बांसुरी स्वराज का बड़ा हमला: AAP का महिला विरोधी चेहरा फिर बेनकाब, साकेत कोर्ट ने दिया आदेश

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बांसुरी स्वराज का बड़ा हमला: AAP का महिला विरोधी चेहरा फिर बेनकाब, साकेत कोर्ट ने दिया आदेश

सारांश

भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने AAP पर महिला विरोधी रवैये का आरोप लगाया। साकेत कोर्ट ने सौरभ भारद्वाज और अंकुश नारंग को 48 घंटे में मानहानिकारक वीडियो हटाने का आदेश दिया। स्वराज ने कहा — न डरूंगी, न झुकूंगी।

Key Takeaways

  • भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने 23 अप्रैल 2025 को AAP पर महिला विरोधी रवैये का आरोप लगाया।
  • दिल्ली की साकेत कोर्ट ने AAP नेता सौरभ भारद्वाज और अंकुश नारंग को मानहानिकारक वीडियो 48 घंटे में हटाने का आदेश दिया।
  • कोर्ट ने इन वीडियो को आगे शेयर करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया और स्वराज को प्लेटफॉर्म्स से संपर्क का अधिकार दिया।
  • 18 अप्रैल 2025 के विरोध मार्च के दौरान बांसुरी स्वराज और केंद्रीय राज्य मंत्री रक्षा खडसे को कथित रूप से निशाना बनाया गया था।
  • बांसुरी स्वराज ने 21 अप्रैल को भी कहा था कि अरविंद केजरीवाल को याद रखना चाहिए कि न्यायपालिका संविधान के तहत काम करती है।
  • यह मामला राजनीतिक मानहानि और सोशल मीडिया जवाबदेही के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी नजीर बन सकता है।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने बुधवार को आम आदमी पार्टी (AAP) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी का महिला विरोधी चेहरा एक बार फिर देश के सामने उजागर हो गया है। यह बयान उन्होंने AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के खिलाफ दायर मानहानि मामले में दिल्ली की साकेत कोर्ट के आदेश के बाद दिया।

क्या है पूरा विवाद?

18 अप्रैल 2025 को दिल्ली में एक विरोध मार्च के दौरान AAP नेता सौरभ भारद्वाज और अंकुश नारंग ने कथित रूप से ऐसे वीडियो प्रसारित किए जिनमें भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज और केंद्रीय राज्य मंत्री रक्षा खडसे को निशाना बनाया गया था। बांसुरी स्वराज का आरोप है कि इन वीडियो में उनके और मंत्री खडसे के बारे में झूठी और भ्रामक जानकारी फैलाई गई।

स्वराज ने कहा, "जब हम महिलाओं के अधिकारों के लिए सड़क पर उतरकर आवाज उठा रहे थे, उस वक्त AAP के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज मीम्स बनाने में व्यस्त थे।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे AAP के किसी भी नेता से न डरती हैं, न दबने वाली हैं और न झुकने वाली हैं।

साकेत कोर्ट का अहम आदेश

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने इस मामले में AAP नेता सौरभ भारद्वाज, अंकुश नारंग और आम आदमी पार्टी को निर्देश दिया है कि वे 18 अप्रैल के विरोध मार्च से जुड़े सभी कथित मानहानिकारक वीडियो को तत्काल प्रभाव से हटाएं।

अदालत ने इन वीडियो को आगे शेयर करने पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही कोर्ट ने बांसुरी स्वराज को यह अधिकार दिया है कि यदि 48 घंटों के भीतर यह आपत्तिजनक कंटेंट नहीं हटाया जाता, तो वे संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से सीधे संपर्क कर सकती हैं।

AAP पर पहले भी उठे हैं महिला सम्मान के सवाल

गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब आम आदमी पार्टी पर महिलाओं के प्रति असंवेदनशीलता के आरोप लगे हों। 2023 में स्वाति मालीवाल विवाद के बाद से पार्टी की महिला नीति पर सवाल उठते रहे हैं। उस मामले में भी कोर्ट और सार्वजनिक दबाव के बाद पार्टी को पीछे हटना पड़ा था।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर महिला नेताओं को निशाना बनाकर मीम्स और वीडियो प्रसारित करने की यह प्रवृत्ति राजनीतिक विमर्श को निम्न स्तर पर ले जाती है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाती है।

21 अप्रैल को भी साधा था निशाना

इससे पहले 21 अप्रैल 2025 को भी बांसुरी स्वराज ने अरविंद केजरीवाल पर सीधा हमला किया था। उन्होंने कहा था, "ऐसा लगता है कि अरविंद केजरीवाल भूल गए हैं कि इस देश की न्यायिक व्यवस्था उनकी सुविधा के अनुसार नहीं, बल्कि कानून और भारत के संविधान के अनुसार काम करती है।"

यह बयान ऐसे समय में आया जब AAP दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद अपनी राजनीतिक जमीन दोबारा मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। ऐसे में कोर्ट का यह आदेश पार्टी की छवि के लिए एक और झटका माना जा रहा है।

राजनीतिक और कानूनी प्रभाव

साकेत कोर्ट के इस आदेश के बाद AAP के सामने दो विकल्प हैं — या तो वे 48 घंटे के भीतर सभी विवादित वीडियो हटाएं, या फिर उच्च न्यायालय में अपील करें। कानूनी जानकारों के अनुसार यदि कंटेंट नहीं हटाया गया तो संबंधित प्लेटफॉर्म्स पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

यह मामला भविष्य में राजनीतिक मानहानि और सोशल मीडिया जवाबदेही के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण नजीर बन सकता है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि AAP इस कोर्ट आदेश का पालन करती है या नहीं, और क्या मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचता है।

Point of View

बल्कि उस राजनीतिक संस्कृति पर सवाल है जहां विरोधी महिला नेताओं को सोशल मीडिया पर निशाना बनाना रणनीति का हिस्सा बन गया है। विडंबना यह है कि AAP ने अपनी स्थापना के समय 'नई राजनीति' का वादा किया था, लेकिन मीम्स और भ्रामक वीडियो की यह शैली पुरानी गंदी राजनीति से अलग नहीं दिखती। दिल्ली चुनाव में हार के बाद पार्टी की विश्वसनीयता पहले से दांव पर है — कोर्ट का यह हस्तक्षेप उस संकट को और गहरा करता है। मुख्यधारा की मीडिया इसे केवल BJP-AAP की लड़ाई बता रही है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारत में महिला राजनेताओं को डिजिटल उत्पीड़न से बचाने के लिए कानूनी ढांचा पर्याप्त है?
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

बांसुरी स्वराज और AAP के बीच विवाद क्या है?
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने AAP नेता सौरभ भारद्वाज और अंकुश नारंग पर 18 अप्रैल के विरोध मार्च में उनके खिलाफ मानहानिकारक वीडियो फैलाने का आरोप लगाया है। दिल्ली की साकेत कोर्ट ने AAP को ये वीडियो 48 घंटे में हटाने का आदेश दिया है।
साकेत कोर्ट ने AAP को क्या आदेश दिया?
साकेत कोर्ट ने AAP नेताओं सौरभ भारद्वाज, अंकुश नारंग और पार्टी को निर्देश दिया कि वे बांसुरी स्वराज से जुड़े मानहानिकारक वीडियो तत्काल हटाएं और उन्हें आगे शेयर न करें। कोर्ट ने स्वराज को यह भी अधिकार दिया कि 48 घंटे में कंटेंट न हटाने पर वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से सीधे संपर्क कर सकती हैं।
बांसुरी स्वराज ने AAP पर क्या आरोप लगाए?
बांसुरी स्वराज ने AAP पर महिला विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब वे महिलाओं के अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रही थीं, तब AAP के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज मीम्स बनाने में व्यस्त थे और उनके बारे में झूठ फैला रहे थे।
क्या AAP ने पहले भी महिला नेताओं के खिलाफ विवाद किया है?
हां, 2023 में स्वाति मालीवाल विवाद के बाद से AAP पर महिलाओं के प्रति असंवेदनशीलता के आरोप लगते रहे हैं। वर्तमान मानहानि मामला इसी श्रृंखला की एक और कड़ी माना जा रहा है।
अगर AAP ने 48 घंटे में वीडियो नहीं हटाए तो क्या होगा?
यदि AAP निर्धारित समयसीमा में वीडियो नहीं हटाती, तो बांसुरी स्वराज कोर्ट के आदेश के तहत संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से सीधे संपर्क कर सकती हैं। कानूनी जानकारों के अनुसार इससे AAP के नेताओं के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही भी हो सकती है।
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