प्रवेश वर्मा बयान दर्ज कराने राउज एवेन्यू कोर्ट नहीं पहुंचे, सौरभ भारद्वाज मानहानि केस में 4 जुलाई की नई तारीख
सारांश
मुख्य बातें
राउज एवेन्यू कोर्ट में मंगलवार, 9 जून को भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता और दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा द्वारा आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले में सुनवाई हुई। व्यस्तता के कारण प्रवेश वर्मा निर्धारित तारीख पर अपना बयान दर्ज कराने अदालत नहीं पहुंच सके, जिसके बाद कोर्ट ने अगली तारीख 4 जुलाई तय की है।
मुख्य घटनाक्रम
सुनवाई के दौरान प्रवेश वर्मा के वकील ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल अत्यधिक व्यस्तता के चलते उपस्थित नहीं हो सके और बयान दर्ज कराने के लिए अतिरिक्त समय का अनुरोध किया। अदालत ने अनुरोध स्वीकार करते हुए 4 जुलाई को राउज एवेन्यू कोर्ट में प्रवेश वर्मा का बयान दर्ज किए जाने का आदेश दिया।
विवाद की जड़: क्या था आरोप
सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर आरोप लगाया था कि प्रवेश वर्मा ने 'एस.एस. मोटा सिंह स्कूल ट्रस्ट' में अपने मंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए अपने करीबी सहयोगी को ट्रस्टी नियुक्त कराया। भारद्वाज ने दावा किया था कि इस ट्रस्ट के पास करीब ₹500 करोड़ की संपत्ति है। इन आरोपों को प्रवेश वर्मा ने पूरी तरह झूठा, निराधार और मानहानिकारक बताते हुए आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई।
सिविल मानहानि मामले में भी कार्रवाई जारी
आपराधिक मामले के समानांतर, प्रवेश वर्मा द्वारा दायर सिविल मानहानि याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने सौरभ भारद्वाज को समन जारी किया है और उन्हें 30 दिनों के भीतर लिखित जवाब तथा हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। सिविल मामले में प्रवेश वर्मा ने भारद्वाज से ₹5 करोड़ के हर्जाने की मांग की है।
याचिका में क्या कहा गया
प्रवेश वर्मा की याचिका के अनुसार, सौरभ भारद्वाज ने एक्स पर उनके खिलाफ झूठे, दुर्भावनापूर्ण और अत्यधिक अपमानजनक पोस्ट और वीडियो साझा किए, जिनमें आरोप लगाया गया कि उन्होंने मंत्री पद का दुरुपयोग कर अपने सहयोगी को निजी स्कूल ट्रस्ट में नियुक्त कराया। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब AAP और BJP के बीच दिल्ली में राजनीतिक तनाव चरम पर है।
आगे क्या होगा
अब 4 जुलाई को राउज एवेन्यू कोर्ट में प्रवेश वर्मा का बयान दर्ज किया जाएगा, जो आपराधिक मानहानि मामले में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। साथ ही सिविल मानहानि मामले में सौरभ भारद्वाज की ओर से दिल्ली उच्च न्यायालय में जवाब दाखिल किए जाने की समयसीमा भी नज़दीक आ रही है। दोनों मामलों का परिणाम दिल्ली की राजनीति पर व्यापक असर डाल सकता है।