2 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिल्ली बेडशीट घोटाला: AAP का आरोप — ₹150 की शीट ₹450 में खरीदी, ₹50 करोड़ की कथित लूट

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिल्ली बेडशीट घोटाला: AAP का आरोप — ₹150 की शीट ₹450 में खरीदी, ₹50 करोड़ की कथित लूट

सारांश

AAP नेता सौरभ भारद्वाज का दावा — दिल्ली सरकार ने AIIMS को ₹150 में मिलने वाली बेडशीट ₹450 में खरीदी, एक ही परिवार की तीन कंपनियों को टेंडर में पात्र बनाया और ₹50 करोड़ की कथित लूट हुई। यह ₹650 करोड़ के कथित दवा घोटाले का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

AAP दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने 2 जुलाई 2025 को दिल्ली सरकार पर बेडशीट खरीद में 200% कमीशनखोरी का आरोप लगाया।
आरोप के अनुसार, AIIMS को ₹150 में उपलब्ध बेडशीट दिल्ली सरकार ने ₹450 प्रति पीस की दर से खरीदी — प्रति शीट ₹300 अतिरिक्त।
15,500 बेड वाले अस्पतालों के लिए 16.60 लाख बेडशीट खरीदी गईं, यानी प्रति बेड औसतन 106 शीट ; कुल खर्च ₹75 करोड़ ।
कथित रूप से ₹50 करोड़ की अनियमितता; पूरा मामला ₹650 करोड़ के दवा घोटाले का हिस्सा बताया गया।
टेंडर में एक ही परिवार की तीन कंपनियों को पात्र बनाने और प्रतिस्पर्धा प्रभावित करने का भी आरोप।
28 अस्पतालों, 203 डिस्पेंसरी और 370 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में आउटसोर्स लैब सेवाएँ बंद होने का मुद्दा भी उठाया गया।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने 2 जुलाई 2025 को दिल्ली की भाजपा सरकार पर सरकारी अस्पतालों के लिए बेडशीट खरीद में 200 प्रतिशत तक कमीशनखोरी का गंभीर आरोप लगाया। पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस मामले को ₹650 करोड़ के कथित दवा घोटाले का विस्तार बताते हुए इसे 'बेडशीट घोटाला' करार दिया। ये सभी आरोप अभी तक सिद्ध नहीं हुए हैं और दिल्ली सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मुख्य आरोप: ₹150 की शीट ₹450 में

सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि जिस कंपनी ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) को एक बेडशीट ₹150 प्रति पीस की दर पर उपलब्ध कराई, उसी कंपनी से दिल्ली सरकार ने वही बेडशीट ₹450 प्रति पीस की दर से खरीदी। उनके अनुसार, इस तरह प्रति बेडशीट ₹300 का अतिरिक्त भुगतान किया गया, जिसे उन्होंने 200 प्रतिशत कमीशनखोरी बताया।

भारद्वाज ने यह भी बताया कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में कुल लगभग 15,500 बेड हैं, जबकि सरकार ने ₹75 करोड़ खर्च कर करीब 16.60 लाख बेडशीट खरीदीं। इस हिसाब से प्रत्येक बेड के लिए औसतन 106 बेडशीट खरीदी गईं। उनका दावा है कि जरूरत से कहीं अधिक मात्रा में खरीद कर करीब ₹50 करोड़ की कथित लूट की गई।

केंद्रीय खरीद व्यवस्था पर सवाल

AAP नेता ने आरोप लगाया कि पहले सरकारी अस्पतालों को अपनी आवश्यकता के अनुसार सामान खरीदने की स्वतंत्रता थी। वर्तमान सरकार ने सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी के माध्यम से केंद्रीय खरीद व्यवस्था लागू की, और कथित तौर पर इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर मनमाने दामों पर खरीदारी की गई।

भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में एक ही परिवार से जुड़ी तीन कंपनियों को पात्र बनाया गया, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई और अंततः एक कंपनी को खरीद आदेश जारी किया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की है।

