₹650 करोड़ दवा घोटाले की जांच के बीच ACB चीफ का तबादला, सौरभ भारद्वाज ने BJP पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आरोप लगाया कि एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के प्रमुख एवं जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस विक्रमजीत सिंह को उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले ही स्थानांतरित करना, दिल्ली के कथित ₹650 करोड़ के दवा और चिकित्सा उपकरण घोटाले की जांच को प्रभावित करने की कोशिश है। भारद्वाज के अनुसार, ACB ने इस मामले में कुछ दिन पहले ही करीब 1,200 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी, और ठीक उसके बाद यह तबादला किया गया।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
सौरभ भारद्वाज ने सवाल उठाया कि क्या विक्रमजीत सिंह को दवा घोटाले की ईमानदारी से जांच करने की 'सजा' के तौर पर मिड-टर्म ट्रांसफर दिया गया। उन्होंने कहा कि विक्रमजीत सिंह का कार्यकाल आधे से भी अधिक बचा हुआ था, इसके बावजूद उन्हें अचानक हटाया गया। भारद्वाज ने यह भी दावा किया कि ACB पर जांच को सीमित रखने के लिए दबाव बनाए जाने की चर्चाएँ हैं — हालाँकि इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई स्वतंत्र जांच रिपोर्ट या दस्तावेज़ सार्वजनिक रूप से पेश नहीं किए।
घोटाले की कथित अनियमितताएँ
भारद्वाज के अनुसार, इस मामले में राजीव रंगीला को कथित तौर पर केंद्रीय भूमिका में बताया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी और शेल कंपनियाँ बनाई गईं और उन्हें लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से टेंडर की शर्तें तय की गईं। भारद्वाज ने खरीद में अनियमितताओं के कई उदाहरण गिनाए — जैसे ₹150 की चादर ₹450 में खरीदी गई, ₹2.50 के ओआरएस पैकेट ₹15 में लिए गए, और लगभग ₹10 लाख में मिलने वाली पोर्टेबल एक्स-रे मशीन ₹33 लाख में खरीदी गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि सिर्फ दो मशीनों के टेंडर के बावजूद 448 मशीनें खरीदी गईं।
दवाओं की खरीद पर गंभीर दावे
भारद्वाज ने आरोप लगाया कि करीब ₹100 करोड़ की दवाएँ ₹400 करोड़ में खरीदी गईं, और कथित तौर पर ये दवाएँ अस्पतालों तक पहुँची ही नहीं। यह घोटाला, उनके अनुसार, कुल मिलाकर ₹650 करोड़ से अधिक का है और इसमें दवाओं से लेकर चिकित्सा उपकरणों तक की खरीद शामिल है। गौरतलब है कि ये सभी आरोप AAP नेता सौरभ भारद्वाज की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है।
राजनीतिक संदर्भ और मीडिया कवरेज पर सवाल
भारद्वाज ने कथित एक्साइज नीति मामले का हवाला देते हुए कहा कि उस मामले को जितनी मीडिया में जगह मिली, उसकी तुलना में ₹650 करोड़ के दवा घोटाले की चार्जशीट की खबर अपेक्षाकृत दब गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले को दबाने की कोशिश इसलिए की जा रही है क्योंकि इससे भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की छवि प्रभावित हो सकती है। BJP की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
क्या होगा आगे
AAP नेता भारद्वाज ने माँग की है कि जांच को पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाया जाए और यदि किसी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनियमितता साबित होती है, तो जांच एजेंसियों को बिना किसी दबाव के उसकी तह तक जाना चाहिए। ACB के नए प्रमुख की नियुक्ति के बाद जांच की दिशा क्या होगी, यह आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगा।