दिल्ली बेडशीट घोटाला: AAP का आरोप — ₹150 की शीट ₹450 में खरीदी, ₹50 करोड़ की कथित लूट
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) ने 2 जुलाई 2025 को दिल्ली की भाजपा सरकार पर सरकारी अस्पतालों के लिए बेडशीट खरीद में 200 प्रतिशत तक कमीशनखोरी का गंभीर आरोप लगाया। पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस मामले को ₹650 करोड़ के कथित दवा घोटाले का विस्तार बताते हुए इसे 'बेडशीट घोटाला' करार दिया। ये सभी आरोप अभी तक सिद्ध नहीं हुए हैं और दिल्ली सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मुख्य आरोप: ₹150 की शीट ₹450 में
सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि जिस कंपनी ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) को एक बेडशीट ₹150 प्रति पीस की दर पर उपलब्ध कराई, उसी कंपनी से दिल्ली सरकार ने वही बेडशीट ₹450 प्रति पीस की दर से खरीदी। उनके अनुसार, इस तरह प्रति बेडशीट ₹300 का अतिरिक्त भुगतान किया गया, जिसे उन्होंने 200 प्रतिशत कमीशनखोरी बताया।
भारद्वाज ने यह भी बताया कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में कुल लगभग 15,500 बेड हैं, जबकि सरकार ने ₹75 करोड़ खर्च कर करीब 16.60 लाख बेडशीट खरीदीं। इस हिसाब से प्रत्येक बेड के लिए औसतन 106 बेडशीट खरीदी गईं। उनका दावा है कि जरूरत से कहीं अधिक मात्रा में खरीद कर करीब ₹50 करोड़ की कथित लूट की गई।
केंद्रीय खरीद व्यवस्था पर सवाल
AAP नेता ने आरोप लगाया कि पहले सरकारी अस्पतालों को अपनी आवश्यकता के अनुसार सामान खरीदने की स्वतंत्रता थी। वर्तमान सरकार ने सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी के माध्यम से केंद्रीय खरीद व्यवस्था लागू की, और कथित तौर पर इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर मनमाने दामों पर खरीदारी की गई।
भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में एक ही परिवार से जुड़ी तीन कंपनियों को पात्र बनाया गया, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई और अंततः एक कंपनी को खरीद आदेश जारी किया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की है।
आउटसोर्स लैब सेवाएँ बंद होने का मुद्दा
सौरभ भारद्वाज ने एक अन्य गंभीर मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार ने 28 सरकारी अस्पतालों, 203 डिस्पेंसरी और 370 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में आउटसोर्स लैब सेवाएँ अचानक बंद कर दी हैं। उनके अनुसार, जिला स्तर के डॉक्टरों और अधिकारियों ने टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे, जिसके चलते सरकार को ये सेवाएँ रोकनी पड़ीं।
AAP का दावा है कि वर्ष 2025 में जारी इस टेंडर को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं और दूसरे वर्ष के लिए इसकी मंजूरी अब तक लंबित है। पार्टी ने स्वास्थ्य विभाग में खरीद और टेंडर प्रक्रिया में बड़े स्तर पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पहले से ही चर्चा में है। यदि आउटसोर्स लैब सेवाएँ बंद रहती हैं, तो 28 अस्पतालों और 203 डिस्पेंसरी में इलाज कराने वाले हजारों मरीजों को परेशानी हो सकती है। गौरतलब है कि ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
क्या होगा आगे
AAP ने माँग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए। दिल्ली सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का अभी इंतजार है। यह मामला आने वाले दिनों में दिल्ली की राजनीति में और गर्माने की संभावना है।