आउटसोर्स लैब सेवाएँ बंद होने का मुद्दा

सौरभ भारद्वाज ने एक अन्य गंभीर मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार ने 28 सरकारी अस्पतालों, 203 डिस्पेंसरी और 370 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में आउटसोर्स लैब सेवाएँ अचानक बंद कर दी हैं। उनके अनुसार, जिला स्तर के डॉक्टरों और अधिकारियों ने टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे, जिसके चलते सरकार को ये सेवाएँ रोकनी पड़ीं।

AAP का दावा है कि वर्ष 2025 में जारी इस टेंडर को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं और दूसरे वर्ष के लिए इसकी मंजूरी अब तक लंबित है। पार्टी ने स्वास्थ्य विभाग में खरीद और टेंडर प्रक्रिया में बड़े स्तर पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पहले से ही चर्चा में है। यदि आउटसोर्स लैब सेवाएँ बंद रहती हैं, तो 28 अस्पतालों और 203 डिस्पेंसरी में इलाज कराने वाले हजारों मरीजों को परेशानी हो सकती है। गौरतलब है कि ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

क्या होगा आगे

AAP ने माँग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए। दिल्ली सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का अभी इंतजार है। यह मामला आने वाले दिनों में दिल्ली की राजनीति में और गर्माने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यदि आरोप सच निकले तो यह उसी व्यवस्था के दुरुपयोग का उदाहरण होगा। गौरतलब है कि ये आरोप विपक्ष की ओर से हैं और स्वतंत्र जाँच के बिना इनकी पुष्टि नहीं होती — लेकिन AIIMS और दिल्ली सरकार की खरीद दरों में इतना बड़ा अंतर, यदि सत्यापित हो, तो यह जवाबदेही का गंभीर सवाल खड़ा करता है।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली बेडशीट घोटाला क्या है?
AAP के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के अनुसार, दिल्ली सरकार ने सरकारी अस्पतालों के लिए ₹150 में उपलब्ध बेडशीट ₹450 प्रति पीस की दर से खरीदी, जो 200 प्रतिशत अधिक है। इस कथित अनियमितता में करीब ₹50 करोड़ की लूट का आरोप है और इसे ₹650 करोड़ के दवा घोटाले का हिस्सा बताया गया है।
दिल्ली सरकार ने कितनी बेडशीट खरीदीं और इसमें क्या गड़बड़ी बताई जा रही है?
आरोपों के अनुसार, 15,500 बेड वाले सरकारी अस्पतालों के लिए ₹75 करोड़ खर्च कर करीब 16.60 लाख बेडशीट खरीदी गईं, यानी प्रति बेड औसतन 106 शीट। AAP का दावा है कि यह मात्रा जरूरत से कहीं अधिक है और इसी के जरिए सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
टेंडर प्रक्रिया में क्या अनियमितता का आरोप है?
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि टेंडर में एक ही परिवार से जुड़ी तीन कंपनियों को पात्र बनाया गया, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई और अंततः एक कंपनी को खरीद आदेश दिया गया। यह आरोप अभी सिद्ध नहीं हुआ है और दिल्ली सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
दिल्ली में आउटसोर्स लैब सेवाएँ क्यों बंद हुईं?
AAP के अनुसार, दिल्ली सरकार ने 28 अस्पतालों, 203 डिस्पेंसरी और 370 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में आउटसोर्स लैब सेवाएँ अचानक बंद कर दीं क्योंकि जिला स्तर के डॉक्टरों और अधिकारियों ने टेंडर प्रावधानों पर सवाल उठाए थे। 2025 में जारी इस टेंडर के दूसरे वर्ष की मंजूरी अभी लंबित बताई जा रही है।
इस मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
AAP ने पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच और दोषियों पर कार्रवाई की माँग की है। दिल्ली सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। स्वतंत्र जाँच एजेंसी या न्यायिक जाँच की माँग आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. कल
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले