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सौरभ भारद्वाज पर FIR: जनकपुरी रेप पीड़िता की पहचान उजागर करने पर AAP नेता के खिलाफ मुकदमा

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सौरभ भारद्वाज पर FIR: जनकपुरी रेप पीड़िता की पहचान उजागर करने पर AAP नेता के खिलाफ मुकदमा

सारांश

AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज पर FIR — जनकपुरी स्कूल में 3 साल की बच्ची के साथ कथित बलात्कार की पीड़िता की पहचान एक्स पर सार्वजनिक करने का आरोप। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की कोशिश कानूनी पचड़े में फँसी।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने 2 जून 2026 को AAP नेता सौरभ भारद्वाज के खिलाफ FIR दर्ज की।
आरोप: जनकपुरी स्कूल में 3 वर्षीय रेप पीड़िता की पहचान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उजागर करना।
कथित आरोपी स्कूल का 57 वर्षीय वरिष्ठ अधिकारी बताया गया है।
भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस पर मामला दबाने और AIIMS में पुनः जाँच से इनकार का आरोप लगाया था।
AAP ने इस मामले को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया था।
जनकपुरी पुलिस मामले की जाँच जारी रखे हुए है।

दिल्ली पुलिस ने 2 जून 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जनकपुरी स्थित एक स्कूल में 3 वर्षीय बच्ची के साथ हुए कथित बलात्कार की पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने के आरोप में यह मुकदमा दर्ज किया गया है। फिलहाल जनकपुरी पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, पिछले महीने जनकपुरी के एक स्कूल परिसर में मात्र 3 साल की बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म की घटना सामने आई थी। इस मामले में एक 57 वर्षीय वरिष्ठ स्कूल अधिकारी को आरोपी बताया गया है। घटना के बाद सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के ज़रिए पीड़िता से जुड़ी जानकारी साझा की, जिसे कानूनी तौर पर प्रतिबंधित माना जाता है।

भारद्वाज ने अपनी पोस्ट में लिखा था: 'आज देश में सबसे कम उम्र की एक कॉकरोच है — जो मात्र 3 साल की एक बच्ची है। जनकपुरी के एक स्कूल में उसके साथ बलात्कार हुआ। आरोपी स्कूल का 57 वर्षीय वरिष्ठ अधिकारी है।' यह पोस्ट यौन अपराधों में पीड़ित की पहचान गोपनीय रखने संबंधी कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन के आधार पर FIR का कारण बनी।

भारद्वाज के आरोप और पुलिस पर सवाल

सौरभ भारद्वाज ने इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस पर गंभीर सवाल उठाए थे। उनके अनुसार, पीड़िता की माँ ने आरोप लगाया कि स्थानीय SHO और DCP मामले को दबाने के लिए उन पर दबाव बना रहे हैं।

भारद्वाज ने यह भी कहा कि पीड़िता के माता-पिता AIIMS में दोबारा चिकित्सा जाँच कराने की माँग कर रहे हैं, लेकिन पुलिस इसके लिए तैयार नहीं है। उन्होंने सवाल किया था कि स्कूल के वरिष्ठ अधिकारी और आरोपी को कौन बचा रहा है और क्या न्याय केवल सोशल मीडिया पर दबाव पड़ने पर ही मिलेगा।

AAP का विरोध प्रदर्शन

इस घटना को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन भी किया था। पार्टी ने पीड़ित परिवार के लिए न्याय और मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग की थी। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में बाल यौन अपराध के मामलों को लेकर राजनीतिक तापमान पहले से ऊँचा है।

कानूनी पहलू

यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) और भारतीय दंड संहिता के तहत पीड़ित की पहचान उजागर करना दंडनीय अपराध है। इस प्रावधान के तहत सार्वजनिक हस्तियों पर भी मुकदमा दर्ज किया जा सकता है, चाहे उनका इरादा पीड़ित की मदद करना ही क्यों न हो। जनकपुरी पुलिस मामले की जाँच जारी रखे हुए है।

आगे क्या होगा

जाँच एजेंसियाँ अब यह निर्धारित करेंगी कि भारद्वाज की पोस्ट कानून के किन प्रावधानों का उल्लंघन करती है और क्या उन पर आगे की कार्रवाई होगी। इस मामले में दोनों पक्ष — पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की माँग और कानूनी प्रक्रिया का पालन — एक साथ सामने आए हैं, जो इसे राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से संवेदनशील बनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वही कानूनन आरोपी बन गया। POCSO के तहत पीड़ित की पहचान छुपाना अनिवार्य है, भले ही इरादा जनजागरण का हो। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई वास्तव में कानून के पालन की भावना से है, या राजनीतिक असुविधा को शांत करने की कोशिश — खासकर तब जब पीड़ित परिवार खुद पुलिस पर दबाव बनाने का आरोप लगा रहा है। मुख्यधारा की कवरेज FIR पर केंद्रित है, लेकिन AIIMS में पुनः जाँच की माँग को नकारने का सवाल अभी भी अनुत्तरित है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सौरभ भारद्वाज के खिलाफ FIR क्यों दर्ज हुई?
दिल्ली पुलिस ने AAP नेता सौरभ भारद्वाज पर FIR दर्ज की है क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर जनकपुरी स्कूल में 3 वर्षीय रेप पीड़िता की पहचान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सार्वजनिक कर दी। POCSO अधिनियम के तहत यौन अपराध पीड़ितों की पहचान उजागर करना कानूनी रूप से प्रतिबंधित है।
जनकपुरी स्कूल रेप मामला क्या है?
पिछले महीने दिल्ली के जनकपुरी स्थित एक स्कूल परिसर में 3 साल की बच्ची के साथ कथित बलात्कार की घटना सामने आई थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, स्कूल का 57 वर्षीय वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में आरोपी है और जाँच जारी है।
सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस पर क्या आरोप लगाए थे?
भारद्वाज ने आरोप लगाया था कि स्थानीय SHO और DCP पीड़िता की माँ पर मामला दबाने के लिए दबाव बना रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस AIIMS में पीड़िता की पुनः चिकित्सा जाँच कराने से इनकार कर रही है।
क्या पीड़ित की पहचान उजागर करना कानूनी अपराध है?
हाँ, POCSO अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत यौन अपराध के पीड़ित की पहचान सार्वजनिक करना दंडनीय अपराध है। यह प्रावधान सार्वजनिक हस्तियों पर भी समान रूप से लागू होता है।
AAP ने इस मामले पर क्या रुख अपनाया?
आम आदमी पार्टी ने इस घटना को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया और पीड़ित परिवार के लिए न्याय तथा निष्पक्ष जाँच की माँग की। पार्टी ने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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