8 अगस्त 2026
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दिल्ली दवा घोटाला: AAP का आरोप — ₹650 करोड़ के घोटाले में 70-80% दवाएं अस्पतालों तक नहीं पहुंचीं

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दिल्ली दवा घोटाला: AAP का आरोप — ₹650 करोड़ के घोटाले में 70-80% दवाएं अस्पतालों तक नहीं पहुंचीं

सारांश

AAP के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज का दावा है कि कथित ₹650 करोड़ के दवा घोटाले के भीतर एक और घोटाला हुआ — 70-80% दवाइयां अस्पतालों तक पहुंचने के बजाय कथित तौर पर खुले बाजार में बेच दी गईं। सरदार वल्लभ भाई पटेल अस्पताल में रिकॉर्ड और वास्तविकता के बीच का अंतर इस आरोप की धुरी है।

मुख्य बातें

AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने 8 अगस्त 2026 को दिल्ली सरकार पर कथित ₹650 करोड़ के दवा घोटाले में नई परत का आरोप लगाया।
आरोप है कि ₹100 करोड़ की दवाइयां ₹400 करोड़ में खरीदी गईं — कथित ₹300 करोड़ की कमीशनखोरी।
कथित तौर पर 70-80% दवाइयां अस्पतालों तक नहीं पहुंचीं और खुले बाजार में बेची गईं; केवल 20-30% अस्पतालों को मिलीं।
सरदार वल्लभ भाई पटेल अस्पताल में रिकॉर्ड के अनुसार दवाइयां पहुंचाई गई दिखाई गईं, लेकिन वास्तव में वहां उपलब्ध नहीं मिलीं।
AAP का आरोप है कि मौजूदा सरकार एमआरपी वाली दवाइयां खरीद रही है, जिन्हें खुले बाजार में बेचना संभव है — पूर्ववर्ती व्यवस्था में यह प्रतिबंधित था।
AAP विधायक कुलदीप कुमार के अस्पताल दौरे में दवाओं की कमी और एमआरपी वाली दवाइयों की उपस्थिति सामने आई थी।

आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने 8 अगस्त 2026 को दिल्ली सरकार पर कथित ₹650 करोड़ के दवा घोटाले में एक और परत उजागर होने का आरोप लगाया — उनके अनुसार खरीदी गई दवाइयों का बड़ा हिस्सा सरकारी अस्पतालों तक पहुंचा ही नहीं और आपूर्ति केवल कागजों में दर्ज रही। यह आरोप ऐसे समय में आया है जब दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी को लेकर पहले से सवाल उठ रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

भारद्वाज के अनुसार, कथित तौर पर करीब ₹100 करोड़ की दवाइयों को ₹400 करोड़ में खरीदा गया, जिससे लगभग ₹300 करोड़ की कमीशनखोरी का आरोप सामने आता है। उन्होंने कहा कि इस खरीद घोटाले के भीतर एक और घोटाला यह है कि जो दवाइयां सरकारी रिकॉर्ड में अस्पतालों को भेजी गई दिखाई गई हैं, वे वास्तव में वहां उपलब्ध नहीं मिलीं।

उन्होंने सरदार वल्लभ भाई पटेल अस्पताल का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि अस्पताल की फाइलों में लाखों रुपए की दवाइयां मंगाने और पहुंचाने का रिकॉर्ड दर्ज है, लेकिन जब वास्तविक उपलब्धता की जांच की गई तो दवाइयां वहां मौजूद नहीं थीं।

एमआरपी विवाद और खुले बाज़ार में बिक्री का आरोप

भारद्वाज ने दवाइयों पर अंकित एमआरपी को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछली AAP सरकार के दौरान केंद्रीय खरीद एजेंसी (CPA) के माध्यम से ऐसी दवाइयां खरीदी जाती थीं, जिन पर एमआरपी नहीं होती थी और उन पर स्पष्ट रूप से 'दिल्ली सरकार की सप्लाई, बिक्री के लिए नहीं' लिखा होता था — ताकि इन्हें खुले बाजार में न बेचा जा सके।

उनका आरोप है कि मौजूदा सरकार एमआरपी वाली दवाइयां खरीद रही है, जिन्हें निजी केमिस्टों के जरिए खुले बाजार में बेचना संभव हो जाता है। भारद्वाज ने दावा किया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार कथित तौर पर 70 से 80 फीसदी दवाइयां अस्पतालों तक पहुंचने के बजाय खुले बाजार में बेच दी गईं, जबकि केवल 20 से 30 फीसदी दवाइयां ही वास्तव में अस्पतालों तक पहुंचीं।

