दिल्ली स्वास्थ्य विभाग दवा खरीद घोटाला: सीएम रेखा गुप्ता के आदेश पर भ्रष्टाचार निरोधक जांच तेज, दो अधिकारी निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के सीधे निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) के ज़रिए दवाओं, सर्जिकल सामग्री और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में कथित वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17ए के तहत आगे बढ़ाई जा रही है। 23 जून 2026 को सामने आई इस कार्रवाई में अब तक दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है और एक को गिरफ्तार भी किया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
प्राप्त शिकायतों के आधार पर तत्कालीन महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. वत्सला अग्रवाल तथा उप नियंत्रक लेखा नीरज चोपड़ा की भूमिका की जांच की जा रही है। सीपीए के तत्कालीन प्रभारी डॉ. विनोद कुमार रंगा और डॉ. वत्सला अग्रवाल को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने डॉ. विनोद कुमार रंगा को गिरफ्तार भी कर लिया है।
जांच के दायरे में खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और सरकारी खजाने को कथित नुकसान पहुंचाने के आरोप शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मामले की नियमित समीक्षा एवं निगरानी के भी आदेश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उनके शब्दों में, 'जनता की गाढ़ी कमाई के एक-एक पैसे की रक्षा सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' विधिसम्मत प्रक्रिया के उपरांत दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने सत्ता संभाली है और पूर्व प्रशासन के कार्यकाल की खरीद प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है। गौरतलब है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य खरीद में पारदर्शिता सुनिश्चित करना केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर लंबे समय से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत कार्रवाई के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है, जो इस मामले में मुख्यमंत्री स्तर पर दी गई है — यह इस जांच की संवैधानिक गंभीरता को रेखांकित करता है।
आगे क्या होगा
जांच एजेंसियां अब खरीद रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और संबंधित अधिकारियों के बयान खंगाल रही हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा नियमित निगरानी के आदेश यह संकेत देते हैं कि यह मामला राजनीतिक प्राथमिकता सूची में ऊपर है। आने वाले हफ्तों में और अधिकारियों से पूछताछ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।