दिल्ली स्वास्थ्य विभाग घोटाला: ACB ने पूर्व DGHS वत्सला अग्रवाल और DCA नीरज चोपड़ा को किया गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) ने 28 जून 2026 को दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों — तत्कालीन डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज (DGHS) वत्सला अग्रवाल और DGHS की सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स (DCA) नीरज चोपड़ा को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई दवाइयों, सर्जिकल सामान और मेडिकल उपकरणों की खरीद में कथित तौर पर कई सौ करोड़ रुपये की अनियमितताओं से जुड़े मामले में की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
विजिलेंस डायरेक्टरेट की शिकायत के आधार पर ACB पुलिस स्टेशन में 2 जून को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि DGHS-CPA द्वारा की गई खरीद प्रक्रियाओं में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी की गई। जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर ACB ने पहले दोनों आरोपियों से शनिवार को पूछताछ की और फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
खरीद में कथित हेरफेर के आरोप
आरोप है कि पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, बेड शीट और लिनन, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल उपकरण, एनेस्थीसिया वर्क स्टेशन, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन, सर्जिकल सामान और दवाओं की खरीद में जानबूझकर तकनीकी विशिष्टताओं और टेंडर शर्तों में हेरफेर किया गया। इसका मकसद चुनिंदा सप्लायर्स को अनुचित लाभ पहुँचाना और वैध प्रतिभागियों को निविदा प्रक्रिया से बाहर रखना था। कथित तौर पर इससे सरकारी खजाने को कई सौ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
ACB का बयान और रिमांड की माँग
ACB के आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों आरोपियों को राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल जज (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) की अदालत में पेश किया गया। ACB ने एक दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड की माँग की, जिसका उद्देश्य मामले से जुड़े दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद करना, खरीद के गायब रिकॉर्ड का पता लगाना, अन्य लाभार्थियों और साजिशकर्ताओं की पहचान करना और वित्तीय लेनदेन की जाँच करना है।
आगे क्या होगा
यह मामला दिल्ली के स्वास्थ्य ढाँचे में सार्वजनिक खरीद की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ACB के अनुसार जाँच अभी जारी है और बड़ी साजिश में शामिल अन्य लोगों की पहचान का काम चल रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और खरीद प्रक्रियाओं की जवाबदेही पहले से ही सार्वजनिक बहस का हिस्सा रही है।