विधायक का अस्पताल दौरा और नई कड़ियां

AAP विधायक कुलदीप कुमार ने कुछ दिन पहले दिल्ली सरकार के अस्पतालों का दौरा कर दवाओं की कमी का मुद्दा उठाया था। भारद्वाज ने कहा कि उस दौरे में जो दवाइयां देखी गईं, उन पर एमआरपी छपी हुई थी — और अब उससे जुड़ी कई और कड़ियां सामने आ रही हैं। गौरतलब है कि अस्पतालों में मरीजों को जरूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं हो रही थीं और कई जगह बेहद सीमित मात्रा में दवाइयां दी जा रही थीं।

आम जनता पर असर

भारद्वाज ने कहा कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है — इसका सीधा असर दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों पर पड़ सकता है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार इस कमी से सर्वाधिक प्रभावित होते हैं।

जांच की मांग और आगे क्या

AAP नेता ने टेंडर और वर्क ऑर्डर से जुड़ी फाइलों के कथित तौर पर गायब होने का भी आरोप लगाया। उन्होंने पूरे मामले की गहन जांच की मांग करते हुए कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि सरकारी खजाने से खरीदी गई दवाइयां आखिर कहां गईं और अस्पतालों तक उनकी वास्तविक आपूर्ति क्यों नहीं हुई। यह देखना होगा कि दिल्ली सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या कोई स्वतंत्र जांच आदेश होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अभी तक ये एकतरफा राजनीतिक दावे हैं — दिल्ली सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया या किसी स्वतंत्र जांच की पुष्टि सामने नहीं आई है। यह ध्यान देने योग्य है कि AAP खुद दिल्ली में वर्षों तक सत्ता में रही और अब विपक्ष की भूमिका में इन्हीं प्रशासनिक तंत्रों पर सवाल उठा रही है — यह विरोधाभास मुख्यधारा की कवरेज में प्रायः अनदेखा रह जाता है। असली परीक्षा यह है कि क्या टेंडर फाइलों के कथित गायब होने और अस्पताल रिकॉर्ड-वास्तविकता के अंतर की जांच कोई स्वायत्त एजेंसी करती है। मरीजों तक दवाओं की पहुंच का सवाल राजनीति से परे है और इसका जवाब जल्द मिलना चाहिए।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली दवा घोटाले में AAP ने क्या नए आरोप लगाए हैं?
AAP के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि कथित ₹650 करोड़ के दवा घोटाले के भीतर एक और घोटाला हुआ है — सरकारी रिकॉर्ड में दवाइयां अस्पतालों को भेजी गई दिखाई गईं, लेकिन वास्तव में वे वहां उपलब्ध नहीं थीं। उनके अनुसार 70-80% दवाइयां कथित तौर पर खुले बाजार में बेच दी गईं।
दवाइयों की एमआरपी इस घोटाले से कैसे जुड़ी है?
भारद्वाज का आरोप है कि पूर्ववर्ती AAP सरकार बिना एमआरपी वाली दवाइयां खरीदती थी जिन पर 'बिक्री के लिए नहीं' लिखा होता था, जबकि मौजूदा सरकार एमआरपी वाली दवाइयां खरीद रही है। एमआरपी वाली दवाइयों को निजी केमिस्टों के जरिए खुले बाजार में बेचना संभव हो जाता है।
सरदार वल्लभ भाई पटेल अस्पताल का इस मामले में क्या संबंध है?
भारद्वाज ने दावा किया कि सरदार वल्लभ भाई पटेल अस्पताल की फाइलों में लाखों रुपए की दवाइयां मंगाने और पहुंचाने का रिकॉर्ड दर्ज है, लेकिन जांच में वे दवाइयां अस्पताल में मौजूद नहीं मिलीं। यह रिकॉर्ड और वास्तविकता के बीच का अंतर इस आरोप का मुख्य आधार है।
₹300 करोड़ की कमीशनखोरी का आरोप क्या है?
AAP का आरोप है कि करीब ₹100 करोड़ की दवाइयों को कथित तौर पर ₹400 करोड़ में खरीदा गया, जिससे लगभग ₹300 करोड़ की कमीशनखोरी हुई। ये आरोप अभी तक पार्टी के दावों पर आधारित हैं और स्वतंत्र जांच से इनकी पुष्टि नहीं हुई है।
इस मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
AAP ने पूरे मामले की गहन जांच की मांग की है और सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि खरीदी गई दवाइयां कहां गईं। अब देखना होगा कि दिल्ली सरकार इन आरोपों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है और क्या कोई स्वतंत्र या न्यायिक जांच आदेश होती है।
राष्ट्र प्रेस
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