हो सके, जिसके चलते कोई अन्य कंपनी बोली में शामिल नहीं हुई। तत्पश्चात, औपचारिक टेंडर के बाहर उसी कंपनी से 448 मशीनें खरीद ली गईं — जिसे उन्होंने पारदर्शिता के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन बताया।

आप की माँग: स्वतंत्र जाँच और पारदर्शिता

भारद्वाज ने इस मामले को 'एक्स-रे मशीन घोटाला' करार देते हुए माँग की कि पूरी खरीद प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए और मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच कराई जाए। उन्होंने इसे दिल्ली के करदाताओं के पैसे की 'बड़े स्तर पर बर्बादी' बताया। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में कथित दवा घोटाले को लेकर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप पहले से ही जारी है।

आगे क्या होगा

फिलहाल रेखा गुप्ता सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आप ने संकेत दिया है कि वह इस मामले को संसदीय मंच और जन अदालत दोनों में उठाएगी। यह देखना होगा कि क्या सरकार स्वतंत्र जाँच के लिए तैयार होती है या इन आरोपों को सिरे से खारिज करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ये अभी तक केवल राजनीतिक दावे हैं — किसी स्वतंत्र लेखापरीक्षा या न्यायिक जाँच द्वारा सत्यापित नहीं। दिल्ली की राजनीति में विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों एक-दूसरे पर घोटाले के आरोप लगाते रहे हैं, जिससे जनता के लिए तथ्य और राजनीति के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या आप इस मामले को किसी जाँच एजेंसी या न्यायालय तक ले जाती है — या यह भी महज़ प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित रहता है। सरकारी खरीद में पारदर्शिता सुनिश्चित करना किसी भी दल की ज़िम्मेदारी है, और यही वह बिंदु है जहाँ जवाबदेही की माँग सबसे ज़रूरी है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली एक्स-रे मशीन घोटाला क्या है?
AAP के सौरभ भारद्वाज के अनुसार, दिल्ली सरकार ने 448 पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें बाज़ार मूल्य से लगभग तीन गुना ऊँची कीमत पर खरीदीं, जिससे कथित तौर पर ₹103 करोड़ की अनियमितता हुई। यह आरोप 1 जुलाई 2026 को लगाए गए और इन्हें कथित 'दिल्ली दवा घोटाले' का नया आयाम बताया जा रहा है।
सौरभ भारद्वाज के अनुसार मशीनों की कीमत में कितना अंतर था?
भारद्वाज का दावा है कि इन मशीनों की बाज़ार कीमत लगभग ₹10 लाख प्रति मशीन थी, जबकि सरकार ने इन्हें ₹33 लाख प्रति मशीन की दर से खरीदा। इस प्रकार 448 मशीनों पर ₹148 करोड़ खर्च हुए, जबकि वास्तविक लागत ₹45 करोड़ होनी चाहिए थी।
टेंडर प्रक्रिया में क्या गड़बड़ी का आरोप है?
आरोप है कि सरकारी पोर्टल पर केवल दो मशीनों के लिए टेंडर जारी किया गया, जबकि ज़रूरत 450-500 मशीनों की थी। टेंडर की शर्तें कथित तौर पर इस तरह बनाई गईं कि केवल एक विशेष कंपनी ही पात्र हो, और बाद में उसी कंपनी से 448 मशीनें बिना खुली बोली के खरीद ली गईं।
राजीव रंगीला और एफ-मेड डिवाइसेस का इस मामले से क्या संबंध बताया गया है?
भारद्वाज के अनुसार, राजीव रंगीला ने एफ-मेड डिवाइसेस नाम की कंपनी बनाकर एक बड़ी पोर्टेबल एक्स-रे मशीन निर्माता कंपनी की डिस्ट्रीब्यूटरशिप ली और उसी के ज़रिए दिल्ली सरकार को ऊँची कीमत पर मशीनें बेची गईं। ये आरोप अभी तक केवल AAP की ओर से लगाए गए हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
AAP ने इस मामले में क्या माँग की है?
AAP ने मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच तथा पूरी खरीद प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की माँग की है। पार्टी ने इसे दिल्ली के करदाताओं के पैसे की बर्बादी बताया है और रेखा गुप्ता सरकार से जवाब माँगा है।
राष्ट्र प्रेस
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